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पेड़ों के संरक्षण और पौधरोपण का संदेश
ब्यूरो/ अमर उजाला /सोनभद्र
Updated Thu, 28 Jul 2016 10:25 PM IST
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संत फ्रांसिस स्कूल अनपरा में पौधरोपण संरक्षण के लिए नृत्य नाटिका की प्रस्तुति देते विद्यार्थी।
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परियोजना आवासीय परिसर स्थित संत फ्रांसिस विद्यालय में गुरुवार की सुबह प्रकृति संरक्षण के लिए विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कक्षा आठ की खुशी ने हमें पेड़ नही काटना चाहिए, इनकी रक्षा, सुरक्षा हमार कर्तव्य है, पेड़ हैं तो हम हैं अन्यथा हम नहीं.. विषय पर भाषण दिया।
ईश वंदना ये धरती आसमां ये वन, उपवन ये पवन चमन मेरे प्रभु की श्वांसें हैं..से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। अतुल चौहान ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रश्न पूछे और इसका उत्तर न मिलने पर, उसे बताकर विद्यार्थियों का ज्ञानवर्धन किया।
विद्यार्थियों ने मुझसे है श्वांसों की बहती रवानी, मैं ना रहा तो रहेगा न पानी, मैं तेरा हिस्सा हूँ तू मेरा हिस्सा है, मुझसे ही तू जिंदा है, न काटो मुझे दुखता है.. गीत पर पेड़ की आत्मकथात्मक शैली में नृत्य नाटिका की प्रस्तुति दी और इसके जरिए पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। प्रबंधक फादर लेंसी डिकूना, उपप्रधानाचार्य सिस्टर जोशीला, छात्र-छात्राओं ने पौधरोपण कर इसकी संरक्षा का संकल्प लिया । फादर लेंसी डिकूना ने बताया कि यदि हम यह नही करेंगे तो ग्लेशियर पिघल रहा है, जो हमारे जीवन के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इसलिए सभी को पेड़ों की सुरक्षा, प्लास्टिक की जगह कपड़े और कागज के थैले इस्तेमाल करना चाहिए।
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ईश वंदना ये धरती आसमां ये वन, उपवन ये पवन चमन मेरे प्रभु की श्वांसें हैं..से कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। अतुल चौहान ने पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रश्न पूछे और इसका उत्तर न मिलने पर, उसे बताकर विद्यार्थियों का ज्ञानवर्धन किया।
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विद्यार्थियों ने मुझसे है श्वांसों की बहती रवानी, मैं ना रहा तो रहेगा न पानी, मैं तेरा हिस्सा हूँ तू मेरा हिस्सा है, मुझसे ही तू जिंदा है, न काटो मुझे दुखता है.. गीत पर पेड़ की आत्मकथात्मक शैली में नृत्य नाटिका की प्रस्तुति दी और इसके जरिए पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। प्रबंधक फादर लेंसी डिकूना, उपप्रधानाचार्य सिस्टर जोशीला, छात्र-छात्राओं ने पौधरोपण कर इसकी संरक्षा का संकल्प लिया । फादर लेंसी डिकूना ने बताया कि यदि हम यह नही करेंगे तो ग्लेशियर पिघल रहा है, जो हमारे जीवन के लिए सबसे बड़ा खतरा है। इसलिए सभी को पेड़ों की सुरक्षा, प्लास्टिक की जगह कपड़े और कागज के थैले इस्तेमाल करना चाहिए।
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