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सोनभद्रः 90 स्कूल वाहन फिटनेस में फेल, फिर भी ढो रहे हैं बच्चे, खतरे में सफर करने को बच्चे मजबूर

Thu, 02 Sep 2021 10:08 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 02 Sep 2021 10:08 PM IST
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Sonbhadra: 90 school vehicles fail in fitness, yet children are being carried, children are forced to travel in danger
राबर्ट्सगंज में निजि स्कूल बस में सफर करते छात्र-छात्राएं। - फोटो : SONBHADRA
लंबे समय से बंद चल रहे स्कूलों में पठन-पाठन तो शुरू हो गया है, लेकिन स्कूली वाहनों का संचालन बिना फिटनेस टेस्ट पास किए हो रहा है। सोनभद्र जिले में करीब 24 प्रतिशत स्कूली वाहन ऐसे हैं, जो बिना फिटनेस सड़कों पर बच्चों को लेकर फर्राटा भर रहे हैं। एआरटीओ विभाग की तरफ से दिशा निर्देश जारी करने के बाद भी स्कूल संचालक वाहनों का फिटनेस कराने में ढिलाई बरत रहे हैं।
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जिले में 100 से अधिक प्राइवेट विद्यालय हैं। आधे से अधिक विद्यालयों में छात्र-छात्राओं को घर से विद्यालय लाने और छोड़ने के लिए वाहन संचालित किए जा रहे हैं। एआरटीओ कार्यालय से मिले आंकड़ों पर ध्यान दें तो जिले में कुल करीब 384 स्कूली वाहन हैं। लंबे समय तक विद्यालय बंद होने की वजह से स्कूली वाहन खड़े रहे। अब जब स्कूल खुल रहे हैं तो ऐसे में स्कूली वाहनों का फिटनेस जांच कराया जाना जरूरी है, लेकिन स्कूल खुलने पर भी स्कूल संचालक वाहनों का फिटनेस नहीं करा रहे हैं। एआरटीओ विभाग के रिकार्ड के अनुसार करीब 90 स्कूली वाहन अनफिट हैं। बिना फिटनेस के छोटे बच्चों को लेकर फर्राटा भर रहीं स्कूली बसें दुर्घटना का सबब भी बन सकती हैं।
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स्कूल संचालक वाहनों का करा लें फिटनेस
स्कूल वाहनों का समय-समय पर फिटनेस टेस्ट कराया जाना चाहिए लेकिन तमाम स्कूल संचालक इससे उदासीन हैं। बिना फिटनेस कराए बच्चों को ढो रहे हैं। ऐसे स्कूली वाहनों के संचालन से पहले कई घटनाएं हो चुकी है। एआरटीओ विभाग की तरफ से स्कूल संचालकों से वाहनों का फिटनेस जांच कराने की अपील की गई है। फिटनेस न कराने वालों के खिलाफ आगे कार्रवाई की जा सकती है।
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फिटनेस के यह हैं मानक
स्कूली वाहनों का का हर साल फिटनेस होना चाहिए। स्कूली वाहन पीले रंग के होने चाहिए। अग्नि नियंत्रण किट व फर्स्ट एड बॉक्स, इमरजेंसी विंडो और चालक का डीएल पांच वर्ष पुराना होना चाहिए। इसके साथ ही वाहन में स्कूल ऑन ड्यूटी लिखा हो, स्कूल का नाम व प्रिंसिपल का फोन नंबर लिखा होना चाहिए। वाहन की खिड़की पर ग्रिल लगी हो, बस में एक अटेंडेंट होना जरूरी और स्पीड अलार्म अटेंडेंट के पास होना चाहिए।

बोले अधिकारी:
स्कूल संचालकों को वाहनों का फिटनेस टेस्ट करा लेने के लिए बोला गया है। कुछ स्कूल संचालक फिटनेस टेस्ट करा लिए है, जो संचालक वाहनों का फिटनेस टेस्ट नहीं कराएं है वे किसी भी कार्यदिवस में कार्यालय वाहन लाकर फिटनेस टेस्ट करा सकते हैं। - आलोक कुमार यादव, आरआई-एआटीओ सोनभद्र।
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