फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sonebhadra News ›   The basis of education in the district divided government

Sonebhadra News: जिले में शिक्षा का बंटाधार, नौनिहाल कैसे पढ़ें सरकार

Mon, 18 Sep 2023 11:37 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 18 Sep 2023 11:37 PM IST
विज्ञापन
The basis of education in the district divided government
सोनभद्र। कहने के लिए सोनभद्र आकांक्षी जनपद है। शिक्षा क्षेत्र में अति पिछड़ा है। नीति आयोग ने इसे गोद भी लिया है। बावजूद शिक्षा व्यवस्था बदहाल है। आलम यह है कि सवा सौ से अधिक स्कूल विभागीय रिकार्ड में बंद हैं। इन स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है। किसी प्रकार शिक्षा मित्रों के सहारे इनका संचालन हो रहा है।
विज्ञापन

वहीं सात सौ से अधिक ऐसे स्कूल ही हैं, जिनमें सिर्फ एक-एक शिक्षक हैं। ऐसे में इन स्कूलों में पठन-पाठन की व्यवस्था का अंदाजा लगाया जा सकता है। विभाग रिक्त पदों के बाबत बार-बार पत्र भेज रहा है, मगर तैनाती की कौन कहे, पिछले एक साल में करीब एक हजार शिक्षक और भी कम हो गए।
विज्ञापन

आदिवासी बहुल जिले के दस ब्लाकों में 2061 विद्यालय हैं। इनमें 2.54 लाख बच्चों का पंजीकरण है। आरटीई के मानकों के तहत प्राथमिक स्तर पर 30 बच्चों को पढ़ाने के लिए एक और पूर्व माध्यमिक स्तर पर 35 बच्चों पर एक शिक्षक की तैनाती होनी चाहिए। जिले में यह मानक तार-तार हो रहा है। गांव-गांव स्कूल खोलकर बच्चों का दाखिला तो ले लिया गया, लेकिन उन्हें पढ़ाने वाले शिक्षकों की व्यवस्था नहीं की गई है। विभागीय रिकार्ड में 129 स्कूल ऐसे हैं, जहां एक भी शिक्षक नहीं है। इन्हें बंद माना गया है। हालांकि शिक्षामित्र के भरोसे वहां पढ़ाई कराई जा रही है। इसी तरह 708 स्कूल ऐसे हैं, जिसमें सिर्फ एक-एक शिक्षक हैं। वह भी कागजी औपचारिकताओं की पूर्ति में इस कदर दबे हैं कि पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पा रहे। ऐसे में यहां भी शिक्षा मित्र और अनुदेशक ही पढ़ाई की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

एक साल में और बिगड़ी स्थिति
बेसिक शिक्षा विभाग में सात हजार से अधिक शिक्षकों के पद हैं, लेकिन 50 फीसदी ही शिक्षक जिले में मौजूद हैं। पिछले एक साल में यह अनुपात ज्यादा बिगड़ा है। पहले कोर्ट के आदेश पर लंबे समय से तबादले की बाट जोह रहे शिक्षकों को गृह जनपदों के लिए कार्यमुक्त किया गया तो फिर जुलाई-अगस्त में हुई अंतर जनपदीय तबादले के दौरान चार सौ से अधिक शिक्षक गैर जनपद चले गए। उसके सापेक्ष सिर्फ 25 शिक्षक ही यहां आए हैं। इन्हें भी अब तक विद्यालय का आवंटन नहीं हो पाया है। वह डेढ़ माह से बीएसए कार्यालय में हाजिरी लगा रहे हैं।
म्योरपुर में 19 विद्यालय बंद, 38 में एकल अध्यापकीय
शिक्षकाें की सबसे ज्यादा कमी आदिवासी बहुल इलाकों में ही है। म्योरपुर ब्लाॅक में 19 विद्यालय ऐसे हैं, जो बंद यानि शिक्षा मित्र के भरोसे हैं। इनमें मगरहर, बरोहिया, रनहोर, किरवानी, डरहियार, खालीडीह, गडिया, किरबिल, छन्नीपाथर, बकरिहवा, बिछियारी, देवहर, बजनडीह, झीलाे, लाखर, रजमिलान, आरंगपानी शामिल हैं। इस ब्लाॅक में 38 विद्यालय एक शिक्षक हैं। विकासखंड दुद्धी में बंद विद्यालयों की संख्या 18 है तो कोन ब्लाॅक में कुल 163 विद्यालय के सापेक्ष 21 में कोई शिक्षक नहीं हैं। यहां 83 विद्यालय एक शिक्षक के सहारे हैं। बभनी और चोपन ब्लाॅक का भी कुछ ऐसा ही हाल है। यह ब्लाॅक वह हैं, जहां आदिवासी आबादी सबसे ज्यादा है। बुनियादी शिक्षा के लिहाज से भी यही ब्लाॅक सबसे ज्यादा पिछड़े हैं।
कहीं डेढ़ सौ बच्चों पर एक शिक्षक तो कहीं 300 पर
विकासखंड नगवां में तीन विद्यालय बंद हैं और 11 एक शिक्षक के भरोसे संचालित हैं। उच्च प्राथमिक विद्यालय सेमरिया में 150 तो चिचलिक में 164 बच्चे नामांकित हैं। उन्हें पढ़ाने वाले सिर्फ एक शिक्षक हैं। कोन ब्लाक के उच्च प्राथमिक विद्यालय सोनपरी में 275 बच्चे, जबकि प्राथमिक विद्यालय बरहमोरी में 243 बच्चों की पढ़ाई एक शिक्षक के सहारे चल रही है। बच्चों की इतनी संख्या को संभालना भी शिक्षक के लिए मुश्किल रहता है, ऐसे में वह पढ़ाई कैसे कराते होंगे, अंदाजा लगाया जा सकता है।
इतनी कमी, फिर भी नगरीय क्षेत्र में असमानता
जिले में शिक्षकों की भारी कमी है। तमाम स्कूल खोलने के लिए शिक्षक नहीं हैं। वहीं दूसरी ओर कई स्कूल ऐसे भी हैं, जहां पांच से छह शिक्षक तैनात हैं। ऐसे स्कूल ज्यादातर नगरीय क्षेत्र या मुख्य मार्ग से सटे हुए हैं। नगर पालिका क्षेत्र के आसपास के स्कूलों में शिक्षकाें की संख्या ठीक है। इसी तरह रेणुकूट, अनपरा, पिपरी, चोपन के नगरीय इलाके व मुख्य मार्ग पर स्थित स्कूलों में भी यही स्थिति है।

शिक्षकों के रिक्त पदों की पूर्ति के लिए निदेशालय को प्रस्ताव भेजा गया है। शिक्षक विहीन स्कूलों का संचालन आसपास के दूसरे स्कूलों से शिक्षकों को संबद्ध कर किया जा रहा है। उपलब्ध संसाधनों में बच्चों को बेहतर शिक्षा देने की पूरी कोशिश की जा रही है। गैर जिले से आए शिक्षकों को शीघ्र स्कूल आवंटन किया जाएगा। -नवीन कुमार पाठक, बीएसए।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed