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Sonebhadra News: चार साल में 50 वर्ग किमी घटे सामान्य वन, झाड़ियां 14 फीसदी बढ़ीं
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प्रदेश में सबसे ज्यादा वन क्षेत्र वाले जिले में जंगल तेजी से घट रहे हैं। पिछले चार वर्षों में कुल 137 वर्ग किमी वन क्षेत्र कम हुआ है। सबसे ज्यादा कमी सामान्य और खुले वन में आई है।
वर्ष 2019 में सामान्य सघन वन का दायरा 967 वर्ग किमी था, जो भारतीय वन सर्वे की ताजा रिपोर्ट में घटकर 927 वर्ग किमी ही रह गया है। खुले वन में भी भारी गिरावट आई है। इसकी अपेक्षा झाड़ियों का दायरा बढ़ा है।
वर्ष 2019 में 28 प्रतिशत झाड़ियां दर्ज की गई, जो अब बढ़कर 42 प्रतिशत तक पहुंच गई। राहत की बात यह है कि अत्यंत सघन वन में लगातार वृद्धि हो रही है। कुल 6905 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैले सोनभद्र का दो तिहाई हिस्सा वन क्षेत्र है।
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यहां सोनभद्र, रेणुकूट और ओबरा के रूप में तीन वन प्रभाग स्थापित हैं। वनों की देखरेख का जिम्मा इन्हीं का है। इसके अलावा वन्य जीवों की देखभाल के लिए अलग से कैमूर वन्य जीव प्रभाग अलग से हैं।
वन कर्मचारियों की बड़ी संख्या होने के बाद भी वन क्षेत्रफल में लगातार गिरावट आ रही है। यह स्थिति तब है, जबकि पिछले तीन सालों में करीब चार करोड़ नए पौधे रोपे गए हैं। सिर्फ वर्ष 2024 में ही अभियान लगाकर 1.55 लाख पौधे लगाए गए हैं।
इससे पहले वर्ष 2023 में 1.39 लाख और वर्ष 2022 में भी तकरीबन 1.20 करोड़ पौधे रोपे गए थे। हर साल बड़ी संख्या में पौधरोपण के बाद भी वनों का घटता दायरा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
वन क्षेत्रफल का यह है हाल
वर्ष : कुल वन क्षेत्र: अत्यंत सघन वन: मध्यम सघन वन: खुले वन: झाड़ी
2019: 2540.29: 130: 967: 1443.29: 28.0
2021: 2436.75: 138.32: 940.62: 1357.81: 30.18
2023: 2407.87: 140.50: 927.26: 1340.11: 42.12
(नोट: आंकड़े वर्ग किमी और भारतीय वन सर्वे की रिपोर्ट पर आधारित हैं)
इसलिए घट रहे वन
मध्यम और खुले वन के पीछे बड़ी वजह उनकी सुरक्षा को लेकर लापरवाही है। संरक्षित क्षेत्रों में तो लगातार निगरानी और सख्ती के चलते वन सुरक्षित रह रहे हैं, लेकिन खुले क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई धड़ल्ले से चल रही है। रेणुकूट वन प्रभाग के अंतर्गत म्योरपुर, बीजपुर और बभनी थाना क्षेत्रों में पिछले एक साल में खैर, साखू, शीशम जैसे इमारती लकड़ियों की कटाई के कई मामले सामने आ चुके हैं, जबकि ज्यादातर मामलों में वन माफिया कटान के बाद लकड़ी को सुरक्षित निकालने में कामयाब रहते हैं। इसी तरह ओबरा और सोनभद्र वन प्रभाग में भी अवैध कटान के मामले लगातार आ रहे हैं। इसके अलावा नई सड़कों, परियोजनाओं के कारण भी पेड़ों की कटाई बड़ी संख्या में हुई है। इसके बदले नए पौधे भी लगाए गए हैं, लेकिन ज्यादातर जगहों पर देखरेख के अभाव में पेड़े बनने से पहले ही पौधे सूख गए।
वन महोत्सव में जहां लगे थे पौधे, वहां बचे सिर्फ ठूंठ
पर्यावरण संरक्षण के मकसद से सरकार ने जुलाई में वन महोत्सव के रूप में अभियान चलाकर पौधे लगवाए थे। इस अभियान के तहत जिले में 1.55 करोड़ पौधे विभिन्न विभागों के माध्यम से लगाए गए थे। वन विभाग को छोड़ दें तो ज्यादातर विभाग पौधे लगाकर भूल गए। समुचित देखभाल न होने से पौधों की जगह सिर्फ ठूंठ बची है। कई जगह तो वह भी नदारद हैं।
सोनभद्र के बाद इन जिलों में है सबसे ज्यादा वन क्षेत्र
पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा वन क्षेत्र सोनभद्र में है। इसका कुल क्षेत्रफल 2407 वर्ग किमी है। यह कुल क्षेत्रफल का 34 प्रतिशत है। दूसरे नंबर खीरी जनपद है, जहां वन क्षेत्र का दायरा 1234 वर्ग किमी है। इसके बाद मिर्जापुर में 736.91, पीलीभीत में 674.84 और चित्रकूट में 636.56 वर्ग किमी है। चंदौली, बलरामपुर, बहराइच, ललितपुर, महराजगंज में वन क्षेत्र अधिक हैं।
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वर्ष 2019 में सामान्य सघन वन का दायरा 967 वर्ग किमी था, जो भारतीय वन सर्वे की ताजा रिपोर्ट में घटकर 927 वर्ग किमी ही रह गया है। खुले वन में भी भारी गिरावट आई है। इसकी अपेक्षा झाड़ियों का दायरा बढ़ा है।
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वर्ष 2019 में 28 प्रतिशत झाड़ियां दर्ज की गई, जो अब बढ़कर 42 प्रतिशत तक पहुंच गई। राहत की बात यह है कि अत्यंत सघन वन में लगातार वृद्धि हो रही है। कुल 6905 वर्ग किमी क्षेत्रफल में फैले सोनभद्र का दो तिहाई हिस्सा वन क्षेत्र है।
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यहां सोनभद्र, रेणुकूट और ओबरा के रूप में तीन वन प्रभाग स्थापित हैं। वनों की देखरेख का जिम्मा इन्हीं का है। इसके अलावा वन्य जीवों की देखभाल के लिए अलग से कैमूर वन्य जीव प्रभाग अलग से हैं।
वन कर्मचारियों की बड़ी संख्या होने के बाद भी वन क्षेत्रफल में लगातार गिरावट आ रही है। यह स्थिति तब है, जबकि पिछले तीन सालों में करीब चार करोड़ नए पौधे रोपे गए हैं। सिर्फ वर्ष 2024 में ही अभियान लगाकर 1.55 लाख पौधे लगाए गए हैं।
इससे पहले वर्ष 2023 में 1.39 लाख और वर्ष 2022 में भी तकरीबन 1.20 करोड़ पौधे रोपे गए थे। हर साल बड़ी संख्या में पौधरोपण के बाद भी वनों का घटता दायरा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है।
वन क्षेत्रफल का यह है हाल
वर्ष : कुल वन क्षेत्र: अत्यंत सघन वन: मध्यम सघन वन: खुले वन: झाड़ी
2019: 2540.29: 130: 967: 1443.29: 28.0
2021: 2436.75: 138.32: 940.62: 1357.81: 30.18
2023: 2407.87: 140.50: 927.26: 1340.11: 42.12
(नोट: आंकड़े वर्ग किमी और भारतीय वन सर्वे की रिपोर्ट पर आधारित हैं)
इसलिए घट रहे वन
मध्यम और खुले वन के पीछे बड़ी वजह उनकी सुरक्षा को लेकर लापरवाही है। संरक्षित क्षेत्रों में तो लगातार निगरानी और सख्ती के चलते वन सुरक्षित रह रहे हैं, लेकिन खुले क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई धड़ल्ले से चल रही है। रेणुकूट वन प्रभाग के अंतर्गत म्योरपुर, बीजपुर और बभनी थाना क्षेत्रों में पिछले एक साल में खैर, साखू, शीशम जैसे इमारती लकड़ियों की कटाई के कई मामले सामने आ चुके हैं, जबकि ज्यादातर मामलों में वन माफिया कटान के बाद लकड़ी को सुरक्षित निकालने में कामयाब रहते हैं। इसी तरह ओबरा और सोनभद्र वन प्रभाग में भी अवैध कटान के मामले लगातार आ रहे हैं। इसके अलावा नई सड़कों, परियोजनाओं के कारण भी पेड़ों की कटाई बड़ी संख्या में हुई है। इसके बदले नए पौधे भी लगाए गए हैं, लेकिन ज्यादातर जगहों पर देखरेख के अभाव में पेड़े बनने से पहले ही पौधे सूख गए।
वन महोत्सव में जहां लगे थे पौधे, वहां बचे सिर्फ ठूंठ
पर्यावरण संरक्षण के मकसद से सरकार ने जुलाई में वन महोत्सव के रूप में अभियान चलाकर पौधे लगवाए थे। इस अभियान के तहत जिले में 1.55 करोड़ पौधे विभिन्न विभागों के माध्यम से लगाए गए थे। वन विभाग को छोड़ दें तो ज्यादातर विभाग पौधे लगाकर भूल गए। समुचित देखभाल न होने से पौधों की जगह सिर्फ ठूंठ बची है। कई जगह तो वह भी नदारद हैं।
सोनभद्र के बाद इन जिलों में है सबसे ज्यादा वन क्षेत्र
पूरे प्रदेश में सबसे ज्यादा वन क्षेत्र सोनभद्र में है। इसका कुल क्षेत्रफल 2407 वर्ग किमी है। यह कुल क्षेत्रफल का 34 प्रतिशत है। दूसरे नंबर खीरी जनपद है, जहां वन क्षेत्र का दायरा 1234 वर्ग किमी है। इसके बाद मिर्जापुर में 736.91, पीलीभीत में 674.84 और चित्रकूट में 636.56 वर्ग किमी है। चंदौली, बलरामपुर, बहराइच, ललितपुर, महराजगंज में वन क्षेत्र अधिक हैं।