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2017 जैसी प्रचंड जीत नहीं, अबकी कड़ी टक्कर

Wed, 09 Mar 2022 11:28 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Wed, 09 Mar 2022 11:28 PM IST
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Not a huge victory like 2017 but now it's a tough competition
विधानसभा चुनाव के नतीजे दस मार्च को सबके सामने आ जाएंगे। इससे पहले चुनाव परिणाम को लेकर लोग तरह-तरह के दावे कर रहे हैं। कोई एग्जिट पोल को झुठला रहा है तो कोई परिणाम भी इसी के अनुसार ही होने की दलील दे रहा है। इन सबसे इतर मतदान प्रतिशत का आंकड़ा कुछ और ही कह रहा है। किसी भी सीट पर वर्ष 2017 जैसी प्रचंड जीत जैसा हाल नहीं है। पिछले चुनावों के आधार पर इस बार हुए मतदान के प्रतिशत पर गौर फरमाएं तो मुकाबला बेहद करीबी होने की ही संभावना है। ऐसे में जीत-हार का सटीक आंकलन मुश्किल है।
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वर्ष 2012 के चुनाव पर गौर करें तो उस वक्त जिले में 58.22 प्रतिशत वोट पड़े थे। दो सीटों पर सपा और एक पर बसपा जीती थी। दुद्धी सीट निर्दलीय के खाते में गई थी। इस चुनाव में सबसे बड़ी जीत घोरावल में सपा के रमेश दुबे को मिली थी जिन्होंने 15,187 मतों के अंतर से बसपा के अनिल मौर्य को हराया था। वहीं सबसे कम अंतर पर हार-जीत दुद्धी में हुई थी। निर्दल प्रत्याशी रूबी 6039 वोटों के अंतर से सपा प्रत्याशी नरेश कुमार को हराकर विधायक बनी थीं। राबर्ट्सगंज में 5341 और ओबरा में 7060 वोटों का अंतर रहा। इस मुकाबले में सपा और बसपा के बीच सीधी टक्कर थी। बस दुद्धी में मुकाबला निर्दलीय और सपा का था।
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वर्ष 2017 के चुुनाव में तत्कालीन सपा सरकार के खिलाफ प्रचंड मोदी लहर में भाजपा गठबंधन को जिले की चारों सीटें मिलीं। घोरावल में भाजपा प्रत्याशी अनिल मौर्य ने 1.14 लाख वोट पाकर करीब 57 हजार वोटों से सबसे बड़ी जीत हासिल की थी। सपा के रमेश दुबे 56 हजार वोटों के साथ दूसरे और बसपा 53 हजार वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रही। राबर्ट्सगंज में भूपेश चौबे ने भी 40538 वोटों के अंतर से बड़ी जीत दर्ज करते हुए सपा के अविनाश कुशवाहा को हराया था। अविनाश सिर्फ 49 हजार वोट पा सके तो बसपा ने भी 39 हजार वोट हासिल किए थे। कमोबेश यही हाल ओबरा का भी था। इस चुनाव में 61.23 प्रतिशत वोटिंग हुई थी। सबसे ज्यादा घोरावल में 65.15 तो दुद्धी में 63.76 प्रतिशत वोट पड़े थे। इन चुनावों की खास बात रही कि सरकार के खिलाफ अंडर करंट जनता में साफ दिख रहा था। इस बार माहौल बिलकुल अलग है। मतदान प्रतिशत में कमी आई है तो ज्यादातर मतदाताओं ने भी मौन होकर वोटिंग की है। पिछली बार की सीधी लड़ाई को बसपा ने त्रिकोणीय भी बनाया है। ऐसे में प्रत्याशियों को मिले वोटों के साथ जीत-हार का अंतर भी नजदीकी होना तय माना जा रहा है।
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लोकसभा में भी नहीं आई भाजपा के वोटों में कमी
वर्ष 2017 के बाद हुए लोकसभा चुनाव को सपा-बसपा ने मिलकर लड़ा था। भाजपा ने यह सीट अपना दल-एस गठबंधन के खाते में दी थी। कुल 57.33 प्रतिशत वोटिंग हुई। इसमें घोरावल में 60.74, राबर्ट्सगंज में 57.02, ओबरा में 46.25 और दुद्धी में 60.30 प्रतिशत वोट पड़े थे। चारों विस क्षेत्रों से अद-एस प्रत्याशी को 358005 वोट मिले थे जबकि सपा-बसपा के संयुक्त वोट भी 276701 तक ही पहुंच पाए थे। दो साल भी भाजपा-अद-एस प्रत्याशी को मिलने वाले वोटों में कोई खास अंतर नहीं आया था।
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