{"_id":"66edaab9d0bc44afd606af34","slug":"sir-please-get-my-ayushman-card-made-my-child-has-a-hole-in-his-heart-sonbhadra-news-c-194-1-son1001-118224-2024-09-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonebhadra News: साहब मेरा आयुष्मान कार्ड बनवा दो, बच्चे के दिल में छेद है","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonebhadra News: साहब मेरा आयुष्मान कार्ड बनवा दो, बच्चे के दिल में छेद है
विज्ञापन
सोनभद्र। गरीबों को पांच लाख तक का उपचार निशुल्क मुहैया कराने वाली आयुष्मान योजना से कई पात्र अभी भी वंचित हैं। वह कार्ड बनवाने के लिए भटक रहे हैं। ऐसे ही लोगों में मधुपुर के चंद्रिका सिंह भी शामिल हैं। उनके आठ साल के बेटे के दिल में छेद है। उपचार में चार लाख रुपये खर्च होना है, मगर उनके पास इतने पैसे नहीं है। पात्रता के बाद भी उनका आयुष्मान कार्ड नहीं बना है। बच्चे की जिंदगी बचाने के लिए वह सीएचसी से लेकर सीएमओ कार्यालय तक दौड़ लगा रहे हैं। लोगों से गुहार कर रहे हैं कि कोई उनके बेटे को जीवनदान देने के लिए आगे आ जाए।
चंद्रिका सिंह के पुत्र अंकित को बचपन से ही सीने में दर्द कि शिकायत थी। परिजनों को भरोसा था कि बड़ा होने पर सब ठीक हो जाएगा। आठ साल का होने पर भी समस्या दूर नहीं हुई तो परिजनों ने डॉक्टरों को दिखाया।
गत चार अगस्त को बीएचयू में कराई जांच में पता चला कि अंकित के दिल में छेद है। चिकित्सक ने जल्दी सर्जरी की सलाह दी। पिता आयुष्मान योजना का लाभ पाने के लिए सीएमओ कार्यालय और जिला अस्पताल के चक्कर लगा रहा है। पिछले एक माह में वह कई बार अस्पताल और कार्यालय पहुंच आयुष्मान कार्ड जारी करने की गुहार लगा चुका है। ऑपरेशन में करीब चार लाख रुपये खर्च होने हैं। पैसे के अभाव में उनके बच्चे का उपचार नहीं हो पा रहा है।
विज्ञापन
-- -- -
शिक्षक ने स्कूल आने से किया मना
बच्चे के दिल में छेद का इलाज न होने से उसकी सेहत बिगड़ती रही है। दस कदम चलने पर वो कलेजा पकड़ बैठ जा रहा है। अंकित गांव से दूसरे टोले के प्राथमिक विद्यालय जरतवा में कक्षा चार का छात्र है। परिजनों ने बताया कि उसकी बीमारी को देखते हुए शिक्षकाें ने उसे स्कूल न आने की सलाह दी है। इससे उसकी पढ़ाई भी ठप हो गई है।
आरोग्य निधि का नहीं पता
गंभीर बीमारी से पीड़ित किसी व्यक्ति का पैसे के अभाव में मौत न हो इसके लिए पहल की गई थी। आरोग्य निधि योजना से गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों को डेढ़ लाख तक की मदद मिलनी थी। शर्त थी कि वे ऐसी बीमारी हो जिसका इलाज जिले में संभव न हो, मगर इस योजना को लेकर भी कोई खास पहल नहीं है।
आयुष्मान योजना का हाल
- 10.60 लाख लोगों का आयुष्मान कार्ड बनाने का है लक्ष्य
- 622540 लाख लोगों के अब तक बन चुके हैं कार्ड
लाभार्थी सूची में नाम न होने से जिले स्तर पर नाम जोड़ने को लेकर कोई विकल्प नहीं है। लाभार्थी सूची में शामिल लोगों के कार्ड तेजी से बनाए जा रहे हैं। अन्य मामलों को लेकर जानकारी नहीं है। - डॉ. एसके वर्मा, नोडल आयुष्मान।
ह मामला संज्ञान में नहीं है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम भेजकर बच्चे के बारे में जानकारी कराएंगे। इस योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चों के निशुल्क उपचार की सुविधा है। पात्रता के आधार पर लाभ दिलाया जाएगा। -डॉ. अश्वनी कुमार, सीएमओ।
विज्ञापन
चंद्रिका सिंह के पुत्र अंकित को बचपन से ही सीने में दर्द कि शिकायत थी। परिजनों को भरोसा था कि बड़ा होने पर सब ठीक हो जाएगा। आठ साल का होने पर भी समस्या दूर नहीं हुई तो परिजनों ने डॉक्टरों को दिखाया।
विज्ञापन
गत चार अगस्त को बीएचयू में कराई जांच में पता चला कि अंकित के दिल में छेद है। चिकित्सक ने जल्दी सर्जरी की सलाह दी। पिता आयुष्मान योजना का लाभ पाने के लिए सीएमओ कार्यालय और जिला अस्पताल के चक्कर लगा रहा है। पिछले एक माह में वह कई बार अस्पताल और कार्यालय पहुंच आयुष्मान कार्ड जारी करने की गुहार लगा चुका है। ऑपरेशन में करीब चार लाख रुपये खर्च होने हैं। पैसे के अभाव में उनके बच्चे का उपचार नहीं हो पा रहा है।
विज्ञापन
शिक्षक ने स्कूल आने से किया मना
बच्चे के दिल में छेद का इलाज न होने से उसकी सेहत बिगड़ती रही है। दस कदम चलने पर वो कलेजा पकड़ बैठ जा रहा है। अंकित गांव से दूसरे टोले के प्राथमिक विद्यालय जरतवा में कक्षा चार का छात्र है। परिजनों ने बताया कि उसकी बीमारी को देखते हुए शिक्षकाें ने उसे स्कूल न आने की सलाह दी है। इससे उसकी पढ़ाई भी ठप हो गई है।
आरोग्य निधि का नहीं पता
गंभीर बीमारी से पीड़ित किसी व्यक्ति का पैसे के अभाव में मौत न हो इसके लिए पहल की गई थी। आरोग्य निधि योजना से गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों को डेढ़ लाख तक की मदद मिलनी थी। शर्त थी कि वे ऐसी बीमारी हो जिसका इलाज जिले में संभव न हो, मगर इस योजना को लेकर भी कोई खास पहल नहीं है।
आयुष्मान योजना का हाल
- 10.60 लाख लोगों का आयुष्मान कार्ड बनाने का है लक्ष्य
- 622540 लाख लोगों के अब तक बन चुके हैं कार्ड
लाभार्थी सूची में नाम न होने से जिले स्तर पर नाम जोड़ने को लेकर कोई विकल्प नहीं है। लाभार्थी सूची में शामिल लोगों के कार्ड तेजी से बनाए जा रहे हैं। अन्य मामलों को लेकर जानकारी नहीं है। - डॉ. एसके वर्मा, नोडल आयुष्मान।
ह मामला संज्ञान में नहीं है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम भेजकर बच्चे के बारे में जानकारी कराएंगे। इस योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चों के निशुल्क उपचार की सुविधा है। पात्रता के आधार पर लाभ दिलाया जाएगा। -डॉ. अश्वनी कुमार, सीएमओ।