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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Sonebhadra News ›   no electricity supply in last village of UP in sonebhadra district even after india independence electric pole installed in 2013 but no wire

कब पूरा होगा सपना: यूपी के आखिरी गांव में अब तक नहीं पहुंची बिजली, 2013 में लगे थे खंभे, तार न होने से अधूरी रह गई हसरत

Mon, 31 Jan 2022 04:50 PM IST
उत्पल कांत अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र
अमर उजाला नेटवर्क, सोनभद्र Published by: उत्पल कांत Updated Mon, 31 Jan 2022 04:50 PM IST
सार

गांव-गांव बिजली पहुंचाने का सरकारी दावा भले ही हो, मगर जमीनी हकीकत कुछ और ही है। बिहार की सीमा से सटा यूपी का अति पिछड़ा गांव चौरा इसका नजीर है। यहां अब तक बिजली की आपूर्ति बहाल नहीं हो सकी है।

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no electricity supply in  last village of UP in sonebhadra district even after india independence electric pole  installed in 2013 but no wire
चौरा गांव में 2013 में लगे थे खंभे - फोटो : फाइल

विस्तार

इस चुनावी समर में हर तरफ विकास के दावे हो रहे हैं। सत्ता में रह चुके सभी अपनी-अपनी उपलब्धियां गिना रहे हैं मगर यूपी के आखिरी गांव के लोगों के सामने हर दावा खोखला है। यह वह गांव है, जहां आज तक बिजली की चमक नहीं पहुंच पाई है।

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सोनभद्र जिले के सदर विधानसभा क्षेत्र के चौरा गांव में काफी जद्दोजद के बाद वर्ष 2013 में खंभे तो लगा दिए गए लेकिन तार न होने से ग्रामीणों की बिजली देखने की हसरत अधूरी ही रह गई। महज चंद मीटर दूरी पर जब लोग बिहार के गांवों में रोशनी देखते हैं तो मन मसोस कर रह जाते हैं। केरोसिन का वितरण बंद होने के बाद उनकी दुश्वारी और बढ़ गई है।
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पहाड़ों से घिरा हुआ है गांव
चौरा नक्सल प्रभावित नगवां ब्लॉक के मड़पा ग्राम पंचायत का राजस्व गांव है। यह गांव चारों ओर पहाड़ों से घिरा हुआ है और बिहार की सीमा से सटा हुआ है। गांवों में विकास की तमाम योजनाएं पहुंचाने के वादे किए जाते रहे, लेकिन इस अंतिम छोर तक पहुंचने से पहले ही सारी योजनाएं दम तोड़ती रही हैं।

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गांव तक नहीं पहुंच सकी विकास की किरण

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चौरा गांव के ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
प्रदेश में चाहे बसपा की सरकार रही हो या सपा और भाजपा की, किसी भी सरकार में इस गांव तक विकास की किरण नहीं पहुंच सकी। गांव के रामजतन खरवार, सत्यनारायण सिंह और सुदामा सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि कई बार क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों और बिजली विभाग के अधिकारियों को गांव में बिजली की समस्या के संबंध में अवगत कराया गया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

ब्लॉक कार्यालय से करीब 45 किलोमीटर दूर इस गांव में जल्द अधिकारियों का आना-जाना नहीं होता है। इस वजह से भी वे अपनी समस्याओं से अधिकारियों से अवगत नहीं करा पाते हैं। ग्रामीणों की मानें तो वर्ष 2013 में गांव में बिजली के खंभे लगे थे लेकिन तार नहीं खींचा गया। इससे गांव में बल्ब जलाने का सपना साकार नहीं हो सका।

केरोसिन वितरण बंद कर दिए जाने के बाद से समस्या और बढ़ गई है। राबर्ट्सगंज खंड के एक्सईएन एसके सिंह ने कहा कि चौरा गांव में विद्युतीकरण के लिए सर्वे कराया गया है। आचार संहिता की वजह से काम शुरू नहीं हो सका। चुनाव बाद गांव में विद्युतीकरण करा दिया जाएगा।

एक-दो स्थान पर लगे हैं सोलर लाइट

चौरा गांव के कुछ लोग अपने घरों में सोलर लाइट लगवा रखे हैं। सोलर लाइट के जरिए मोबाइल चार्ज करते हैं। आसमान में बदली होने और बैटरी चार्ज न होने की स्थिति में प्रकाश की दिक्कत होती है। ग्रामीणों ने बिजली विभाग के अधिकारियों से विद्युतीकरण कराने की मांग की है। 

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