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बारिश थमी, बाढ़ से मिली राहत
ब्यूररो,अमर उजाला/सोनभद्र
Updated Tue, 23 Aug 2016 11:21 PM IST
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कोन क्षेत्र के एक गांव में बाढ़ के पानी से निकलते लोग।
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जिले में लगातार बारिश से बाढ़ की जद में आए लोगों को अब राहत मिली है। पिछले दिनों लगातार बारिश से कई लोगों के कच्चे मकान धराशायी हो गए। कई ने घर भी छोड़ दिया था लेकिन पानी कम होने से लोग घरों को लौट आए हैं। इन पीड़ितों की प्रशासन की ओर से कोई मदद नहीं मिली। चार राज्यों झारखंड, मध्यप्रदेश, बिहार और छत्तीसगढ़ की सीमा से सटे सोनभद्र में कई पहाड़ी नदियों के साथ सोन नदी, कनहर, बेलन, पांगन, रेणु, विजुल, मलिया आदि नदियां हैं। इस बार गर्मी में सोन को छोड़ सभी नदियां सूख गई थीं। बारिश के मौसम में यही नदियां लोगों के लिए परेशानी का सबब बनीं। नदियों में पानी का प्रवाह तेज होने से दर्जनों गांवों के लोग बाढ़ की चपेट में आए थे। लेकिन अब राहत हैै।
कोन: सोन नदी के बाढ़ से चाची, नकतवार, मझिगवां, नैकहा, गायघाट, हर्रा और पांडु नदी से पिपरखाड़, रोरवा, खेमपुर, बरवाडीह, कोन बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। खेमपुर में बांध टूटने से बरवाडीह और नैकहां में लोग पंचायत भवन और अंबेडकर भवन में शरण लिए हुए थे। प्रशासन ने इन पीड़ितों की कोई मदद नहीं की। अब लोग अपने-अपने घरों में लौट आए हैं। पिछली बार रिहंद डैम, ओबरा डैम और बाण सागर का पानी छोड़ा गया था तो नैकहा में मुनादी कराई गई थी लेकिन इस बार नहीं हुआ।
घोरावल: बेलन नदी से कुसम्हा और गुरेठ गांव में फसलें प्रभावित हुई हैं। धान की फसल डूब गई हैं। बभनी: पिछले दिनों हुई बारिश में बजिया बंधा का साइड वॉल और पांच चेकडैम अभी भी टूटा हुआ है। पुलिया और सड़क भी क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इससे बजिया गांव में धान की फसल चौपट हो गई और 17 कच्चा मकान धराशायी हो गया। गिरे हुए मकान के दूसरे कमरो मेें रह रहे हैं। बजिया गांव में राजेंद्र प्रसाद, शिवमूरत, मंगरू, विश्वनाथ, सुंदर सिंह, बुधराम, शिव प्रसाद, राम प्रसाद, रामकिशुन, महादेव, रामलाल के मकानों के एक या दो कमरे धराशायी हुए। इन लोगों में नाराजगी है कि प्रशासन की ओर से उनकी इस दौरान कोई मदद नहीं की गई।
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कोन: सोन नदी के बाढ़ से चाची, नकतवार, मझिगवां, नैकहा, गायघाट, हर्रा और पांडु नदी से पिपरखाड़, रोरवा, खेमपुर, बरवाडीह, कोन बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। खेमपुर में बांध टूटने से बरवाडीह और नैकहां में लोग पंचायत भवन और अंबेडकर भवन में शरण लिए हुए थे। प्रशासन ने इन पीड़ितों की कोई मदद नहीं की। अब लोग अपने-अपने घरों में लौट आए हैं। पिछली बार रिहंद डैम, ओबरा डैम और बाण सागर का पानी छोड़ा गया था तो नैकहा में मुनादी कराई गई थी लेकिन इस बार नहीं हुआ।
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घोरावल: बेलन नदी से कुसम्हा और गुरेठ गांव में फसलें प्रभावित हुई हैं। धान की फसल डूब गई हैं। बभनी: पिछले दिनों हुई बारिश में बजिया बंधा का साइड वॉल और पांच चेकडैम अभी भी टूटा हुआ है। पुलिया और सड़क भी क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इससे बजिया गांव में धान की फसल चौपट हो गई और 17 कच्चा मकान धराशायी हो गया। गिरे हुए मकान के दूसरे कमरो मेें रह रहे हैं। बजिया गांव में राजेंद्र प्रसाद, शिवमूरत, मंगरू, विश्वनाथ, सुंदर सिंह, बुधराम, शिव प्रसाद, राम प्रसाद, रामकिशुन, महादेव, रामलाल के मकानों के एक या दो कमरे धराशायी हुए। इन लोगों में नाराजगी है कि प्रशासन की ओर से उनकी इस दौरान कोई मदद नहीं की गई।
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