{"_id":"67fab03d374907510a06f46d","slug":"studies-will-be-done-only-from-ncert-books-schools-will-not-increase-fees-sonbhadra-news-c-194-1-son1002-126876-2025-04-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonebhadra News: एनसीईआरटी की किताबाें से ही होगी पढ़ाई, स्कूल नहीं बढ़ाएंगे फीस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonebhadra News: एनसीईआरटी की किताबाें से ही होगी पढ़ाई, स्कूल नहीं बढ़ाएंगे फीस
विज्ञापन
विभिन्न संगठनों की ओर से लगातार विरोध प्रदर्शन और आंदोलनों के बाद जिला प्रशासन ने निजी स्कूलों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। डीएम के निर्देश पर शनिवार को डीआईओएस और बीएसए ने नगर के कई स्कूलों का भ्रमण किया। एनसीईआरटी की किताबाें से पढ़ाई कराने और फीस न बढ़ाने की हिदायत दी।
भ्रमण के दौरान वहां के प्रधानाचार्य और प्रबंधन से मिलकर कॉपी-किताब, ड्रेस की उपलब्धता और फीस के बारे में जानकारी ली। स्पष्ट हिदायत दी कि एनसीईआरटी की निर्धारित पुस्तकों से ही पठन-पाठन कराया जाए। इस दौरान अफसरों ने कैनाल रोड पर संचालित एक बुक डिपो को बंद कराया।
यह दुकान एक प्रमुख निजी स्कूल के पास खोली गई थी, जहां से सिर्फ उसी स्कूल की कॉपी-किताब की बिक्री की जा रही थी। वहां की गतिविधियों को संदिग्ध देख टीम ने कार्रवाई की।
विज्ञापन
डीआईओएस जयराम सिंह और बीएसए मुकुल आनंद पांडेय की टीम ने स्कूल प्रबंधन को आरटीई के अंतर्गत चयनित बच्चों का प्रवेश अनिवार्य रूप से लेने का निर्देश दिया। यह भी कहा कि वर्ष 2024-25 और 2025-26 में शुल्क का अंतर शून्य किया जाए।
एनसीईआरटी से निर्धारित पाठ्य-पुस्तकों के अलावा कोई अन्य किताबें न दी जाएं। पाठ्य पुस्तकों के लिए छात्र-छात्राओं और अभिभावकों पर बेवजह दबाव न बनाएं। अभिभावकों, विद्यार्थियों को यह छूट दी जाय कि वह अपनी इच्छा से किसी भी दुकान से पाठ्य पुस्तक खरीद सकें।
किसी विशेष दुकान से पुस्तक लेने की बाध्यता नहीं होगी। दिव्यांग छात्र-छात्राओं को पीडब्ल्यूडी एक्ट 2016 के अंतर्गत प्रवेश और पूर्ण शिक्षण योजना उसी के अनुरूप सुनिश्चित की जाय। अफसरों ने कहा कि प्रवेश शुल्क, सिक्योरिटी मनी, रजिस्ट्रेशन शुल्क केवल एक बार ही लिया जाए।
टीसी निर्गत करते समय पंजीकरण शुल्क छोड़कर वापस करना होगा। विद्यालय में वाहन से आने वाले छात्र-छात्राओं के लिए एक सह चालक वाहन में अवश्य रहें। वाहन चालक का चिकित्सीय परीक्षण एवं विद्यालय वाहन का समय-समय पर फिटनेस अवश्य कराएं।
ई-रिक्शा, टेंपो व डग्गामार वाहनों से बच्चों का परिवहन नहीं होना चाहिए। इसमें स्कूल प्रबंधन को भी जिम्मेदारी निभानी होगी। किसी भी स्कूल में 18 वर्ष से कम उम्र के छात्र-छात्रा बाइक या स्कूटी से विद्यालय आते हैं तो प्रबंधन की जिम्मेदारी होगी। निरीक्षण के दौरान शिक्षा विभाग से जय किशोर वर्मा, कमलेश यादव आदि मौजूद रहे।
कई दिनों से चल रहा आंदोलन
नए शिक्षण सत्र की शुरुआत के बाद से ही निजी स्कूलों की मनमानी को लेकर विभिन्न संगठन मुखर हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, सपा, कांग्रेस सहित अन्य संगठनों ने अलग-अलग रूप से डीएम, डीआईओएस, बीएसए को ज्ञापन देकर स्कूलों में कॉपी-किताब के नाम पर अभिभावकों के उत्पीड़न का आरोप लगाया। साथ ही मनमानी फीस वसूलने की भी शिकायत की थी। इसे गंभीरता से लेते हुए डीएम बद्रीनाथ सिंह ने डीआईओएस और बीएसए को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है।
डीएम के निर्देश पर रॉबर्ट्सगंज नगर व आसपास के कई निजी विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया गया। वहां की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी लेते हुए शासन के निर्देशों से अवगत कराया गया है। सभी को हिदायत दी गई है कि तीन दिन के अंदर निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए आख्या उपलब्ध कराएं। इस दौरान कैनाल रोड पर यूनिवर्सल बुक डिपो को भी संदिग्ध गतिविधियों के चलते बंद कराया गया। -जयराम सिंह, डीआईओएस।
विज्ञापन
भ्रमण के दौरान वहां के प्रधानाचार्य और प्रबंधन से मिलकर कॉपी-किताब, ड्रेस की उपलब्धता और फीस के बारे में जानकारी ली। स्पष्ट हिदायत दी कि एनसीईआरटी की निर्धारित पुस्तकों से ही पठन-पाठन कराया जाए। इस दौरान अफसरों ने कैनाल रोड पर संचालित एक बुक डिपो को बंद कराया।
विज्ञापन
यह दुकान एक प्रमुख निजी स्कूल के पास खोली गई थी, जहां से सिर्फ उसी स्कूल की कॉपी-किताब की बिक्री की जा रही थी। वहां की गतिविधियों को संदिग्ध देख टीम ने कार्रवाई की।
विज्ञापन
डीआईओएस जयराम सिंह और बीएसए मुकुल आनंद पांडेय की टीम ने स्कूल प्रबंधन को आरटीई के अंतर्गत चयनित बच्चों का प्रवेश अनिवार्य रूप से लेने का निर्देश दिया। यह भी कहा कि वर्ष 2024-25 और 2025-26 में शुल्क का अंतर शून्य किया जाए।
एनसीईआरटी से निर्धारित पाठ्य-पुस्तकों के अलावा कोई अन्य किताबें न दी जाएं। पाठ्य पुस्तकों के लिए छात्र-छात्राओं और अभिभावकों पर बेवजह दबाव न बनाएं। अभिभावकों, विद्यार्थियों को यह छूट दी जाय कि वह अपनी इच्छा से किसी भी दुकान से पाठ्य पुस्तक खरीद सकें।
किसी विशेष दुकान से पुस्तक लेने की बाध्यता नहीं होगी। दिव्यांग छात्र-छात्राओं को पीडब्ल्यूडी एक्ट 2016 के अंतर्गत प्रवेश और पूर्ण शिक्षण योजना उसी के अनुरूप सुनिश्चित की जाय। अफसरों ने कहा कि प्रवेश शुल्क, सिक्योरिटी मनी, रजिस्ट्रेशन शुल्क केवल एक बार ही लिया जाए।
टीसी निर्गत करते समय पंजीकरण शुल्क छोड़कर वापस करना होगा। विद्यालय में वाहन से आने वाले छात्र-छात्राओं के लिए एक सह चालक वाहन में अवश्य रहें। वाहन चालक का चिकित्सीय परीक्षण एवं विद्यालय वाहन का समय-समय पर फिटनेस अवश्य कराएं।
ई-रिक्शा, टेंपो व डग्गामार वाहनों से बच्चों का परिवहन नहीं होना चाहिए। इसमें स्कूल प्रबंधन को भी जिम्मेदारी निभानी होगी। किसी भी स्कूल में 18 वर्ष से कम उम्र के छात्र-छात्रा बाइक या स्कूटी से विद्यालय आते हैं तो प्रबंधन की जिम्मेदारी होगी। निरीक्षण के दौरान शिक्षा विभाग से जय किशोर वर्मा, कमलेश यादव आदि मौजूद रहे।
कई दिनों से चल रहा आंदोलन
नए शिक्षण सत्र की शुरुआत के बाद से ही निजी स्कूलों की मनमानी को लेकर विभिन्न संगठन मुखर हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, सपा, कांग्रेस सहित अन्य संगठनों ने अलग-अलग रूप से डीएम, डीआईओएस, बीएसए को ज्ञापन देकर स्कूलों में कॉपी-किताब के नाम पर अभिभावकों के उत्पीड़न का आरोप लगाया। साथ ही मनमानी फीस वसूलने की भी शिकायत की थी। इसे गंभीरता से लेते हुए डीएम बद्रीनाथ सिंह ने डीआईओएस और बीएसए को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है।
डीएम के निर्देश पर रॉबर्ट्सगंज नगर व आसपास के कई निजी विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया गया। वहां की व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी लेते हुए शासन के निर्देशों से अवगत कराया गया है। सभी को हिदायत दी गई है कि तीन दिन के अंदर निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करते हुए आख्या उपलब्ध कराएं। इस दौरान कैनाल रोड पर यूनिवर्सल बुक डिपो को भी संदिग्ध गतिविधियों के चलते बंद कराया गया। -जयराम सिंह, डीआईओएस।