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ओबरा और दुद्धी सीट पर फैसला सुरक्षित
अमर उजाला ब्यूरो/सोनभद्र
Updated Fri, 03 Feb 2017 10:08 PM IST
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हाईकोर्ट ने ओबरा और दुद्धी विधानसभा सीटों को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित करने के खिलाफ दाखिल याचिका पर अपना निर्णय सुरक्षित कर लिया है। आठ फरवरी को इस पर निर्णय सुनाया जाएगा। इस मामले में पक्षकारों के बीच लंबी बहस चली। याचिका में निर्वाचन आयोग की ओर से बिना अधिसूचना जारी की गई सीट को आरक्षित करने की वैधता को चुनौती दी गई है। इस मामले को न्यायमूर्ति वीके शुक्ल और न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा की पीठ सुनवाई कर रही है।
याचिका में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग को सीट आरक्षित करने का अधिकार नहीं है। सिर्फ केंद्र सरकार को यह अधिकार प्राप्त है। वर्ष 2013 में जारी अध्यादेश के आधार पर सीटें आरक्षित की गई थीं और यह अध्यादेश छह माह बाद समाप्त हो गया। दोबारा ऐसा कोई अध्यादेश केंद्र सरकार की ओर से नहीं जारी किया गया। सरकार ने निर्वाचन आयोग को ऐसा कोई अधिकार भी नहीं दिया है। निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता का कहना था कि आयोग को सीटों के परिसीमन और आरक्षण का अधिकार प्राप्त है। दोनों सीटें नियमानुसार ही आरक्षित की गई हैं। बता दें, पहले ओबरा सीट सामान्य और दुद्धी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। बाद में दोनों सीटों को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कर दिया गया।
याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता का तर्क था कि संविधान की अनुच्छेद 82 और 170 के तहत राष्ट्रपतीय आदेश जरूरी है। गत फरवरी और अप्रैल में औड़ी निवासी पंकज मिश्रा को आरटीआई से दिए जवाब में चुनाव आयोग ने इसे स्वीकारा भी है। प्रकरण पर दो और तीन फरवरी को लगातार सुनवाई की गई। अधिवक्ता छाया गुप्ता के मुताबिक कोर्ट ने आठ फरवरी को फैसला सुनाने की बात कही है।
याचिका में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग को सीट आरक्षित करने का अधिकार नहीं है। सिर्फ केंद्र सरकार को यह अधिकार प्राप्त है। वर्ष 2013 में जारी अध्यादेश के आधार पर सीटें आरक्षित की गई थीं और यह अध्यादेश छह माह बाद समाप्त हो गया। दोबारा ऐसा कोई अध्यादेश केंद्र सरकार की ओर से नहीं जारी किया गया। सरकार ने निर्वाचन आयोग को ऐसा कोई अधिकार भी नहीं दिया है। निर्वाचन आयोग के अधिवक्ता का कहना था कि आयोग को सीटों के परिसीमन और आरक्षण का अधिकार प्राप्त है। दोनों सीटें नियमानुसार ही आरक्षित की गई हैं। बता दें, पहले ओबरा सीट सामान्य और दुद्धी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित थी। बाद में दोनों सीटों को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कर दिया गया।
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याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता का तर्क था कि संविधान की अनुच्छेद 82 और 170 के तहत राष्ट्रपतीय आदेश जरूरी है। गत फरवरी और अप्रैल में औड़ी निवासी पंकज मिश्रा को आरटीआई से दिए जवाब में चुनाव आयोग ने इसे स्वीकारा भी है। प्रकरण पर दो और तीन फरवरी को लगातार सुनवाई की गई। अधिवक्ता छाया गुप्ता के मुताबिक कोर्ट ने आठ फरवरी को फैसला सुनाने की बात कही है।
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