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Sonebhadra News: स्कूलों में कहीं बाउंड्री नहीं तो कहीं शौचालय अधूरे

Mon, 23 Sep 2024 12:16 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 23 Sep 2024 12:16 AM IST
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Some schools have no boundaries and some toilets are incomplete.
सोनभद्र। परिषदीय विद्यालयों की दशा सुधारने के लिए शासन के आदेश पर कायाकल्प अभियान चलाने के छह साल बाद भी जिले के ज्यादातर विद्यालयों की तस्वीर नहीं बदल सकी है। दावा है कि 99 फीसदी स्कूलों में कायाकल्प पूरा हो गया, जबकि कहीं बाउंड्री तो कहीं शौचालय अधूरे हैं। रसोई घर, स्टोर रूम व भवन भी ठीक नहीं हो पाए हैं।जिले में कुल 2061 परिषदीय विद्यालय संचालित हैं। शासन ने इन स्कूलों को कायाकल्प योजना के तहत चमकाने का आदेश दिया था। वर्ष 2018 से शुरू हुए इस अभियान के तहत बेसिक शिक्षा विभाग का दावा है कि अभी तक जिले के 2058 स्कूलों में कायाकल्प के तहत 16 से 19 पैरामीटर पर कार्य करा लिए गए हैं। दावों की पड़ताल में सैकड़ों स्कूलों में जो तस्वीर उभर कर सामने आई, उसने पोल खोल दी। लापरवाही के कारण कहीं टाइल्स, कहीं बाउंड्री तो कहीं शौचालय नहीं बने। रसोई घर, स्टोर रूम, भवन भी जर्जर हैं, मगर कागजों में काम पूरा दिखाकर वाहवाही लूटी जा रही है। कहीं बिजली नहीं पहुंची तो कहीं हैंडवाश यूनिट का काम अधूरा है।
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कराए जाने थे ये काम
बालक और बालिकाओं के लिए अलग-अलग शौचालय बनने थे। कक्षों की फर्श पर टाइल्स लगने थे। रसोई घर का निर्माण, प्रसाधनों में जलापूर्ति, पेयजल, श्यामपट्ट, विद्यालय की रंगाई-पुताई, मल्टीपल हैंडवॉशिंग यूनिट, कक्षा कक्ष में उपयुक्त वायरिंग, विद्युत उपकरण व्यवस्था, दिव्यांगों के लिए रैंप और शौचालय सहित अन्य कार्य शामिल हैं।
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12 सौ से अधिक स्कूलों में दिव्यांग शौचालय नहींआंकड़ों पर गौर करें तो जिले में 1937 स्कूलों में दिव्यांग शौचालय बनाए जाने थे। इनकी जगह महज 721 स्कूलों में ही निर्माण पूर्ण हुआ है, जबकि 530 स्कूलों में कार्य अपूर्ण हैं। वहीं 691 स्कूलों में दिव्यांग शौचालय का निर्माण शुरू ही नहीं हुआ है।
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साढ़े तीन साल से खुले में शौच जा रहे बच्चे
जिले में कायाकल्प अभियान की सबसे खराब स्थिति सदर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय भड़रा खुर्द की है। स्कूल की प्रभारी प्रधानाध्यापिका और ग्राम प्रधान के उदासीन रवैए के कारण स्कूल के बच्चे करीब चार साल से खुले में शौच के लिए जा रहे हैं। स्कूल का शौचालय ध्वस्त है। पेयजल सप्लाई भी बाधित है। साढ़े तीन वर्ष पूर्व इसके दोनों दरवाजे टूट गए। स्कूल की बाउंड्री भी तीन साल से ध्वस्त है। हैंडवाश यूनिट सक्रिय नहीं मिली। परिसर में बड़े गड्ढे में पानी भरा है। इससे बच्चों के डूबने और विषैले जंतुओं का हमला हो सकता है। कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय नगवां की बाउंड्री क्षतिग्रस्त है। उच्च प्राथमिक विद्यालय बिजवार भी बाउंड्री विहीन है।----
जंगल के रास्ते जाते हैं बच्चेसदर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय घसिया बस्ती में आदिवासी समाज के बच्चे पंजीकृत हैं। यहांं विषैले जंतुओं के काटने के खतरे में बीच बच्चे जंगल के बीच पगडंडी से होकर आते जाते हैं। इसे तत्कालीन दो बीएसए ने गोद लिया था। सड़क न होने के साथ ही यहां बिजली भी नहीं पहुंची। हैंडपंप महीनों से खराब है। हैंडवाश यूनिट सक्रिय नहीं है। इस स्कूल का शौचालय बिना टंकी वाला है, जो उपयोग लायक नहीं है। सदर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय बरकरा में बाउंड्री ध्वस्त है। हैंडवाश यूनिट की टोटी टूटी हुई है। कम्हारी के प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालय में भी बाउंड्री नहीं है। दोनों जगह हैंडवाश यूनिट खराब है। कंपोजिट विद्यालय तिलौली का भी यही हाल है। कोन ब्लॉक के प्रावि. बिहरहवा, परसाजरी, सिंगा, गिधिया द्वितीय, प्रा.वि. मिश्री में बाउंड्री नहीं है। टायलीकरण न होने वाले विद्यालयों में प्रा. वि.समैलवा,किशुनपुरवा, टेडवातेन, सिंगा,उ.प्रा. वि. कचनरवा,प्रा. वि. सिंगा में शौचालय भी ध्वस्त है।
दो विभागों के पेच में बच्चे प्रभावित
जिले के प्राथमिक स्कूलों, उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कायाकल्प अभियान का जिम्मा बेसिक शिक्षा विभाग और पंचायती राज विभाग के तहत ग्राम पंचायतों का है। हालांकि मामले में न तो शिक्षक गंभीर हैं न संबंधित स्कूलों वाले गांवों के प्रधान और सेक्रेटरी। इससे सैकड़ों स्कूलों में अभियान खानापूर्ति तक सीमित है।-----
इन सुविधाओं की दरकार. जिले के करीब 18 फीसदी स्कूलों में बाउंड्री का अभाव। करीब 28 फीसदी स्कूलों के रसोई घर तक पानी की निरंतर सप्लाई नहीं। 29 फीसदी स्कूलों के शौचालय और यूरिनल में टाइल्स नहीं है। 18 फीसदी स्कूलों में रेलिंग युक्त रैंप का अभाव। 2061 में से 30 फीसदी स्कूलों के प्लास्टर की मरम्मत की जरूरत है। 35 फीसदी स्कूलों की खिड़की, दरवाजे मरम्मत योग्य हैं। 280 से अधिक स्कूलों में बिजली कनेक्शन का अभाव।

कोट...कायाकल्य योजना के तहत स्कूलों की काया बदलने के लिए काम जारी है। 99 फीसदी स्कूलों में काम पूरा हो गया है। कुछ विद्यालय जहां काम अधूरे हैं, उनके लिए भी कार्रवाई की जा रही है। -मुकुल आनंद पांडेय, बीएसए।
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