{"_id":"5741eba24f1c1b1d16690a98","slug":"production-started-in-anpara-d","type":"story","status":"publish","title_hn":"अनपरा डी की पहली इकाई से उत्पादन शुरू","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अनपरा डी की पहली इकाई से उत्पादन शुरू
ब्यूरो, अमर उजाला/ सोनभद्र
Updated Sun, 22 May 2016 10:55 PM IST
विज्ञापन
बिजली चोरी
- फोटो : Bureau
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हजार मेगावाट वाली अनपरा डी परियोजना की शनिवार को ट्रिप हुई 500 मेगावाट की पहली इकाई रविवार की सुबह उत्पादन पर ले ली गई। इसके साथ ही परियोजना का उत्पादन बढ़कर पांच सौ मेगावाट पहुंच गया। शाम तक दोनों इकाइयों से ढाई सौ-ढाई सौ मेगावाट उत्पादन किया जा रहा था। अभी तक परियोजना को वाणिज्यिक लोड पर नहीं लिया गया, जिसके चलते अभी पूरी क्षमता से उत्पादन नहीं किया जा रहा है।
गर्मी में बिजली की मांग अधिक होने के कारण राज्य की विद्युत उत्पादन इकाइयों को पूरी क्षमता से चलाने पर जोर दिया जा रहा है। अनपरा की नव निर्मित डी परियोजना की दोनों इकाइयों से बिजली तो पैदा हो रही है, लेकिन उत्पादन को वाणिज्यिक घोषित नहीं किया गया है। इसके चलते राज्य उत्पादन निगम को यहां की बिजली का भुगतान विद्युत वितरण निगम से नहीं से नहीं मिल रहा है। ऐसे में डी यूनिट को आधी क्षमता पर चलाया जा रहा है और यहां एक हजार के बजाय पांच सौ मेगावाट उत्पादन हो रहा है।
गत आठ मई को पांच सौ मेगावाट वाली पहली इकाई के वाणिज्यिक उत्पादन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी और अब उत्पादन को वाणिज्यिक घोषित करने का प्रस्ताव निगम प्रबंधन और सिस्टम कंट्रोल को भेज दिया गया है।
विज्ञापन
सूत्र बताते हैं कि चूंकि राज्य विद्युत वितरण निगम और राज्य विद्युत उत्पादन निगम दोनों के एमडी एक ही हैं। इसलिए इस पर अंतिम निर्णय भी उन्हें भी लेना है, लेकिन विद्युत वितरण निगम के मानक के हिसाब से अभी कुछ बिंदु बाकी रह गए हैं, जिसके निस्तारण का निर्देश अनपरा परियोजना प्रबंधन को दिया है। इस कड़ी में अनपरा परियोजना की ओर से शनिवार को दूसरा प्रस्ताव भी भेज दिया गया। उधर, सीजीएम त्रिभुवन तिवारी ने भी दोबारा प्रस्ताव भेजे जाने की पुष्टि की। कहा कि अनपरा डी की दोनों इकाइयां जल्द से जल्द वाणिज्यिक उत्पादन पर आ जाएं, इसका प्रयास जारी है।
गर्मी और उमस के कारण बिजलीघरों पर अधिकतम उत्पादन का दबाव है। रविवार की शाम को अनपरा परियोजना में 1565, अनपरा डी में पांच सौ, ओबरा में 675, पनकी में 60, पारीक्षा में 815, हरदुआगंज में 600, कुल 4237 मेगावाट बिजली पैदा हो रही थी। अनपरा डी परियोजना को वाणिज्यिक लोड पर लेने के बाद पांच सौ मेगावाट अतिरिक्त बिजली सिस्टम कंट्रोल को प्राप्त हो जाएगी। इससे पीक आवर में महंगी बिजली पावर एक्सचेंज से लेने की मजबूरी नहीं रह जाएगी। जानकारों का कहना है कि पावर कारपोरेशन जल्द ही इस मसले पर सकारात्मक निर्णय लेगा।
विज्ञापन
गर्मी में बिजली की मांग अधिक होने के कारण राज्य की विद्युत उत्पादन इकाइयों को पूरी क्षमता से चलाने पर जोर दिया जा रहा है। अनपरा की नव निर्मित डी परियोजना की दोनों इकाइयों से बिजली तो पैदा हो रही है, लेकिन उत्पादन को वाणिज्यिक घोषित नहीं किया गया है। इसके चलते राज्य उत्पादन निगम को यहां की बिजली का भुगतान विद्युत वितरण निगम से नहीं से नहीं मिल रहा है। ऐसे में डी यूनिट को आधी क्षमता पर चलाया जा रहा है और यहां एक हजार के बजाय पांच सौ मेगावाट उत्पादन हो रहा है।
विज्ञापन
गत आठ मई को पांच सौ मेगावाट वाली पहली इकाई के वाणिज्यिक उत्पादन की प्रक्रिया पूरी कर ली गई थी और अब उत्पादन को वाणिज्यिक घोषित करने का प्रस्ताव निगम प्रबंधन और सिस्टम कंट्रोल को भेज दिया गया है।
विज्ञापन
सूत्र बताते हैं कि चूंकि राज्य विद्युत वितरण निगम और राज्य विद्युत उत्पादन निगम दोनों के एमडी एक ही हैं। इसलिए इस पर अंतिम निर्णय भी उन्हें भी लेना है, लेकिन विद्युत वितरण निगम के मानक के हिसाब से अभी कुछ बिंदु बाकी रह गए हैं, जिसके निस्तारण का निर्देश अनपरा परियोजना प्रबंधन को दिया है। इस कड़ी में अनपरा परियोजना की ओर से शनिवार को दूसरा प्रस्ताव भी भेज दिया गया। उधर, सीजीएम त्रिभुवन तिवारी ने भी दोबारा प्रस्ताव भेजे जाने की पुष्टि की। कहा कि अनपरा डी की दोनों इकाइयां जल्द से जल्द वाणिज्यिक उत्पादन पर आ जाएं, इसका प्रयास जारी है।
गर्मी और उमस के कारण बिजलीघरों पर अधिकतम उत्पादन का दबाव है। रविवार की शाम को अनपरा परियोजना में 1565, अनपरा डी में पांच सौ, ओबरा में 675, पनकी में 60, पारीक्षा में 815, हरदुआगंज में 600, कुल 4237 मेगावाट बिजली पैदा हो रही थी। अनपरा डी परियोजना को वाणिज्यिक लोड पर लेने के बाद पांच सौ मेगावाट अतिरिक्त बिजली सिस्टम कंट्रोल को प्राप्त हो जाएगी। इससे पीक आवर में महंगी बिजली पावर एक्सचेंज से लेने की मजबूरी नहीं रह जाएगी। जानकारों का कहना है कि पावर कारपोरेशन जल्द ही इस मसले पर सकारात्मक निर्णय लेगा।