{"_id":"5fbfde518ebc3e5fa30020e4","slug":"sonbhadra-hard-work-and-dedication-of-teachers-changed-the-picture-of-the-school-sonbhadra-news-vns5602683172","type":"story","status":"publish","title_hn":"सोनभद्रः शिक्षिकाओं की मेहनत और लगन ने बदल दी स्कूल की तस्वीर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सोनभद्रः शिक्षिकाओं की मेहनत और लगन ने बदल दी स्कूल की तस्वीर
विज्ञापन
शाहगंज स्थित प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाती शिक्षिका बबिता सिंह
- फोटो : SONBHADRA
सोनभद्र। कोरोना काल में विद्यालयों के बंद होने पर शिक्षकों के साथ ही शिक्षिकाएं भी बच्चों का भविष्य संवार रही हैं। पहले आनलाइन शिक्षा और अब बच्चों को घर से बुलाकर कोविड 19 की गाइड लाइन का पालन करते हुए शिक्षित कर रही हैं। शिक्षिकाओं की मेहतन ने विद्यालय की तस्वीर बदल दी है। ऐसी ही एक मिसाल पेश कर रहा घोरावल ब्लॉक का स्कूल प्राथमिक विद्यालय बिसरेखी।
एक समय था कि इस गांव के अच्छे भले घर के लोग अपने बच्चों को प्राइमरी स्कूलों में पढ़ाने से कतराते थे। और अब उसी स्कूल में आसपास के करीब 10 गॉंव के बच्चे पढ़ रहे हैं। अच्छे प्राइवेट स्कूलों के बच्चों ने यहां दाखिला ले रखा है। इस स्कूल के बच्चों ने राज्य स्तर पर भी अपना परचम लहराया है। यहां की प्रधानाध्यापिका कौशर जहां सिद्दीकी की मेहनत से विद्यालय का भौतिक परिवेश हो या शैक्षणिक गुणवत्ता हो सभी मायने में एक अलग पहचान रखता है।
लर्निंग आउट कम परीक्षा में भी बच्चे सौ फीसदी तक उत्तीर्ण हुए। विद्या ज्ञान परीक्षा में भी बच्चे सफल हुए हैं। इसके लिए कौशर जहां सिद्दीकी व उनका स्टाफ समर्पित रहता है। कौशर ने बताया कि विद्यालय में अतिरिक्त क्लास भी ली जाती है। वैश्विक महामारी कविड-19 में भी इस विद्यालय के स्टाफ का बच्चों के प्रति समर्पण बना रहा। ऑनलाइन क्लास और बच्चों को साप्ताहिक शेड्यूल व ईपाठशाला के सहयोग से बच्चों की शिक्षा को बाधित नहीं होने दिया गया। बच्चों के कोर्स भी लगभग पूरे करा दिए गए हैं। कौशर जहां सिद्दीकी बताती हैं कि इस परिवर्तन में उनकी व उनके स्टाफ की मेहनत और उनके गांव समाज और अभिभावकों का भरपूर सहयोग रहा है। उधर प्राथमिक विद्यालय शाहगंज की सहायक अध्यापिका बबिता सिंह भी बच्चों की शिक्षा को लेकर गंभीर हैं। उनका कहना है कि इस समय हम सभी ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जहां बच्चों की सेहत और शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। एक तरफ उनके सेहत की चिंता दूसरी तरफ उनकी शिक्षा परंतु उन सबके बीच हमने बीच का रास्ता निकाला और आनलाइन सुविधाएं प्रदान करने का प्रयास किया और हम हद तक सफल भी हो रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
एक समय था कि इस गांव के अच्छे भले घर के लोग अपने बच्चों को प्राइमरी स्कूलों में पढ़ाने से कतराते थे। और अब उसी स्कूल में आसपास के करीब 10 गॉंव के बच्चे पढ़ रहे हैं। अच्छे प्राइवेट स्कूलों के बच्चों ने यहां दाखिला ले रखा है। इस स्कूल के बच्चों ने राज्य स्तर पर भी अपना परचम लहराया है। यहां की प्रधानाध्यापिका कौशर जहां सिद्दीकी की मेहनत से विद्यालय का भौतिक परिवेश हो या शैक्षणिक गुणवत्ता हो सभी मायने में एक अलग पहचान रखता है।
विज्ञापन
लर्निंग आउट कम परीक्षा में भी बच्चे सौ फीसदी तक उत्तीर्ण हुए। विद्या ज्ञान परीक्षा में भी बच्चे सफल हुए हैं। इसके लिए कौशर जहां सिद्दीकी व उनका स्टाफ समर्पित रहता है। कौशर ने बताया कि विद्यालय में अतिरिक्त क्लास भी ली जाती है। वैश्विक महामारी कविड-19 में भी इस विद्यालय के स्टाफ का बच्चों के प्रति समर्पण बना रहा। ऑनलाइन क्लास और बच्चों को साप्ताहिक शेड्यूल व ईपाठशाला के सहयोग से बच्चों की शिक्षा को बाधित नहीं होने दिया गया। बच्चों के कोर्स भी लगभग पूरे करा दिए गए हैं। कौशर जहां सिद्दीकी बताती हैं कि इस परिवर्तन में उनकी व उनके स्टाफ की मेहनत और उनके गांव समाज और अभिभावकों का भरपूर सहयोग रहा है। उधर प्राथमिक विद्यालय शाहगंज की सहायक अध्यापिका बबिता सिंह भी बच्चों की शिक्षा को लेकर गंभीर हैं। उनका कहना है कि इस समय हम सभी ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जहां बच्चों की सेहत और शिक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। एक तरफ उनके सेहत की चिंता दूसरी तरफ उनकी शिक्षा परंतु उन सबके बीच हमने बीच का रास्ता निकाला और आनलाइन सुविधाएं प्रदान करने का प्रयास किया और हम हद तक सफल भी हो रहे हैं।
विज्ञापन