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Sonebhadra News: मां-बेटे, चाचा-भतीजे के साथ पूरा परिवार मिलकर चलाता है नशे का धंधा
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उरमौरा में नशे के धंधा के लिए सिर्फ एक खिड़की ही नहीं सगे भाइयों के साथ ही पूरे परिवार को नशे के कारोबार में संलिप्त होने का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार, बाराबंकी से शाहगंज और शाहगंज से उरमौरा के लिए नशे की खेप लाई जाती है।
यहां नशे की पुड़िया बनाकर खिड़की से बिक्री की जाती है। नशे के लती लड़कों का भी इस्तेमाल कर इसकी सप्लाई कराई जाती है। दो साल के भीतर इस नशे के धंधे से जुड़े आठ से अधिक नाम सामने आ चुके हैं। नए साल में हुई पहली कार्रवाई में मां-बेटे पकड़े गए हैं।
तीनों का नाम तीसरी बार नशे के धंधे में सामने आया है। रॉबटर्संगंज कोतवाली में पानपत्ती के नाम तीन मामले पहले से दर्ज हैं। इसमें एक मारपीट और दो मामले हेरोइन तस्करी के हैं। वहीं उसके बेटे के खिलाफ 2015 से अब तक 10 मामले दर्ज हो चुके हैं।
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नौ पहले के हैं। इसमें दो गांजा तस्करी, एक डकैती की योजना, एक अवैध शराब, मारपीट के दो, एक गुंडा एक्ट और एक आर्म्स एक्ट का मामला दर्ज है। एक मामले में अग्निशमन कर्मी को मारपीट कर घायल करने का आरोप है। हेरोइन तस्करी में पहली बार उसका नाम सामने आया है।
अक्तूबर 2024 में पुलिस की नजर में आया था यह गिरोह
पुलिस रिकॉर्ड में पानपत्ती और उसके परिवार से जुड़ा यह गिरोह अक्तूबर 2024 में बड़े स्तर पर सामने आया था। इस गिरोह से जुड़कर जगह-जगह हेरोइन डिलवरी करते पाए गए विशाल गुप्ता के पकड़े जाने के बाद पुलिस को जानकारी मिली थी कि पानपत्ती, उसके बेटे संतोष यादव, सोनू यादव और उसका देवर जगदीश गिरोह का संचालन कर रहा है। हेरोइन लाने के लिए यह लोग कैश और परिचित दुकानदारों के नंबर से फोन पे के जरिए पैसा भेजते हैं। यह सारा पैसा शाहगंज के तौहार इस्लाम अली को भेजा जाता है।
महज विशाल के जरिए तौहार को छह लाख का ऑनलाइन लेनदेन पाया गया था। यह भी जानकारी मिली थी कि उरमौरा का रिजवान भी ताहौर से हेरोइन खरीदकर नशे का कारोबार कर रहा है। विशाल ने पूछताछ में दावा किया था कि संतोष-सोनू का पूरा परिवार इसी काम में लगा हुआ है और इसके जरिए उरमौरा और चोपन के परासपानी में बड़े-बड़े मकान बनवाए गए हैं। अब जब एसपी के निर्देश पर हेरोइन तस्करों के खिलाफ अभियान शुरू किया तो माना जा रहा है कि जल्द ही पानपत्ती सहित अन्य नशे के बड़े कारोबारियों पर भी शिकंजा सकता दिखाई देगा।
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यहां नशे की पुड़िया बनाकर खिड़की से बिक्री की जाती है। नशे के लती लड़कों का भी इस्तेमाल कर इसकी सप्लाई कराई जाती है। दो साल के भीतर इस नशे के धंधे से जुड़े आठ से अधिक नाम सामने आ चुके हैं। नए साल में हुई पहली कार्रवाई में मां-बेटे पकड़े गए हैं।
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तीनों का नाम तीसरी बार नशे के धंधे में सामने आया है। रॉबटर्संगंज कोतवाली में पानपत्ती के नाम तीन मामले पहले से दर्ज हैं। इसमें एक मारपीट और दो मामले हेरोइन तस्करी के हैं। वहीं उसके बेटे के खिलाफ 2015 से अब तक 10 मामले दर्ज हो चुके हैं।
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नौ पहले के हैं। इसमें दो गांजा तस्करी, एक डकैती की योजना, एक अवैध शराब, मारपीट के दो, एक गुंडा एक्ट और एक आर्म्स एक्ट का मामला दर्ज है। एक मामले में अग्निशमन कर्मी को मारपीट कर घायल करने का आरोप है। हेरोइन तस्करी में पहली बार उसका नाम सामने आया है।
अक्तूबर 2024 में पुलिस की नजर में आया था यह गिरोह
पुलिस रिकॉर्ड में पानपत्ती और उसके परिवार से जुड़ा यह गिरोह अक्तूबर 2024 में बड़े स्तर पर सामने आया था। इस गिरोह से जुड़कर जगह-जगह हेरोइन डिलवरी करते पाए गए विशाल गुप्ता के पकड़े जाने के बाद पुलिस को जानकारी मिली थी कि पानपत्ती, उसके बेटे संतोष यादव, सोनू यादव और उसका देवर जगदीश गिरोह का संचालन कर रहा है। हेरोइन लाने के लिए यह लोग कैश और परिचित दुकानदारों के नंबर से फोन पे के जरिए पैसा भेजते हैं। यह सारा पैसा शाहगंज के तौहार इस्लाम अली को भेजा जाता है।
महज विशाल के जरिए तौहार को छह लाख का ऑनलाइन लेनदेन पाया गया था। यह भी जानकारी मिली थी कि उरमौरा का रिजवान भी ताहौर से हेरोइन खरीदकर नशे का कारोबार कर रहा है। विशाल ने पूछताछ में दावा किया था कि संतोष-सोनू का पूरा परिवार इसी काम में लगा हुआ है और इसके जरिए उरमौरा और चोपन के परासपानी में बड़े-बड़े मकान बनवाए गए हैं। अब जब एसपी के निर्देश पर हेरोइन तस्करों के खिलाफ अभियान शुरू किया तो माना जा रहा है कि जल्द ही पानपत्ती सहित अन्य नशे के बड़े कारोबारियों पर भी शिकंजा सकता दिखाई देगा।