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प्रदूषण नियंत्रण का कौन सा तरीका होगा प्रभावी
ब्यूरो,अमर उजाला/सोनभद्र
Updated Wed, 04 May 2016 11:42 PM IST
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एनजीटी
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ऊर्जांचल में प्रदूषण के मसले पर सुनवाई कर रही एनजीटी ने माना है कि ऊर्जांचल में प्रदूषण की स्थिति भयावह है। इसको देखते हुए कोर कमेटी की ओर से सौंपी गई रिपोर्ट में दिए गए सुझावों के साथ ही अन्य कौन से तरीके प्रदूषण नियंत्रण के लिए प्रभावी होंगे ? एनजीटी ने इस पर बिंदुवार सुझाव मांगा है।
बताते चलें कि जेएन विश्वकर्मा और अश्वनी दुबे की याचिका के क्रम में कोर कमेटी गत बीस अगस्त को ही अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है और प्रदूषण की भयावहता बयां करते कई आंकड़े भी पेश किए हैं। कोर कमेटी की ओर से कई सुझाव भी दिए गए हैं, जिस पर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकार और उसके प्रतिनिधियों से अनुपालन रिपोर्ट और कार्ययोजना मांगी गई थी। सरकारों की ओर से रिपोर्ट और कार्ययोजना पेश कर दी गई है। हालांकि रिपोर्ट में कई बिंदु ऐसे हैं, जिसको लेकर याचिका कर्ताओं की ओर से आपत्ति जताई जा रही है। मंगलवार को इस मामले पर न्यायमूर्ति यूडी साल्वी की अगुवाई वाली बेंच ने सुनवाई की। दोनों पक्षों की बातों को सुनने के बाद बेंच ने माना कि प्रदूषण की स्थिति खराब है। अब इस पर प्रभावी नियंत्रण कैसे हो? इस पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। अधिवक्ता एमसी मेहता और राहुल शुक्ला के मुताबिक एनजीटी ने दोनों याचिकाकर्ताओं से प्रदूषण नियंत्रण के जरूरी सुझाव मांगे हैं। इसका और कोर कमेटी की रिपोर्ट दोनों का परिशीलन कर निर्णय सुनाया जाना है। मामले में अगली सुनवाई की तिथि पांच जुलाई नियत की गई है।
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बताते चलें कि जेएन विश्वकर्मा और अश्वनी दुबे की याचिका के क्रम में कोर कमेटी गत बीस अगस्त को ही अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है और प्रदूषण की भयावहता बयां करते कई आंकड़े भी पेश किए हैं। कोर कमेटी की ओर से कई सुझाव भी दिए गए हैं, जिस पर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकार और उसके प्रतिनिधियों से अनुपालन रिपोर्ट और कार्ययोजना मांगी गई थी। सरकारों की ओर से रिपोर्ट और कार्ययोजना पेश कर दी गई है। हालांकि रिपोर्ट में कई बिंदु ऐसे हैं, जिसको लेकर याचिका कर्ताओं की ओर से आपत्ति जताई जा रही है। मंगलवार को इस मामले पर न्यायमूर्ति यूडी साल्वी की अगुवाई वाली बेंच ने सुनवाई की। दोनों पक्षों की बातों को सुनने के बाद बेंच ने माना कि प्रदूषण की स्थिति खराब है। अब इस पर प्रभावी नियंत्रण कैसे हो? इस पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। अधिवक्ता एमसी मेहता और राहुल शुक्ला के मुताबिक एनजीटी ने दोनों याचिकाकर्ताओं से प्रदूषण नियंत्रण के जरूरी सुझाव मांगे हैं। इसका और कोर कमेटी की रिपोर्ट दोनों का परिशीलन कर निर्णय सुनाया जाना है। मामले में अगली सुनवाई की तिथि पांच जुलाई नियत की गई है।
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