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Sonebhadra News: चार माह में 72 हजार लोगों की स्क्रीनिंग, 40 मिले सिकल सेल एनीमिया से पीड़ित

Tue, 19 Mar 2024 10:28 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Tue, 19 Mar 2024 10:28 PM IST
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Screening of 72 thousand people in four months, 40 found suffering from sickle cell anemia
सिकल सेल एनीमिया की बीमारी जिले में तेजी से बढ़ रही है। चार माह में 72 हजार लोगों की स्क्रीनिंग में 40 लोग सिकल सेल एनीमिया से ग्रसित मिले हैं। इसमें 85 फीसदी बच्चे ही हैं। माता-पिता के माध्यम से उन्हें यह बीमारी मिली है। रक्त संक्रमण से होने वाली इस आनुवंशिक बीमारी से बचने के लिए डॉक्टर शादी के दौरान कुंडली के साथ ब्लड के मिलान को भी जरूरी बता रहे हैं।
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अति पिछड़े जिले के आदिवासी अंचल में सिकल सेल जैसी गंभीर बीमारी पांव पसार रही है। इसके पीछे जागरूकता का अभाव मुख्य वजह मानी जा रही है। एनीमिया-सिकल सेल हीमोग्लोबिन पैथी लाल रक्त कोशिकाओं की एक आनुवांशिक बीमारी है। स्वास्थ्य विभाग को इस बीमारी की पहचान और रोकथाम के लिए पहले चरण में 3.55 लाख लोगों की जांच का लक्ष्य दिया गया है। इसके लिए 1.15 लाख किट उपलब्ध कराई गई है। विभाग ने करीब चार माह में 71,503 लोगों में इस बीमारी की जांच की है। इसमें कुल 40 लोग बीमारी से ग्रसित मिले हैं। इनमें 85 फीसदी बच्चे हैं। सभी मरीज आदिवासी और मुस्लिम वर्ग से हैं। विभाग की रिपोर्ट पर गौर करें तो दुद्धी विकास खंड और उससे सटे इलाके इस बीमारी से अधिक प्रभावित हैं।
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सिकल सेल काे जानें
डॉक्टरों के मुताबिक सिकल सेल एनीमिया ऐसा रक्त विकार है, जिसमें लाल रक्त कोशिकाएं जल्दी टूट जाती हैं। इस कारण एनीमिया और अन्य जटिलताएं वेसो ओक्लुसिव क्राइसिस, फेफड़ों में संक्रमण, एनीमिया, गुर्दे और यकृत की विफलता, स्ट्रोक आदि की बीमारी और यहां तक की पीड़ित की मौत तक की आशंका रहती है। अक्सर जनजातीय समुदाय की मौतें एनीमिया सिकल सेल में कारण भी हो जाती हैं। लोगों में मलेरिया से बचाव के लिए आरबीसी का आकार गोल के स्थान पर हंसिए के आकार का हो जाता है। संक्रमित लोगों के शरीर में रक्त की कमी, लकवा, नसें बंद होने और मस्तिष्क में रक्त का थक्का न बनने की समस्या होती है।
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चेन तोड़ने के लिए जांच जरूरी

सिकल सेल एनीमिया आनुवंशिक और घातक बीमारियों में से एक है। आदिवासी क्षेत्रों में सिकल सेल रोगियों की सबसे ज्यादा संख्या है। इस वंशानुगत बीमारी की चेन तोड़ने के लिए लोगों को कुछ त्याग करने की जरूरत है। वास्तविकता को स्वीकार करते हुए विवाह करते समय सुनिश्चित करें कि विवाह करते वाले महिला-पुरुष में सिकल सेल वाहक या सिकल रोग न हो। शादी से पूर्व जांच कराएं। अगर दोनों में से कोई एक सिकल सेल वाहक है या फिर सिकल सेल बीमारी है तो बच्चे सिकल सेल बीमारी से दूर रहेंगे। वह वाहक हो सकते हैं। बड़े होने पर वाहक साथी होने पर उनके बच्चे पीड़ित होंगे। अगर पति-पत्नी दोनों वाहक या फिर दोनों बीमारी से पीड़ित हैं तो ऐसे दंपती बच्चे पैदा करने से अच्छा है कि बच्चों को गोद लें, ताकि विस्तार रोका जा सके।

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