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Sonebhadra News: आदिवासी इलाकों में आज भी कायम है रेडियो का जादू
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यह आकाशवाणी है। अब आप ओबरा केंद्र से प्रसारित कार्यक्रम सुनिए...। शाम के पांच बजते ही रेडियो पर यह सुनने के लिए आदिवासी अंचल के लोग आज भी बेताब रहते हैं। किसी को किसानवाणी पसंद है तो कोई बाल गोपाल, वट वृक्ष, ग्राम जगत कार्यक्रम को चाव से सुनता है।
आकाशवाणी के इस केंद्र की स्थापना के तीन दशक हो गए, लेकिन इसकी लोकप्रियता कम नहीं हुई है। इंटरनेट, टीवी, मोबाइल जैसी संचार सुविधाओं से वंचित जिले के सुदूर के इलाकों में रेडियो ही मनोरंजन का साधन बना हुआ है।
घने जंगल और पहाड़ों से घिरे सोनभद्र के कई इलाके ऐसे हैं, जहां आधुनिक युग में भी बिजली, इंटरनेट, मोबाइल, टीवी जैसी सुविधाएं नहीं पहुंची हैं। इन इलाकों में रेडियो ने काफी पहले ही अपनी धमक बना ली थी। दशकों बाद भी उसका जादू बरकरार है।
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वर्ष 1993 में स्थापित ओबरा केंद्र से सभी वर्गों के लिए कार्यक्रम प्रसारित किए जा रहे हैं। केंद्र से प्रसारित कार्यक्रमों से बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं, आदिवासी जुड़े हुए हैं। आज भी यह एफएम केंद्र अपने मानक के अनुरूप 90 किलोमीटर की एयर परिधि में मनोरंजन का साधन बना हुआ है।
यह बात अलग है कि आधुनिकता की मार इस सेवा पर भी पड़ी है। इसके चलते हैलो फरमाइस व अन्य फोनिक लोकप्रिय कार्यक्रम का प्रसारण बंद हो चुका है। लोक चिंतन, अध्यात्म और धर्म आधारित कार्यक्रम भी सीमित कर दिए गए हैं। कभी ओबरा केंद्र से तीन ट्रांसमिशन से प्रसारण होता था।
कोरोना काल के बाद दो ट्रांसमिशन बंद कर दिए गए। इस समय सिर्फ एक ट्रांसमिशन ही चालू है। छत्तीसगढ़, मप्र, बिहार एवं झारखंड के कुछ हिस्से में भी आकाशवाणी ओबरा के बहुतायत संख्या में श्रोता हैं और वहां पर यह लोकप्रिय है।
एक ट्रांसमिशन होने के बावजूद शिक्षा, साहित्य, खेल, कृषि, मनोरंजन, शासन प्रशासन आदि के लिए भी सशक्त केंद्र के रूप में संचालित है।
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आकाशवाणी के इस केंद्र की स्थापना के तीन दशक हो गए, लेकिन इसकी लोकप्रियता कम नहीं हुई है। इंटरनेट, टीवी, मोबाइल जैसी संचार सुविधाओं से वंचित जिले के सुदूर के इलाकों में रेडियो ही मनोरंजन का साधन बना हुआ है।
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घने जंगल और पहाड़ों से घिरे सोनभद्र के कई इलाके ऐसे हैं, जहां आधुनिक युग में भी बिजली, इंटरनेट, मोबाइल, टीवी जैसी सुविधाएं नहीं पहुंची हैं। इन इलाकों में रेडियो ने काफी पहले ही अपनी धमक बना ली थी। दशकों बाद भी उसका जादू बरकरार है।
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वर्ष 1993 में स्थापित ओबरा केंद्र से सभी वर्गों के लिए कार्यक्रम प्रसारित किए जा रहे हैं। केंद्र से प्रसारित कार्यक्रमों से बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं, आदिवासी जुड़े हुए हैं। आज भी यह एफएम केंद्र अपने मानक के अनुरूप 90 किलोमीटर की एयर परिधि में मनोरंजन का साधन बना हुआ है।
यह बात अलग है कि आधुनिकता की मार इस सेवा पर भी पड़ी है। इसके चलते हैलो फरमाइस व अन्य फोनिक लोकप्रिय कार्यक्रम का प्रसारण बंद हो चुका है। लोक चिंतन, अध्यात्म और धर्म आधारित कार्यक्रम भी सीमित कर दिए गए हैं। कभी ओबरा केंद्र से तीन ट्रांसमिशन से प्रसारण होता था।
कोरोना काल के बाद दो ट्रांसमिशन बंद कर दिए गए। इस समय सिर्फ एक ट्रांसमिशन ही चालू है। छत्तीसगढ़, मप्र, बिहार एवं झारखंड के कुछ हिस्से में भी आकाशवाणी ओबरा के बहुतायत संख्या में श्रोता हैं और वहां पर यह लोकप्रिय है।
एक ट्रांसमिशन होने के बावजूद शिक्षा, साहित्य, खेल, कृषि, मनोरंजन, शासन प्रशासन आदि के लिए भी सशक्त केंद्र के रूप में संचालित है।