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Sonebhadra News: जिले की समस्याओं पर सदन में मौन रहे हमारे विधायक
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विधानसभा का बजट सत्र समाप्त हो गया है। आठ दिनाें तक चले सत्र में सदस्यों ने विभिन्न मुद्दों पर बेबाकी से अपनी बात रखी। क्षेत्र की समस्याओं को उठाया। सरकार से उन पर सवाल भी पूछे, मगर सोनांचल के विधायक सवाल पूछने में फिसड्डी साबित हुए हैं।
क्षेत्र में जनता के सामने गरजने वाले नेता सदन में जनता से जुड़े सवालों पर पूरी तरह मौन रहे। पूरे सत्र में जिले के किसी मुद्दे या समस्या पर किसी भी सदस्य ने कोई सवाल नहीं उठाया। घोरावल विधायक ने अतारांकित श्रेणी में दो सवाल पूछे भी, मगर उनका जिले से कोई जुड़ाव ही नहीं था।
चार विधानसभा सीटों से मौजूदा समय में तीन विधायक सदन में जिले का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इसमें ओबरा विधायक संजीव सिंह गोंड प्रदेश सरकार में समाज कल्याण विभाग के राज्य मंत्री भी हैं। दुद्धी विधायक के जेल जाने के बाद से यह पद रिक्त है।
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दो फरवरी से शुरू हुए बजट सत्र के आठ दिनों की कार्यवाही में जिले के तीनों विधायकों की सदन में उपस्थिति दर्शक के रूप में ही रही है। किसी ने भी जिले की किसी समस्या को न सदन में उठाया और न ही सरकार से कोई सवाल पूछा। सिर्फ घोरावल विधायक डॉ. अनिल कुमार मौर्य ने दो सवाल रखे थे।
इसमें भी खेल विभाग से जुड़ा एक सवाल कानपुर का था तो दूसरा उच्च शिक्षा से संबंधित मेरठ के एक कॉलेज का। पूर्वांचल के आजमगढ़, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, मिर्जापुर, जौनपुर, मऊ सहित अन्य जिलों के जनप्रतिनिधियों ने इस मामले में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए अपने क्षेत्र के मुद्दों को सदन में उठाने और सवाल पूछने में बढ़-चढ़कर योगदान दिया, मगर सोनांचल के जनप्रतिनिधियों ने इसमें कोई रूचि नहीं दिखाई।
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दो साल में चार सवाल कोई अपने जिले का नहीं
अट्ठारहवीं विधानसभा के गठन के दो साल पूरे होने को हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा की सरकारी वेबसाइट पर गौर करें तो इस अवधि में जिले के एक विधायक की ओर से ही चार सवाल पूछे गए हैं। विडंबना है कि इसमें कोई भी मामला सोनभद्र से जुड़ा नहीं है। अन्य दो विधायकों ने तो दो साल के कार्यकाल में किसी भी मुद्दे पर सवाल करने की जरुरत ही नहीं समझी।
यह पूछे गए सवाल
घोरावल विधायक डाॅ. अनिल कुमार मौर्य ने इस सत्र में दो सवाल रखे। पहला सवाल आईजीआरएस पोर्टल पर मेरठ कॉलेज के प्रवक्ता यदुवीर सिंह के चयन संबंधी शिकायत पर कार्रवाई के बारे में है। वहीं दूसरा सवाल ग्रीन पार्क स्टेडियम में यूपीपीएल की ओर से आयोजित प्रतियोगिता में टेंट आदि के भुगतान को लेकर किया था। बजट सत्र से पहले उन्होंने पिछले सत्रों में भी दो सवाल पूछे थे। इसमें पंचायती राज विभाग का मामला बांदा जिले की एक महिला सफाईकर्मी के भुगतान में अनियमितता से जुड़ा था, जबकि दूसरा मामला कानपुर नगर की सदर तहसील में चारागाह की भूमि पर अवैध कब्जे से जुड़ा था।
सदन में उठाए जा सकते थे यह मुद्दे
देश के अति पिछड़े जिलों में शामिल सोनभद्र में ऐसे कई मुद्दे हैं, जिन्हें सदन में रखा जा सकता है। इसमें खनन, परिवहन, स्थानीय युवाओं के रोजगार, स्कूलों की बदहाल स्थिति, शिक्षकों के रिक्त पद, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी समस्याएं, सड़क, बिजली, पानी, नेटवर्क जैसी सुविधाओं को पहुंचाने में आ रही अड़चनों सहित अन्य मामलों को सवाल के माध्यम से सरकार के संज्ञान में लाया जा सकता है।
सदर विधायक भूपेश चौबे का कहना है कि इस बार बजट सत्र में जनपद मुख्यालय का नाम राबर्ट्सगंज से बदलकर सोनभद्र नगर करने, पन्नूगंज रोड पर रेलवे क्रॉसिंग निर्माण, नगवां और कोन क्षेत्र में वर्षा जल को संचित कर सिंचाई व्यवस्था सुदृढ़ कराने, तेलगुड़वा से झारखंड बार्डर तक संपर्क मार्ग की मरम्मत, कोन-विंढमगंज मार्ग का नवीनीकरण, राजकीय महाविद्यालय नगवां में पीजी कॉलेज को आरंभ कराने, मुसहर-वनटांगिया की तरह धांगर, भुइयां जाति को भी मुख्यमंत्री आवास योजना से लाभान्वित करने सहित अन्य मांगों को रखा गया है।
घोरावल विधायक डॉ. अनिल कुमार मौर्या का कहना है कि विधानसभा क्षेत्र में लंबित रैया और रैपुरा बंधी के निर्माण की मांग उठाई गई। इससे संबंधित पत्र भी मुख्यमंत्री को सौंपा गया। वर्ष 2019 में रैया बंधी और रैपुरा बंधी का शिलान्यास हुआ था। इन दोनों बंधियों को तकनीकी स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है। व्यय वित्त समिति की ओर से अनुमोदन नहीं होने से दोनों बंधियों का कार्य रुका हुआ है। इसके अलावा ग्राम मुड़िलाडीह में बेलन नदी, ग्राम धुरकरी में बकहर नदी और ग्राम अहरौरा में बेलन नदी पर पुलिया निर्माण को शीघ्र पूरा कराने की मांग भी की गई है।
ओबरा विधायक संजीव सिंह गोंड का कहना है कि डबल इंजन की सरकार जिले के समग्र विकास के लिए लगातार काम कर रही है। इस बार बजट में भी इसका ध्यान रखते हुए अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। समाज कल्याण विभाग से संचालित विभिन्न योजनाओं में बजट बढ़ाया गया है। जिले के गरीब, आदिवासी वर्ग को इन योजनाओं का लाभ मिल रहा है। विधानसभा क्षेत्र में कई पुल, सड़क, विद्यालय, छात्रावास की मांग की थी, जिसे पूरा किया गया है। इस बार भी सदन में मीतापुर-कटगरा में सोन नदी पर पुल बनाने की मांग रखी है।
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क्षेत्र में जनता के सामने गरजने वाले नेता सदन में जनता से जुड़े सवालों पर पूरी तरह मौन रहे। पूरे सत्र में जिले के किसी मुद्दे या समस्या पर किसी भी सदस्य ने कोई सवाल नहीं उठाया। घोरावल विधायक ने अतारांकित श्रेणी में दो सवाल पूछे भी, मगर उनका जिले से कोई जुड़ाव ही नहीं था।
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चार विधानसभा सीटों से मौजूदा समय में तीन विधायक सदन में जिले का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इसमें ओबरा विधायक संजीव सिंह गोंड प्रदेश सरकार में समाज कल्याण विभाग के राज्य मंत्री भी हैं। दुद्धी विधायक के जेल जाने के बाद से यह पद रिक्त है।
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दो फरवरी से शुरू हुए बजट सत्र के आठ दिनों की कार्यवाही में जिले के तीनों विधायकों की सदन में उपस्थिति दर्शक के रूप में ही रही है। किसी ने भी जिले की किसी समस्या को न सदन में उठाया और न ही सरकार से कोई सवाल पूछा। सिर्फ घोरावल विधायक डॉ. अनिल कुमार मौर्य ने दो सवाल रखे थे।
इसमें भी खेल विभाग से जुड़ा एक सवाल कानपुर का था तो दूसरा उच्च शिक्षा से संबंधित मेरठ के एक कॉलेज का। पूर्वांचल के आजमगढ़, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, मिर्जापुर, जौनपुर, मऊ सहित अन्य जिलों के जनप्रतिनिधियों ने इस मामले में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए अपने क्षेत्र के मुद्दों को सदन में उठाने और सवाल पूछने में बढ़-चढ़कर योगदान दिया, मगर सोनांचल के जनप्रतिनिधियों ने इसमें कोई रूचि नहीं दिखाई।
दो साल में चार सवाल कोई अपने जिले का नहीं
अट्ठारहवीं विधानसभा के गठन के दो साल पूरे होने को हैं। उत्तर प्रदेश विधानसभा की सरकारी वेबसाइट पर गौर करें तो इस अवधि में जिले के एक विधायक की ओर से ही चार सवाल पूछे गए हैं। विडंबना है कि इसमें कोई भी मामला सोनभद्र से जुड़ा नहीं है। अन्य दो विधायकों ने तो दो साल के कार्यकाल में किसी भी मुद्दे पर सवाल करने की जरुरत ही नहीं समझी।
यह पूछे गए सवाल
घोरावल विधायक डाॅ. अनिल कुमार मौर्य ने इस सत्र में दो सवाल रखे। पहला सवाल आईजीआरएस पोर्टल पर मेरठ कॉलेज के प्रवक्ता यदुवीर सिंह के चयन संबंधी शिकायत पर कार्रवाई के बारे में है। वहीं दूसरा सवाल ग्रीन पार्क स्टेडियम में यूपीपीएल की ओर से आयोजित प्रतियोगिता में टेंट आदि के भुगतान को लेकर किया था। बजट सत्र से पहले उन्होंने पिछले सत्रों में भी दो सवाल पूछे थे। इसमें पंचायती राज विभाग का मामला बांदा जिले की एक महिला सफाईकर्मी के भुगतान में अनियमितता से जुड़ा था, जबकि दूसरा मामला कानपुर नगर की सदर तहसील में चारागाह की भूमि पर अवैध कब्जे से जुड़ा था।
सदन में उठाए जा सकते थे यह मुद्दे
देश के अति पिछड़े जिलों में शामिल सोनभद्र में ऐसे कई मुद्दे हैं, जिन्हें सदन में रखा जा सकता है। इसमें खनन, परिवहन, स्थानीय युवाओं के रोजगार, स्कूलों की बदहाल स्थिति, शिक्षकों के रिक्त पद, स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी समस्याएं, सड़क, बिजली, पानी, नेटवर्क जैसी सुविधाओं को पहुंचाने में आ रही अड़चनों सहित अन्य मामलों को सवाल के माध्यम से सरकार के संज्ञान में लाया जा सकता है।
सदर विधायक भूपेश चौबे का कहना है कि इस बार बजट सत्र में जनपद मुख्यालय का नाम राबर्ट्सगंज से बदलकर सोनभद्र नगर करने, पन्नूगंज रोड पर रेलवे क्रॉसिंग निर्माण, नगवां और कोन क्षेत्र में वर्षा जल को संचित कर सिंचाई व्यवस्था सुदृढ़ कराने, तेलगुड़वा से झारखंड बार्डर तक संपर्क मार्ग की मरम्मत, कोन-विंढमगंज मार्ग का नवीनीकरण, राजकीय महाविद्यालय नगवां में पीजी कॉलेज को आरंभ कराने, मुसहर-वनटांगिया की तरह धांगर, भुइयां जाति को भी मुख्यमंत्री आवास योजना से लाभान्वित करने सहित अन्य मांगों को रखा गया है।
घोरावल विधायक डॉ. अनिल कुमार मौर्या का कहना है कि विधानसभा क्षेत्र में लंबित रैया और रैपुरा बंधी के निर्माण की मांग उठाई गई। इससे संबंधित पत्र भी मुख्यमंत्री को सौंपा गया। वर्ष 2019 में रैया बंधी और रैपुरा बंधी का शिलान्यास हुआ था। इन दोनों बंधियों को तकनीकी स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है। व्यय वित्त समिति की ओर से अनुमोदन नहीं होने से दोनों बंधियों का कार्य रुका हुआ है। इसके अलावा ग्राम मुड़िलाडीह में बेलन नदी, ग्राम धुरकरी में बकहर नदी और ग्राम अहरौरा में बेलन नदी पर पुलिया निर्माण को शीघ्र पूरा कराने की मांग भी की गई है।
ओबरा विधायक संजीव सिंह गोंड का कहना है कि डबल इंजन की सरकार जिले के समग्र विकास के लिए लगातार काम कर रही है। इस बार बजट में भी इसका ध्यान रखते हुए अनुसूचित जाति, जनजाति वर्ग के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं। समाज कल्याण विभाग से संचालित विभिन्न योजनाओं में बजट बढ़ाया गया है। जिले के गरीब, आदिवासी वर्ग को इन योजनाओं का लाभ मिल रहा है। विधानसभा क्षेत्र में कई पुल, सड़क, विद्यालय, छात्रावास की मांग की थी, जिसे पूरा किया गया है। इस बार भी सदन में मीतापुर-कटगरा में सोन नदी पर पुल बनाने की मांग रखी है।