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होनहारों को जरूरत है द्रोणाचार्य की
ब्यूरो/ अमर उजाला /सोनभद्र
Updated Sat, 09 Apr 2016 12:02 AM IST
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तियरा स्टेडियम में तीरंदाजी का प्रशिक्षण लेते प्रतिभागी
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जिले के तियरा स्टेडियम में राज्य के कई जिलों के बच्चे तीरंदाजी का प्रशिक्षण तो ले रहे हैं, मगर उन्हें एक द्रोणाचार्य की जरूरत है। दक्षिणांचल के इलाकों में आदिवासी बच्चे तीर-धनुष से चिड़ियों और मछलियों का शिकार करते हैं। यदि ये प्रशिक्षित हो जाएं तो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आर्चरी में जिले का नाम रोशन कर सकते हैं।
जंगल-पहाड़ों से आच्छादित इस जिले में आदिवासी बच्चे होश संभालने के साथ ही तीर-धनुष से लैस हो जाते हैं। इसे चलाने के लिए उन्हें किसी गुरु की भी तब जरूरत नहीं होती। कोटा ग्राम पंचायत से लगायत मध्य प्रदेश की सीमा से सटे ऐसे तमाम गांव हैं, जहां आदिवासी बच्चे बचपन से ही धनुर्विद्या में पारंगत हैं। बांस के कंचे से बने धनुष से आदिवासी जिस तरह से निशाना साधते हैं वह वाकई लाजवाब है।
जिले के तियरा स्टेडियम में तीरंदाजी प्रशिक्षण केंद्र संचालित होता है, जहां के प्रशिक्षि खिलाड़ी देश-विदेश में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। चोपन ब्लाक के कोटा ग्राम पंचायत के अबाड़ी क्षेत्र में कई बच्चे धनुष लेकर पक्षियों का शिकार करते नजर आते हैं। क्षेत्र में खेलने की कोई व्यवस्था नहीं है।
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हाल में ही चीन से खेलकर लौटे तीरंदाज विजय खरवार कहते हैं कि जिले में विभिन्न खेलों की प्रतिभाएं हैं। इनमें खासतौर पर तीरंदाजी से जुड़े खिलाड़ी हैं। उन्हें यदि प्रशिक्षित कर दिया जाए तो वे देश-विदेश में जिले का नाम रोशन करेंगे। जिला क्रीड़ाधिकारी केके पांडेय कहते हैं कि स्टेडियम में चुनिंदा तीरंदाजों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ब्लाक स्तरीय प्रतियोगिता में जो प्रतिभाशाली बच्चे चुनकर आते हैं उन्हें प्रशिक्षण देने का प्रयास होगा।
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जंगल-पहाड़ों से आच्छादित इस जिले में आदिवासी बच्चे होश संभालने के साथ ही तीर-धनुष से लैस हो जाते हैं। इसे चलाने के लिए उन्हें किसी गुरु की भी तब जरूरत नहीं होती। कोटा ग्राम पंचायत से लगायत मध्य प्रदेश की सीमा से सटे ऐसे तमाम गांव हैं, जहां आदिवासी बच्चे बचपन से ही धनुर्विद्या में पारंगत हैं। बांस के कंचे से बने धनुष से आदिवासी जिस तरह से निशाना साधते हैं वह वाकई लाजवाब है।
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जिले के तियरा स्टेडियम में तीरंदाजी प्रशिक्षण केंद्र संचालित होता है, जहां के प्रशिक्षि खिलाड़ी देश-विदेश में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। चोपन ब्लाक के कोटा ग्राम पंचायत के अबाड़ी क्षेत्र में कई बच्चे धनुष लेकर पक्षियों का शिकार करते नजर आते हैं। क्षेत्र में खेलने की कोई व्यवस्था नहीं है।
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हाल में ही चीन से खेलकर लौटे तीरंदाज विजय खरवार कहते हैं कि जिले में विभिन्न खेलों की प्रतिभाएं हैं। इनमें खासतौर पर तीरंदाजी से जुड़े खिलाड़ी हैं। उन्हें यदि प्रशिक्षित कर दिया जाए तो वे देश-विदेश में जिले का नाम रोशन करेंगे। जिला क्रीड़ाधिकारी केके पांडेय कहते हैं कि स्टेडियम में चुनिंदा तीरंदाजों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ब्लाक स्तरीय प्रतियोगिता में जो प्रतिभाशाली बच्चे चुनकर आते हैं उन्हें प्रशिक्षण देने का प्रयास होगा।