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Sonebhadra News: 20 दिन में 1500 रुपये बढ़े गिट्टी के दाम, निर्माण कार्यों की बढ़ेगी लागत

Sun, 07 Dec 2025 01:15 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 07 Dec 2025 01:15 AM IST
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The price of gravel has increased by Rs 1500 in 20 days, increasing the cost of construction work.
रॉबर्ट्सगंज ​स्थित विडिंग मटेरियल की दुकान।संवाद - फोटो : 1
सोनभद्र। डाला-ओबरा की पत्थर खदानों में खनन पर रोक का असर निर्माण कार्यों पर पड़ रहा है। गिट्टी के दाम में तेजी से उछाल आया है। करीब 20 दिन पहले तक 4500 रुपये प्रति सौ फीट की दर से बिकने वाली गिट्टी की कीमत अब 6000 रुपये तक पहुंच गई है। यह दाम रॉबर्ट्सगंज के बाजारों का है। वाराणसी, चंदौली सहित अन्य जिलों की मंडी में भाव इससे भी ज्यादा हैं। गिट्टी के दाम बढ़ने से मकान, दुकान, सड़क, पुल-पुलिया सहित अन्य निर्माण कार्यों की रफ्तार थमने लगी है।
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सोनभद्र के डाला-ओबरा की पत्थर खदानों से निकलने वाली गिट्टी पूरे पूर्वांचल में जाती है। निर्माण कार्यों के लिए इसे अव्वल दर्जे का माना जाता है। लिहाजा इसकी मांग भी खूब रहती है। भवन बनाने वालों की पहली पसंद डाला-ओबरा की गिट्टी ही होती है। गत 15 नवंबर को ओबरा के बिल्ली मारकुंडी स्थित एक खदान में ड्रीलिंग के दौरान हादसा हुआ था। इसमें सात मजदूरों की मौत हुई थी।
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इस घटना के बाद से ही खनन क्षेत्र में कार्य बंद हो गया था। बाजार की जरूरत और कारोबारियों की तमाम कोशिशों के बाद गत 29 अक्तूबर को कुछ खदानों में खनन कार्य शुरू हुआ, लेकिन दो दिन बाद ही खान सुरक्षा निदेशालय ने सुरक्षा मानकों का हवाला देते हुए इस क्षेत्र की 37 खदानों में खनन व परिवहन कार्य पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया।
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इसके बाद से बाजार में गिट्टी की आपूर्ति ठप पड़ गई है। कुछ क्रशर प्लांटों पर पहले से भंडारित गिट्टी ही बाजार में पहुंच रही है, लेकिन मांग बढ़ने और कम आपूर्ति के चलते दाम में तेजी से इजाफा हुआ है। महज 20 दिनों में यह अंतर 1500 रुपये प्रति सौ फीट तक है। गिट्टी के दाम बढ़ने से निर्माण कार्य कराने वालों का बजट गड़बड़ा गया है। कइयों ने काम भी बंद कर दिया है।
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रोज 25 हजार घन मीटर निकलता था बोल्डर
जिले में पत्थर की कुल 70 खदानें हैं। ये खदानें ओबरा, डाला, सुकृत, जुगैल, सिंदूरिया, दुद्धी, बभनी सहित अन्य क्षेत्रों में हैं। सबसे बड़ा खनन क्षेत्र ओबरा-डाला का है। इन खदानों से रोज औसतन 25 हजार घन मीटर बोल्डर निकलता था। क्रशर प्लांटों में इससे करीब 20 हजार घन मीटर से ज्यादा गिट्टी तैयार होती थी। अलग-अलग आकार के अनुसार इसका इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के निर्माण कार्यों में होता है। सोनभद्र से गिट्टी की आपूर्ति वाराणसी, मिर्जापुर, आजमगढ़ मंडल के अलावा गोरखपुर, देवरिया सहित नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों तक होती है।
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गुणवत्ता में सबसे बेहतर है डाला की गिट्टी
पत्थर की खदानें मिर्जापुर के अहरौरा, चुनार में भी हैं। इनके अलावा मप्र के रीवा, सतना से भी पूर्वांचल की मंडियों में गिट्टी पहुंचती है, लेकिन गुणवत्ता के मामले में सोनभद्र के डाला-ओबरा की काली गिट्टी उच्च क्वालिटी की है। सरकारी टेंडर भी इसी गिट्टी के आधार पर होते हैं। अब इसका उत्पादन बंद होने से अन्य क्षेत्रों की गिट्टी आ रही है, लेकिन क्वालिटी अच्छी नहीं होने से लोग उसके उपयोग से बच रहे हैं।
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बालू, सीमेंट सस्ती, बस गिट्टी महंगी
शाहगंज। पिछले एक महीने से बिल्डिंग मटेरियल के दाम सामान्य रूप से चल रहे थे। निर्माण भी जोर पकड़ रहा था। गिट्टी की आवक बंद होने से दिक्कतें बढ़ी हैं। डाला गिट्टी का मार्केट में अभाव हो गया है। बालू, सीमेंट और सरिया के मूल्य पहले की तुलना में कम हुए हैं। जीएसटी कम होने से भी सीमेंट के दामों में तीस रुपये बोरी तक की कमी आई है। फिर भी लोग निर्माण से कतरा रहे हैं।
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बोले ग्राहक::
जैसे ही मकान की छत की स्लैब डालने का समय आया, वैसे ही गिट्टी के दाम आसमान छूने लगे। पूरा बजट गड़बड़ हो गया है। समझ नहीं आ रहा कि कैसे काम कराएं। - संतोष सिंह पटेल, शाहगंज।
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बालू, सीमेंट जरूर सस्ती हुई है, लेकिन बिना गिट्टी के काम कैसे कराएंगे। फिलहाल मकान का निर्माण कार्य रोक दिया गया है। गिट्टी के दाम घटने के बाद ही काम चालू कराया जाएगा। - अरविंद मौर्य, शाहगंज।
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बोले दुकानदार::
गिट्टी की आवक एकदम कम हो गई है। इससे दाम में लगातार इजाफा हो रहा है। पहले जो गिट्टी 4500-4600 रुपये प्रति सौ फीट बिकती थी, अब उसकी कीमत 5800-6000 रुपये हो गई है। यही स्थिति रही तो आगे रेट और बढ़ेंगे। - विनय सिंह, बिल्डिंग मैटेरियल विक्रेता, पकरी रोड।
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गिट्टी के भाव में तेजी का असर कारोबार पर पड़ा है। जिन्होंने पहले सामग्री मंगा ली थी, वही काम करा रहे हैं। महज 20 दिनों में दाम तेजी से बढ़े हैं। ग्राहक गिट्टी के दाम सुनकर चौंक जा रहे हैं। दूसरी निर्माण सामग्री की बिक्री भी प्रभावित है। - अजीत जायसवाल, बिल्डिंग मैटेरियल विक्रेता, सिविल लाइन।

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वर्जन...
खदानें बंद होने से उत्पादन प्रभावित हुआ है। इससे दाम में वृद्धि होना स्वाभाविक है। खदान मालिकों को भी रॉयल्टी की चपत लग रही है। स्थिति सुचारू बनाए रखने के लिए एसोसिएशन संबंधित विभागों से संपर्क कर रहा है। कोशिश है कि शीघ्र समाधान निकाला जाए। - अजय सिंह, अध्यक्ष, डाला-बिल्ली क्रशर एसोसिएशन।
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