घोरावल। तहसील क्षेत्र के यूपी-एमपी बार्डर के गांव शिल्पी व बरवाडीह में लखनऊ के वीरबल साहनी पुरा विज्ञान संस्थान के वैज्ञानिक एवं शोध छात्रा की टीम बुधवार को पहुंच गई। टीम ने दोनों गांवों के पत्थरों का अध्ययन किया और शोध के लिए नमूने भी एकत्र किए। वे लखनऊ ले जाकर उन पर रिसर्च करेंगे।
घोरावल तहसील क्षेत्र में तमाम जगहों पर पूरा पाषाण युग से लेकर नव पाषाण युग के मानव जीवन के साक्ष्य मौजूद हैं, जिन पर व्यापक शोध की जरूरत है। वीरबल साहनी पुरा विज्ञान संस्थान के प्रोफेसर मुकुंद शर्मा एवं शोध छात्रा दिव्या सिंह बुधवार को घोरावल पहुंचे। उन्होंने शिल्पी व बरवाडीह गांवों में जा कर वहां के पत्थरों पर गहन अध्ययन किया। प्रोफेसर शर्मा ने बताया कि वह आदिकालीन जीवन पर शोध कार्य कर रहे हैं। प्राचीन काल के मानव पर शोध के लिए वह विंध्याचल की पहाड़ियों में पत्थरों पर अध्ययन कर रहे हैं। घोरावल के सीमावर्ती गांव बरवाडीह व शिल्पी के कुंडवा नाले के पास मिलने वाले पत्थर रोहतास लाइम स्टोन के नाम से जाने जाते हैं। यहां काफी बड़े साइज के नोड्यूल्स मिल रहे हैं। यह कैल्केरियस नोड्यूल्स है, जो प्योर लाइम स्टोन के बने हैं। बताया कि यहां के लोगों को इन दुर्लभ पत्थरों के बारे में जानकारी नहीं है लेकिन यह नोड्यूल्स पुरातत्व के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण धरोहर हैं। इन्हें संजोकर रखने की जरूरत है। ये बेहद खूबसूरत हैं और सेल के अंदर दबे हुए हैं। बरवाडीह नाले में बहुत ज्यादा मात्रा में नोड्यूल्स हैं। इस इलाके में कई तरह के नोड्यूल्स मिले हैं। इनके महत्व, उपयोगिता है और इसके अंदर क्या-क्या चीजें हैं, इन पर विस्तृत शोध संस्थान में किया जाएगा।