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पर्यटन के लिए संवरेगी ओंकारेश्वर घाटी
सोनभद्र
Updated Thu, 03 Nov 2016 11:23 PM IST
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मनोरम है यहां की प्राकृतिक छटा
- फोटो : AmarUjala
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प्रकृति की अनूठी सौगात तथा कैमूर-विंध्य पहाड़ी शृंखला के अंतिम छोरों के बीच स्थित ओंकारश्वर घाटी और यहां स्थित महा मंगलेश्वर धाम को पर्यटन की दृष्टि से सजाया-संवारा जाएगा। नए साल में कार्य के लिए बनाई जा रही कार्ययोजना में इसे शामिल कर लिया गया है। योजना को अंतिम रूप देने के लिए जल्द ही पर्यटन अधिकारियों की एक टीम यहां दौरा करेगी।
धार्मिक, पौराणिक और प्राकृतिक अजूबे की दृष्टि से जिले की धरा काफी कुछ रहस्य समेटे है। दुनिया का अजूबा और सबसे प्राचीन फासिल्स यहां बहुतायत मात्रा में तो है ही, कैमूर पहाड़ी श्रृंखला के अंतिम छोर पर, सोन नदी के किनारे, समुद्र तल से करीब दो हजार फीट ऊंचाई पर सीधे खड़े पहाड़ में पूरी तरह से ऊॅं की बनी आकृति किसी अजूबे से कम नहीं है।
यहां पहुंचने के बाद सामने दिखता सोन, रेणु और विजुल नदी का संगम और सूर्योदय-सूर्यास्त का दिखता विहंगम दृश्य पल भर में मंत्रमुगध कर देता है। आस्था का केंद्र इस घाटी में रोमांच की दृष्टि से भी प्रकृति ने काफी कुछ दे रखा है। कई किमी पहाड़ी तथा जंगली रास्ते के साथ, कदम-कदम पर जोखिम के साथ रोमांच भरा सफर यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को ऊर्जा से भर देता है।
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ओंकारेश्वर घाटी के पहाड़ पर महामंगलेश्वर के रूप में स्थापित प्राचीन शिवलिंग के दर्शन के लिए सावन में पूरे माह भक्तों का रेला लगा रहता है। मेले का भी आयोजन होता है। उधर, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी वाराणसी रवींद्र सिंह ने बताया कि स्थल के बारे में जानकारी मिली है। विभागीय कार्ययोजना में भी इसे शामिल कर लिया गया है। जल्द ही महकमे की एक टीम वहां भेजकर कार्ययोजना को अंतिम रूप देते हुए, बजट मंजूरी के लिए प्रस्ताव शासन को भेज दिया जाएगा।
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धार्मिक, पौराणिक और प्राकृतिक अजूबे की दृष्टि से जिले की धरा काफी कुछ रहस्य समेटे है। दुनिया का अजूबा और सबसे प्राचीन फासिल्स यहां बहुतायत मात्रा में तो है ही, कैमूर पहाड़ी श्रृंखला के अंतिम छोर पर, सोन नदी के किनारे, समुद्र तल से करीब दो हजार फीट ऊंचाई पर सीधे खड़े पहाड़ में पूरी तरह से ऊॅं की बनी आकृति किसी अजूबे से कम नहीं है।
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यहां पहुंचने के बाद सामने दिखता सोन, रेणु और विजुल नदी का संगम और सूर्योदय-सूर्यास्त का दिखता विहंगम दृश्य पल भर में मंत्रमुगध कर देता है। आस्था का केंद्र इस घाटी में रोमांच की दृष्टि से भी प्रकृति ने काफी कुछ दे रखा है। कई किमी पहाड़ी तथा जंगली रास्ते के साथ, कदम-कदम पर जोखिम के साथ रोमांच भरा सफर यहां आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को ऊर्जा से भर देता है।
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ओंकारेश्वर घाटी के पहाड़ पर महामंगलेश्वर के रूप में स्थापित प्राचीन शिवलिंग के दर्शन के लिए सावन में पूरे माह भक्तों का रेला लगा रहता है। मेले का भी आयोजन होता है। उधर, क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी वाराणसी रवींद्र सिंह ने बताया कि स्थल के बारे में जानकारी मिली है। विभागीय कार्ययोजना में भी इसे शामिल कर लिया गया है। जल्द ही महकमे की एक टीम वहां भेजकर कार्ययोजना को अंतिम रूप देते हुए, बजट मंजूरी के लिए प्रस्ताव शासन को भेज दिया जाएगा।