{"_id":"6293aa19664c641bfa18bd92","slug":"standard-monsoon-action-plan-will-ensure-uninterrupted-supply-of-coal-sonbhadra-news-vns6561598184","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्टैंडर्ड मानसून एक्शन प्लान से होगी कोयले की निर्बाध आपूर्ति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्टैंडर्ड मानसून एक्शन प्लान से होगी कोयले की निर्बाध आपूर्ति
विज्ञापन
अनपरा। एनसीएल की कोल खदानों से मानसून सत्र में भी कोयले की निर्बाध आपूर्ति के लिए स्टैंडर्ड मानसून एक्शन प्लान बनाया गया है। इसके तहत परियोजनाओं में कार्य शुरू हो गया है, जिससे मानसून सत्र में भी थर्मल पावर परियोजनाओं व अन्य स्थानों को एनसीएल की ओर से निर्बाध कोयले की आपूर्ति की जा सके।
एनसीएल की ओर से बनाए गए इस प्लान में संप मैनेजमेंट, डंप मैनेजमेंट, ड्रेन मैनेजमेंट और डिस्पैच सिस्टम पर बखूबी ध्यान दिया गया है। ऊर्जांचल में दक्षिणी पूर्वी मानसून होने के कारण यहां चार माह तक वर्षा होती है। जून से प्रारंभ होकर वर्षा सितंबर में अपना रुख बदलती है। इसके मद्देनजर खदानों में पानी भरने और खदानों से डिस्पैच होने वाले कोयले की आपूर्ति को बरकरार रखने के लिए परियोजनाएं हर वर्ष नवंबर से जनवरी माह तक हेडक्वार्टर स्तर की कमेटी की ओर से प्रमाणित करा कर नवंबर से जनवरी तक प्लान की रूपरेखा तैयार कर फरवरी से मई तक आने वाले मानसून के लिए परियोजनाओं के कार्य पूर्ण करने के लिए प्रयासरत हैं। इस प्लान के तहत सर्वप्रथम माइंस के चारों ओर गार्लैंड ड्रेन का निर्माण कराया जाता है। जिससे ऊपरी सतह और बाहर का पानी माइंस के अंदर प्रवेश न कर सके। वहीं डंपिंग टो में ड्रेन और रिटेनिंग वाल्स बनाकर माइंस के अंदर आने वाले पानी को बाहर ले जाया जाता है। गेबियन वाल बनाकर सिल्ट को भी रोकने का प्रयास किया जा रहा है। परियोजना की नजदीकी मानसून को देखते हुए अधिकतम कार्यों को पूर्ण कर लिया गया है। वहीं बचे कुछ कार्यों को भी जल्द पूरा कर परियोजनाएं मानसून सत्र में भी कोयले की निर्बाध आपूर्ति कर सकेंगी। एनसीएल की मध्य प्रदेश स्थित छह और उत्तर प्रदेश में मौजूद चार खदानों में इस कार्य को बखूबी करा कर कार्य को अंतिम छोर तक ला दिया गया है।
एनसीएल की खदानों में कोयला निकालने के लिए की गई ब्लास्टिंग के बाद कोयले के ऊपर जमा बाहरी परत को निकालकर उससे एक पहाड़ का निर्माण करा लिया जाता है। हर साल परियोजनाओं से करीब 370 मिलियन क्यूबिक मीटर ओबी (ओवर बर्डन) निकाला जाता है। मानसून में नवीन ओबी से निकलने वाले सिल्ट को रहवासी इलाकों में पहुंचने से रोकने के लिए सिल्टेशन पांड्स बनाए जाते हैं। ताकि ओबी से बहने वाली सिल्ट पांड्स में ही जाकर रुक जाए और पानी बह कर संप तक पहुंच जाए।
विज्ञापन
मानसून से पूर्व परियोजनाएं खदानों में 200 मिली मीटर बारिश होने की कल्पना कर उससे डेढ़ गुना ज्यादा बड़े संपों का निर्माण कराती है। इससे मानसून सत्र में वर्षा जल अधिक होने पर भी खदानों में उत्पादन कार्य में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो। पानी को पांड्स में जाने के लिए आवश्यक पंपिंग की व्यवस्था की जाती है। जिन्हें बारिश होने पर 15 मीटर तक ऊपर व नीचे किया जा सके।
कोयले की खदानों से वर्षा जल को निकालने के कार्यों की गति बढ़ाकर तेजी से कार्य कराए जा रहे हैं। खदानों में अधिकाधिक कार्यों को पूर्ण कर लिया गया है। शेष बचे कार्यों को भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा। जिससे वर्षा के समय में कोयला प्रेषण और परिवहन में कोई भी बाधा उत्पन्न न हो।- रामविजय सिंह, एनसीएल, जनसंपर्क अधिकारी।
विज्ञापन
एनसीएल की ओर से बनाए गए इस प्लान में संप मैनेजमेंट, डंप मैनेजमेंट, ड्रेन मैनेजमेंट और डिस्पैच सिस्टम पर बखूबी ध्यान दिया गया है। ऊर्जांचल में दक्षिणी पूर्वी मानसून होने के कारण यहां चार माह तक वर्षा होती है। जून से प्रारंभ होकर वर्षा सितंबर में अपना रुख बदलती है। इसके मद्देनजर खदानों में पानी भरने और खदानों से डिस्पैच होने वाले कोयले की आपूर्ति को बरकरार रखने के लिए परियोजनाएं हर वर्ष नवंबर से जनवरी माह तक हेडक्वार्टर स्तर की कमेटी की ओर से प्रमाणित करा कर नवंबर से जनवरी तक प्लान की रूपरेखा तैयार कर फरवरी से मई तक आने वाले मानसून के लिए परियोजनाओं के कार्य पूर्ण करने के लिए प्रयासरत हैं। इस प्लान के तहत सर्वप्रथम माइंस के चारों ओर गार्लैंड ड्रेन का निर्माण कराया जाता है। जिससे ऊपरी सतह और बाहर का पानी माइंस के अंदर प्रवेश न कर सके। वहीं डंपिंग टो में ड्रेन और रिटेनिंग वाल्स बनाकर माइंस के अंदर आने वाले पानी को बाहर ले जाया जाता है। गेबियन वाल बनाकर सिल्ट को भी रोकने का प्रयास किया जा रहा है। परियोजना की नजदीकी मानसून को देखते हुए अधिकतम कार्यों को पूर्ण कर लिया गया है। वहीं बचे कुछ कार्यों को भी जल्द पूरा कर परियोजनाएं मानसून सत्र में भी कोयले की निर्बाध आपूर्ति कर सकेंगी। एनसीएल की मध्य प्रदेश स्थित छह और उत्तर प्रदेश में मौजूद चार खदानों में इस कार्य को बखूबी करा कर कार्य को अंतिम छोर तक ला दिया गया है।
विज्ञापन
एनसीएल की खदानों में कोयला निकालने के लिए की गई ब्लास्टिंग के बाद कोयले के ऊपर जमा बाहरी परत को निकालकर उससे एक पहाड़ का निर्माण करा लिया जाता है। हर साल परियोजनाओं से करीब 370 मिलियन क्यूबिक मीटर ओबी (ओवर बर्डन) निकाला जाता है। मानसून में नवीन ओबी से निकलने वाले सिल्ट को रहवासी इलाकों में पहुंचने से रोकने के लिए सिल्टेशन पांड्स बनाए जाते हैं। ताकि ओबी से बहने वाली सिल्ट पांड्स में ही जाकर रुक जाए और पानी बह कर संप तक पहुंच जाए।
विज्ञापन
मानसून से पूर्व परियोजनाएं खदानों में 200 मिली मीटर बारिश होने की कल्पना कर उससे डेढ़ गुना ज्यादा बड़े संपों का निर्माण कराती है। इससे मानसून सत्र में वर्षा जल अधिक होने पर भी खदानों में उत्पादन कार्य में किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो। पानी को पांड्स में जाने के लिए आवश्यक पंपिंग की व्यवस्था की जाती है। जिन्हें बारिश होने पर 15 मीटर तक ऊपर व नीचे किया जा सके।
कोयले की खदानों से वर्षा जल को निकालने के कार्यों की गति बढ़ाकर तेजी से कार्य कराए जा रहे हैं। खदानों में अधिकाधिक कार्यों को पूर्ण कर लिया गया है। शेष बचे कार्यों को भी जल्द पूरा कर लिया जाएगा। जिससे वर्षा के समय में कोयला प्रेषण और परिवहन में कोई भी बाधा उत्पन्न न हो।- रामविजय सिंह, एनसीएल, जनसंपर्क अधिकारी।