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Sonebhadra News: घोड़े की सवारी पर होगा मातारानी का आगमन, हाथी पर प्रस्थान
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सोनभद्र। शक्ति आराधना का महापर्व वासंतिक (चैत्र) नवरात्र नौ अप्रैल से शुरू हो रहा है। इसके साथ ही नया संवत शुरू हो जाएगा। इस बार नवरात्र में मां दुर्गा का आगमन घोड़े पर होगा और हाथी पर सवार होकर प्रस्थान करेंगी। चैत्र नवरात्र का प्रारंभ मंगलवार से होने के कारण मां दुर्गा घोड़ा पर सवार होकर आएंगी, ऐसे में इस साल राजनीतिक रूप से उठा पटक की स्थिति बनी रहेगी। हाथी पर प्रस्थान शुभ संकेत माना जाता है। मातारानी के आगमन की तैयारी में भक्तगण जुट गए हैं।
ज्योतिषाचार्य डॉ. एसएन तिवारी एवं विशाल चतुर्वेदी के मुताबिक वासंतिक नवरात्र नौ अप्रैल मंगलवार से आरंभ हो रहा है। इस बार नवरात्र नौ दिन का है। बताया कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा आठ अप्रैल की रात 11 बजकर 55 मिनट से शुरू हो रही है, जो दूसरे दिन नौ अप्रैल को रात नौ बजकर 44 मिनट तक रहेगी। पूरे दिन प्रतिपदा तिथि होने के कारण कभी भी कलश स्थापना की जा सकेगी। हालांकि सुबह 11. 35 बजे से दोपहर 12.24 बजे अभिजित मुहुर्त है। अभिजित मुहुर्त में कलश स्थापना उत्तम माना गया है। इसी दिन से नया संवत (नवसंवत्सर) शुरू होगा। नवमी तिथि 17 अप्रैल को है। इस दिन शाम पांच बजकर 22 मिनट तक नवमी तिथि है। इस नाते इससे पहले ही हवन आदि संपन्न किया जाना चाहिए। प्रतिपदा का व्रत नौ अप्रैल को तथा अष्टमी का व्रत 17 अप्रैल को किया जाएगा। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि मातारानी का आगमन घोड़ा पर होने की वजह से यह वर्ष राजनीतिक रूप से उठा पटक की स्थिति वाला रहेगा। जबकि हाथी की सवारी पर मातारानी का प्रस्थान होने से शुभकारक माना जा रहा है। नवरात्र में अनुष्ठान करने वाले भक्तगण तैयारी में जुट गए हैं। रविवार को आस्थावान पूजन सामग्री की खरीदारी की। भीड़ बढ़ने से बाजार में रौनक बढ़ गई है। इसके साथ ही अनुष्ठान के लिए वेदपाठी ब्राह्मणों से यजमान संपर्क कर रहे हैं।
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ज्योतिषाचार्य डॉ. एसएन तिवारी एवं विशाल चतुर्वेदी के मुताबिक वासंतिक नवरात्र नौ अप्रैल मंगलवार से आरंभ हो रहा है। इस बार नवरात्र नौ दिन का है। बताया कि चैत्र शुक्ल प्रतिपदा आठ अप्रैल की रात 11 बजकर 55 मिनट से शुरू हो रही है, जो दूसरे दिन नौ अप्रैल को रात नौ बजकर 44 मिनट तक रहेगी। पूरे दिन प्रतिपदा तिथि होने के कारण कभी भी कलश स्थापना की जा सकेगी। हालांकि सुबह 11. 35 बजे से दोपहर 12.24 बजे अभिजित मुहुर्त है। अभिजित मुहुर्त में कलश स्थापना उत्तम माना गया है। इसी दिन से नया संवत (नवसंवत्सर) शुरू होगा। नवमी तिथि 17 अप्रैल को है। इस दिन शाम पांच बजकर 22 मिनट तक नवमी तिथि है। इस नाते इससे पहले ही हवन आदि संपन्न किया जाना चाहिए। प्रतिपदा का व्रत नौ अप्रैल को तथा अष्टमी का व्रत 17 अप्रैल को किया जाएगा। ज्योतिषाचार्य ने बताया कि मातारानी का आगमन घोड़ा पर होने की वजह से यह वर्ष राजनीतिक रूप से उठा पटक की स्थिति वाला रहेगा। जबकि हाथी की सवारी पर मातारानी का प्रस्थान होने से शुभकारक माना जा रहा है। नवरात्र में अनुष्ठान करने वाले भक्तगण तैयारी में जुट गए हैं। रविवार को आस्थावान पूजन सामग्री की खरीदारी की। भीड़ बढ़ने से बाजार में रौनक बढ़ गई है। इसके साथ ही अनुष्ठान के लिए वेदपाठी ब्राह्मणों से यजमान संपर्क कर रहे हैं।
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