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दस दिन में दो मासूमों सहित दस की मौत
ब्यूरो, अमर उजाला, सोनभद्र
Updated Sun, 09 Oct 2016 11:27 PM IST
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बच्चे बीमार
- फोटो : ANI
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थाना क्षेत्र के रणहोर में डायरिया और बुखार से दस दिनों में दस लोगों की मौत हो जाने का मामला प्रकाश में आया है। रविवार को रणहोर ग्राम पंचायत के दौरे पर आइपीएफ की टीम ने इसका खुलासा किया। टीम की मानें तो यहां अब तक न तो कोई चिकित्सा टीम पहुंची, ना ही 108 नंबर डायल करने पर ग्रामीणों को एंबुलेंस की सुविधा मिल पा रही है।
रणहोर ग्राम पंचायत के रणहोर और मिर्चाधुरी गांव की अधिकांश आबादी आदिवासी है। अनपरा से महज आठ से दस किमी की दूरी होने के बावजूद यहां आवागमन की कोई सीधी सुविधा नहीं है। निजी साधन ही सहारा है।
रास्ता भी टूट चुका है। इससे रात के समय बाहर के लोग भी अपना वाहन जल्दी नहीं भेजते। आइपीएफ टीम की अगुवाई कर रहे प्रदेश महासचिव दिनकर कपूर ने बताया कि दस दिनों के भीतर डायरिया के चलते दशरथ खरवार (60), ललित कोल (55), छोटेलाल खरवार (45), राममनोज (18), मुन्नी अगरिया (50), रामप्रसाद की तेरह वर्षीय पुत्री, रामअवतार की 16 वर्षीय पुत्री, महेंद्र बैगा का दो वर्षीय बेटा, चरकू बैगा की 60 वर्षीय पत्नी की डायरिया से मौत हो गई है। वहीं इस अवधि में बुखार के चलते सूरज अगरिया के पत्नी की मौत हुई है।
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ग्रामीणों की मानें तो स्थानीय स्तर पर कोई चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है। यहां तक की एंबुलेंस की सुविधा भ्ाी नहीं मिल पा रही है। साधन न मिलने से जब तक मरीज को 12 किमी दूर डिबुलगंज अस्पताल ले जाया जाता है, तब तक मरीज की हालत काफी बिगड़ चुकी होती है। टीम में सुरेंद्र पाल, रामदुलार खरवार, रमेश सिंह खरवार, रामायण गोंड़, मुन्ना मलिक, शारदा तिवारी, पूर्व प्रधान मीरू खरवार शामिल रहे।
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रणहोर ग्राम पंचायत के रणहोर और मिर्चाधुरी गांव की अधिकांश आबादी आदिवासी है। अनपरा से महज आठ से दस किमी की दूरी होने के बावजूद यहां आवागमन की कोई सीधी सुविधा नहीं है। निजी साधन ही सहारा है।
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रास्ता भी टूट चुका है। इससे रात के समय बाहर के लोग भी अपना वाहन जल्दी नहीं भेजते। आइपीएफ टीम की अगुवाई कर रहे प्रदेश महासचिव दिनकर कपूर ने बताया कि दस दिनों के भीतर डायरिया के चलते दशरथ खरवार (60), ललित कोल (55), छोटेलाल खरवार (45), राममनोज (18), मुन्नी अगरिया (50), रामप्रसाद की तेरह वर्षीय पुत्री, रामअवतार की 16 वर्षीय पुत्री, महेंद्र बैगा का दो वर्षीय बेटा, चरकू बैगा की 60 वर्षीय पत्नी की डायरिया से मौत हो गई है। वहीं इस अवधि में बुखार के चलते सूरज अगरिया के पत्नी की मौत हुई है।
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ग्रामीणों की मानें तो स्थानीय स्तर पर कोई चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है। यहां तक की एंबुलेंस की सुविधा भ्ाी नहीं मिल पा रही है। साधन न मिलने से जब तक मरीज को 12 किमी दूर डिबुलगंज अस्पताल ले जाया जाता है, तब तक मरीज की हालत काफी बिगड़ चुकी होती है। टीम में सुरेंद्र पाल, रामदुलार खरवार, रमेश सिंह खरवार, रामायण गोंड़, मुन्ना मलिक, शारदा तिवारी, पूर्व प्रधान मीरू खरवार शामिल रहे।