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उत्पादन में देरी सहन नहीं : एमडी
संवाददाता, साोनभ्ाद्र
Updated Sat, 05 Dec 2015 11:54 PM IST
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राज्य उत्पादन निगम के एमडी एमपी मिश्र ने कहा कि हजार मेगावाट वाली अनपरा डी से बिजली उत्पादन में देरी अब बर्दाश्त योग्य नहीं है। पहले ही काफी कुछ नुकसान हो चुका है।
इसलिए जितनी जल्दी हो सके, पांच-पांच सौ मेगावाट वाली दोनों इकाइयों को वाणिज्यिक उत्पादन पर ले लिया जाए। शनिवार की दोपहर विदेशी अतिथि गृह में भेल एवं अनपरा परियोजना अधिकारियों की बैठक लेते समय यह बातें कहीं।
कहा कि पहली और दूसरी दोनों इकाइयों को उत्पादन पर लेने की एक निश्चित समयसीमा तय की जाए और हर हाल में तय समय पर इकाइयों को उत्पादन पर ले भी लिया जाए। इसको लेकर करीब ढाई घंटे तक माथापच्ची चली, लेकिन कोई निश्चित तिथि तय नहीं हो सकी।
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हालांकि भेल के अनपरा डी प्रोजेक्ट निर्माण प्रबंधक आरके श्रीवास्तव का कहना था कि दूसरी इकाई को जनवरी तक तथा पहली इकाई को फरवरी में जाकर कोई तिथि तय करने की बात कही लेकिन ढाई बजे तक चली बैठक में इसको लेकर कोई सहमति नहीं बन पाई।
आखिर में फरवरी अंत तक दोनों इकाइयों से नियमित उत्पादन शुरू होने की उम्मीद जताई गई। एमडी ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि स्थिति काफी खराब है। जिस परियोजना को जुलाई 2011 में उत्पादन पर आ जाना चाहिए था, वह अभी तक नहीं आई है। इसलिए जितना जल्दी हो सके परियोजना को उत्पादन पर ले आया जाए।
इससे पूर्व उन्होंने अनपरा डी का निरीक्षण किया और ब्वायलर, टरबाइन, सीएचपी आदि के कार्यों की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने ट्यूब बैंड में जमा केमिकल के अवशिष्ट की सैंपलिंग भी कराई और इसको लेकर भेल के अधिकारियों से जरूरी जानकारी हासिल की।
भेल के लोगों ने भी माना कि केमिकल चयन में गलती हुई है। उनकी ओर से भी केमिकल की सैंपलिंग टेस्ट के लिए तिरची भेजा गया है। इस मौके पर निदेशक तकनीकी मुरलीधर भागचंदानी, निदेशक कार्मिक बीएस तिवारी, निदेशक परियोजना आरके त्रिवेदी, सीजीएम अनपरा इं. त्रिभुवन तिवारी, एके सिंह रहे।
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इसलिए जितनी जल्दी हो सके, पांच-पांच सौ मेगावाट वाली दोनों इकाइयों को वाणिज्यिक उत्पादन पर ले लिया जाए। शनिवार की दोपहर विदेशी अतिथि गृह में भेल एवं अनपरा परियोजना अधिकारियों की बैठक लेते समय यह बातें कहीं।
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कहा कि पहली और दूसरी दोनों इकाइयों को उत्पादन पर लेने की एक निश्चित समयसीमा तय की जाए और हर हाल में तय समय पर इकाइयों को उत्पादन पर ले भी लिया जाए। इसको लेकर करीब ढाई घंटे तक माथापच्ची चली, लेकिन कोई निश्चित तिथि तय नहीं हो सकी।
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हालांकि भेल के अनपरा डी प्रोजेक्ट निर्माण प्रबंधक आरके श्रीवास्तव का कहना था कि दूसरी इकाई को जनवरी तक तथा पहली इकाई को फरवरी में जाकर कोई तिथि तय करने की बात कही लेकिन ढाई बजे तक चली बैठक में इसको लेकर कोई सहमति नहीं बन पाई।
आखिर में फरवरी अंत तक दोनों इकाइयों से नियमित उत्पादन शुरू होने की उम्मीद जताई गई। एमडी ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि स्थिति काफी खराब है। जिस परियोजना को जुलाई 2011 में उत्पादन पर आ जाना चाहिए था, वह अभी तक नहीं आई है। इसलिए जितना जल्दी हो सके परियोजना को उत्पादन पर ले आया जाए।
इससे पूर्व उन्होंने अनपरा डी का निरीक्षण किया और ब्वायलर, टरबाइन, सीएचपी आदि के कार्यों की जानकारी ली। इस दौरान उन्होंने ट्यूब बैंड में जमा केमिकल के अवशिष्ट की सैंपलिंग भी कराई और इसको लेकर भेल के अधिकारियों से जरूरी जानकारी हासिल की।
भेल के लोगों ने भी माना कि केमिकल चयन में गलती हुई है। उनकी ओर से भी केमिकल की सैंपलिंग टेस्ट के लिए तिरची भेजा गया है। इस मौके पर निदेशक तकनीकी मुरलीधर भागचंदानी, निदेशक कार्मिक बीएस तिवारी, निदेशक परियोजना आरके त्रिवेदी, सीजीएम अनपरा इं. त्रिभुवन तिवारी, एके सिंह रहे।