मोरवा विस्थापन: मुआवजे के लिए यहां छह महीने में बनवा लिए 200 मकान, विस्थापन के जद में हैं 30 हजार परिवार
Sonbhadra News: मोरवा विस्थापन से पहले मुआवजे के लिए यहां पर छह महीने में 200 मकान बनवा लिए गए। यही नहीं किसी ने पक्की छत डाली है तो किसी ने टिन शेड डाला। कुछ ने तो टाइल्स और मार्बल भी लगवाए हैं।
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मोरवा विस्थापन की घोषणा के बाद स्थानीय लोगों की नींद उड़ी हुई है, मगर कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्होंने यहां भी अपना फायदा ढूंढ लिया है। पिछले 6-7 महीने में खाली जमीनों पर करीब 200 मकान बनाकर खड़े कर दिए हैं। किसी ने पक्की छत डाल दी है तो किसी ने टिन शेड लगा दिया है। पत्थर और टाइल्स भी लगवाए जा रहे हैं।
लोगों का कहना है कि इनका मकसद सिर्फ यह है कि जब मुआवजे के लिए भवन व जमीन का मूल्यांकन होगा तो उनको दोगुना पैसा मिलेगा। वहीं, इन नवनिर्मित मकानों पर ताले लटक रहे हैं। जयंत कोल परियोजना के विस्तार के लिए सिंगरौली नगर निगम के मोरवा जोन में बसे कुल 11 में से नौ वाडों का पूर्ण व आंशिक विस्थापन होना है। करीब 30 हजार परिवार विस्थापन की जद में हैं।
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एनसीएल ने करीब चार वर्ष पहले कोल वियरिंग एक्ट की धारा-4 (भूमि अधिग्रहण की मंशा जताना) का प्रकाशन किया था। इसके बाद धारा-7 (अधिग्रहण करने की शक्ति) और फरवरी 2024 में धारा-१ (अधिग्रहण की घोषणा) लागू की थी। इसके बाद भूमि के स्वरूप परिवर्तन पर भी रोक लग गई थी।
कोल बियरिंग एरिया एक्ट की धारा (१) लागू होने के बाद मेन सर्वे कराया गया है। फिजिकल सर्वे भी चल रहा है। मानक स्थापित किया जा चुका है। बाद के किसी भी अतिरिक्त कार्य के लिए मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं है। नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत जमीन का मूल्यांकन कर दोगुनी राशि दी जानी है। -रामविजय सिंह, प्रवक्ता, एनसीएल
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