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भाइयों की लंबी आयु के लिए बहनों ने की पूजा
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राबर्ट्सगंज अंबेडकर नगर में भैया दूज पर पुजन अर्चन करती महिलाएं।
- फोटो : SONBHADRA
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सोनभद्र। भाई-बहन के प्रेम, स्नेह का पर्व भैया दूज शनिवार को जिले में धूमधाम से मना। जिला मुख्यालय के साथ ही ग्रामीण अंचलों में भैया दूज की धूम रही। बहनें विधि विधान से पूजन अर्चन कर अपने भाइयों के लंबी उम्र की कामना की।
जिला मुख्यालय राबर्ट्सगंज के हाइडिल मैदान स्थित कांशीराम आवास में दो स्थान पर युवतियां और महिलाएं गाय के गोबर से लीपकर चौक बनाया। इसके बाद विधि विधान से पूजन की। पूजा कर रही नीलम, चांदनी, किरन, आरती, पूजा, ऋजी, रुनझुन, खुशी, रोशनी, मौसम और शिवानी का कहना है कि वह वर्षो से भैया दूज का पूजन कर रही है। भैया दूज पूजा वे अपने भाई के लंबी आयु के लिए करती हैं। इसी तरह से सदर ब्लॉक के बरकरा गांव में भैया दूज पूजा विधि विधान से किया गया। इसी तरह से बभनी क्षेत्र में भैया दूज पूजा किया गया।
बता दें कि भाई-बहन के प्रेम, स्नेह का पर्व भैया दूज कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया को मनाया जाताहै। रक्षा बंधन के बाद यह दूसरा पर्व है जिसे बहने अपने भाईयों के लिए करती हैं। पंडित आचार्य वेदप्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि भगवान सूर्यदेव और उनकी पत्नी छाया से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ था। यमुना और यमराज में बहुत स्नेह था। मृत्युदेव यमदेव सदैव प्राण हरने में ही व्यस्त रहते थे। उधर यमुना भाई यमराज को निरंतर अपने घर आने का निमंत्रण देती रहती थी। एक दिन कार्तिक शुक्ल की द्वितीया तिथि पर यमुना ने यमराज को अपने घर आने के लिए वचनबद्ध कर दिया। यमुना ने यमराज से कहा कि वह प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को उनके घर आया करें। यह भी कहा कि उनकी तरह कोई भी बहन इस दिन यदि अपने भाई का विधिपूर्वक तिलक करें, तो उसे यमराज यानि मृत्यु का भय ना हो। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।
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जिला मुख्यालय राबर्ट्सगंज के हाइडिल मैदान स्थित कांशीराम आवास में दो स्थान पर युवतियां और महिलाएं गाय के गोबर से लीपकर चौक बनाया। इसके बाद विधि विधान से पूजन की। पूजा कर रही नीलम, चांदनी, किरन, आरती, पूजा, ऋजी, रुनझुन, खुशी, रोशनी, मौसम और शिवानी का कहना है कि वह वर्षो से भैया दूज का पूजन कर रही है। भैया दूज पूजा वे अपने भाई के लंबी आयु के लिए करती हैं। इसी तरह से सदर ब्लॉक के बरकरा गांव में भैया दूज पूजा विधि विधान से किया गया। इसी तरह से बभनी क्षेत्र में भैया दूज पूजा किया गया।
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बता दें कि भाई-बहन के प्रेम, स्नेह का पर्व भैया दूज कार्तिक शुक्ल पक्ष द्वितीया को मनाया जाताहै। रक्षा बंधन के बाद यह दूसरा पर्व है जिसे बहने अपने भाईयों के लिए करती हैं। पंडित आचार्य वेदप्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि भगवान सूर्यदेव और उनकी पत्नी छाया से यमराज तथा यमुना का जन्म हुआ था। यमुना और यमराज में बहुत स्नेह था। मृत्युदेव यमदेव सदैव प्राण हरने में ही व्यस्त रहते थे। उधर यमुना भाई यमराज को निरंतर अपने घर आने का निमंत्रण देती रहती थी। एक दिन कार्तिक शुक्ल की द्वितीया तिथि पर यमुना ने यमराज को अपने घर आने के लिए वचनबद्ध कर दिया। यमुना ने यमराज से कहा कि वह प्रत्येक वर्ष कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को उनके घर आया करें। यह भी कहा कि उनकी तरह कोई भी बहन इस दिन यदि अपने भाई का विधिपूर्वक तिलक करें, तो उसे यमराज यानि मृत्यु का भय ना हो। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।
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