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ओबरा काॅलेज में अधिभार बहाली हुई तो आंदोलन
अमर उजाला संवाददाता, सोनभद्र
Updated Sun, 05 Jul 2015 10:54 PM IST
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ओबरा डिग्री कालेज के छात्रों की बैठक रविवार को राबर्ट्सगंज के रामजानकी मंदिर पर हुई। इसमें डिग्री कालेज में अधिभार बहाली की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन पर विरोध जताया गया।
चेताया गया कि यदि महाविद्यालय प्रशासन किसी दबाव में अधिभार बहाल करता है तो इसका विरोध कर बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे छात्र नेता राधेश्याम ने कहा कि राजकीय महाविद्यालय ओबरा में अधिभार बहाली की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे छात्र नेताओं को ओछी राजनीति से बाज आना चाहिए।
उन्हें क्षेत्र विशेष की नहीं बल्कि समूचे जनपद के हित की बात करनी चाहिए। राधेश्याम ने कहा कि आंदोलन का समर्थन कर रहे राजनीतिक दलों के नेताओं को छात्रों के प्रकरण में इस तरह से नहीं कूदना चाहिए।
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विक्रम सिंह और आकाश कुमार ने कहा कि ओबरा डिग्री कालेज के प्राचार्य ने भेदभाव मिटाते हुए समूचे जिले के छात्रों के हित को ध्यान में रखकर अधिभार समाप्त करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
लेकिन कुछ तथाकथित नेताओं और विभिन्न छात्र संगठनों के पदाधिकारियों द्वारा बेवजह मामले में राजनीति की जा रही है। इसको लेकर जिले भर के छात्रों में नाराजगी है। कहा कि प्राचार्य का यह निर्णय स्वागत योग्य है और समूचे जिले के हित में है।
राजनीति दबाव के चलते यदि यह निर्णय वापस लिया जाता है तो जिले के विभिन्न हिस्सों में उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रशासन और महाविद्यालय प्रशासन की होगी।
बैठक में इरफान इदरीसी, आयुस कुमार, विशाल सोनी, दीपक प्रजापति, अमिनेष मौर्य, रमाकांत मौर्य, शमशेर खां, रमेश यादव, सूर्यप्रकाश, सत्यम मिश्रा, धर्मेंद्र सोनी, राजेश सिंह मौजूद रहे।
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चेताया गया कि यदि महाविद्यालय प्रशासन किसी दबाव में अधिभार बहाल करता है तो इसका विरोध कर बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे छात्र नेता राधेश्याम ने कहा कि राजकीय महाविद्यालय ओबरा में अधिभार बहाली की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे छात्र नेताओं को ओछी राजनीति से बाज आना चाहिए।
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उन्हें क्षेत्र विशेष की नहीं बल्कि समूचे जनपद के हित की बात करनी चाहिए। राधेश्याम ने कहा कि आंदोलन का समर्थन कर रहे राजनीतिक दलों के नेताओं को छात्रों के प्रकरण में इस तरह से नहीं कूदना चाहिए।
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विक्रम सिंह और आकाश कुमार ने कहा कि ओबरा डिग्री कालेज के प्राचार्य ने भेदभाव मिटाते हुए समूचे जिले के छात्रों के हित को ध्यान में रखकर अधिभार समाप्त करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है।
लेकिन कुछ तथाकथित नेताओं और विभिन्न छात्र संगठनों के पदाधिकारियों द्वारा बेवजह मामले में राजनीति की जा रही है। इसको लेकर जिले भर के छात्रों में नाराजगी है। कहा कि प्राचार्य का यह निर्णय स्वागत योग्य है और समूचे जिले के हित में है।
राजनीति दबाव के चलते यदि यह निर्णय वापस लिया जाता है तो जिले के विभिन्न हिस्सों में उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी जिला प्रशासन और महाविद्यालय प्रशासन की होगी।
बैठक में इरफान इदरीसी, आयुस कुमार, विशाल सोनी, दीपक प्रजापति, अमिनेष मौर्य, रमाकांत मौर्य, शमशेर खां, रमेश यादव, सूर्यप्रकाश, सत्यम मिश्रा, धर्मेंद्र सोनी, राजेश सिंह मौजूद रहे।