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Sonebhadra News: फिनो बैंक से एमओयू खत्म, अब राष्ट्रीयकृत बैंकों से जुड़ेंगी बीसी सखियां

Sun, 18 Oct 2026 12:47 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 18 Oct 2026 12:47 AM IST
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MoU with Fino Bank terminated; BC Sakhis will now be associated with nationalized banks.
सोनभद्र। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत ग्राम पंचायत स्तर पर बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराने वाली बीसी सखियां अब राष्ट्रीयकृत बैंकों से जुड़ेंगी। फिनो बैंक के साथ हुआ समझौता (एमओयू) जनवरी 2026 में समाप्त हो चुका है। नए बैंक के चयन के लिए भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), इंडियन बैंक और पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) के नाम शासन को भेजे गए हैं। राज्य कार्यालय स्तर से बैंक का चयन किया जाएगा। योजना के तहत ग्रामीणों को गांव में ही जमा-निकासी सहित अन्य बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जिले की 621 ग्राम पंचायतों में बीसी सखियों का चयन किया जाना था। ऑनलाइन आवेदन के आधार पर 526 ग्राम पंचायतों में बीसी सखियों का चयन कर उन्हें प्रशिक्षण दिया गया। हालांकि, प्रशिक्षण के बाद सभी महिलाएं काम से नहीं जुड़ी रहीं। विभाग के अनुसार, करीब 395 बीसी सखियों ने फिनो बैंक से डिवाइस लेकर बैंकिंग सेवाएं देना शुरू किया था।योजना की शर्तों के अनुसार, बेहतर काम करने वाली बीसी सखियों को शुरुआती छह महीने तक प्रतिमाह चार हजार रुपये मानदेय देने का प्रावधान था। इसके अलावा लेन-देन के आधार पर कमीशन भी दिया जाना था। हालांकि, कई बीसी सखियों ने मानदेय नहीं मिलने की शिकायत की। बकाया भुगतान की मांग को लेकर उन्होंने बीते दिनों विकास भवन में प्रदर्शन भी किया था। एनआरएलएम के जिला मिशन प्रबंधक पुनीत कुमार गुप्ता ने बताया कि फिनो बैंक के साथ एमओयू जनवरी 2026 में समाप्त हो गया है। नए बैंक के चयन के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। इसमें एसबीआई, इंडियन बैंक और पीएनबी के नाम प्रस्तावित किए गए हैं। राज्य कार्यालय स्तर से बैंक का निर्धारण होने के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। विभाग के अनुसार, काम शुरू करने वाली करीब 395 बीसी सखियों में से 250 को उनके काम के आधार पर मानदेय जारी किया गया। वहीं, करीब 145 बीसी सखियों को भुगतान नहीं मिला है। इससे उनमें असंतोष है। योजना के तहत पात्र बीसी सखियों को शुरुआती छह महीने तक प्रतिमाह चार हजार रुपये मानदेय देने का प्रावधान था। इसके अतिरिक्त लेन-देन के आधार पर कमीशन भी दिया जाना था।
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