केकराही। आषाढ़ के मौसम में बैसाख और जेठ जैसे मौसम ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। बारिश न होने से धान की नर्सरी सूखने लगी है। मिर्च व धान की रोपाई भी बाधित हो रही है। किसान खेती करने के लिए आसमान की तरफ निगाह लगाए हुए हैं। काफी दिनों से अच्छी बारिश न होने से किसानों में काफी निराशा है। टमाटर मिर्च की खेती करने वाले किसानों की आश अब धीरे-धीरे टूटने लगी है। टमाटर मिर्च की खेती बाहुल्य क्षेत्र में किसानों के मिर्चा और धान की नर्सरी रोपाई के लिए तैयार है। लेकिन पानी के अभाव में न तो धान की रोपाई की जा रही है न हीं मिर्च की खेती हो रही है। किसानों की माने तो धान की नर्सरी पानी बिन सूखने लगी है तथा मिर्च की नर्सरी के पौधे भी बढ़ते जा रहे हैं। इतना तक ही नहीं नर्सरी में ही कुछ पौधे फूल भी देने लगे हैं इस पानी के मौसम में इतनी गर्मी और उमस से किसान और जनमानस बेहाल है। क्षेत्रीय किसान रविंदर, राम लखन, यादवेंद्र प्रतापराव, अमरनाथ, देवनाथ आदि ने बताया कि अगर बारिश नहीं हुई तो हम सभी किसानों के मिर्च के पौधे नर्सरी में ही सूख जाएंगे। ऐसे में पैसे से लिए गए खेत की भरपाई कैसे हो पाएगी इसकी चिंता सताने लगी है। कुछ किसानों ने तो किसी प्रकार से पानी की व्यवस्था कर मिर्च की खेती तो कर दिया है, मगर अब यह पौधे भी धूप से सूखने लगे हैं। धान की खेती करने वाले किसान वीरेंद्र कुमार सिंह, पारसनाथ सिंह, गुलाब नाथ, श्यामू,चन्द्र बली बुधराम, राजकुमार, एमजी सिंह मौर्य ने कहा कि वह पानी की आस मैं बैठे हैं। बरसात हो तो धान की रोपाई शुरू हो जाए।