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मोरवा विस्थापन: मुआवजे के लिए यहां छह महीने में बनवा लिए 200 मकान, विस्थापन के जद में हैं 30 हजार परिवार

Fri, 06 Jun 2025 09:45 AM IST
प्रगति चंद मनीष जायसवाल, सोनभद्र।
मनीष जायसवाल, सोनभद्र। Published by: प्रगति चंद Updated Fri, 06 Jun 2025 09:45 AM IST
सार

Sonbhadra News: मोरवा विस्थापन से पहले मुआवजे के लिए यहां पर छह महीने में 200 मकान बनवा लिए गए। यही नहीं किसी ने पक्की छत डाली है तो किसी ने टिन शेड डाला। कुछ ने तो टाइल्स और मार्बल भी लगवाए हैं। 

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Morwa displacement Update 200 houses built in six months for compensation in singrauli
छठ घाट के किनारे ढांचा बनाकर छोड़ा गया निर्माण। - फोटो : संवाद

विस्तार

मोरवा विस्थापन की घोषणा के बाद स्थानीय लोगों की नींद उड़ी हुई है, मगर कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्होंने यहां भी अपना फायदा ढूंढ लिया है। पिछले 6-7 महीने में खाली जमीनों पर करीब 200 मकान बनाकर खड़े कर दिए हैं। किसी ने पक्की छत डाल दी है तो किसी ने टिन शेड लगा दिया है। पत्थर और टाइल्स भी लगवाए जा रहे हैं।

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लोगों का कहना है कि इनका मकसद सिर्फ यह है कि जब मुआवजे के लिए भवन व जमीन का मूल्यांकन होगा तो उनको दोगुना पैसा मिलेगा। वहीं, इन नवनिर्मित मकानों पर ताले लटक रहे हैं। जयंत कोल परियोजना के विस्तार के लिए सिंगरौली नगर निगम के मोरवा जोन में बसे कुल 11 में से नौ वाडों का पूर्ण व आंशिक विस्थापन होना है। करीब 30 हजार परिवार विस्थापन की जद में हैं।
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एनसीएल ने करीब चार वर्ष पहले कोल वियरिंग एक्ट की धारा-4 (भूमि अधिग्रहण की मंशा जताना) का प्रकाशन किया था। इसके बाद धारा-7 (अधिग्रहण करने की शक्ति) और फरवरी 2024 में धारा-१ (अधिग्रहण की घोषणा) लागू की थी। इसके बाद भूमि के स्वरूप परिवर्तन पर भी रोक लग गई थी।

कोल बियरिंग एरिया एक्ट की धारा (१) लागू होने के बाद मेन सर्वे कराया गया है। फिजिकल सर्वे भी चल रहा है। मानक स्थापित किया जा चुका है। बाद के किसी भी अतिरिक्त कार्य के लिए मुआवजे का कोई प्रावधान नहीं है। नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत जमीन का मूल्यांकन कर दोगुनी राशि दी जानी है। -रामविजय सिंह, प्रवक्ता, एनसीएल

मेढ़ौली : रातों-रात बन गए करीब 40 मकान

Morwa displacement Update 200 houses built in six months for compensation in singrauli
मोरवा विस्थापन के जद में हैं ये् मकान - फोटो : अमर उजाला
करीब तीन महीने से एनसीएल भूमि अधिग्रहण के लिए नापी करा रहा है। नापी से पहले ही कई निर्माण कराए गए हैं। मेड़ौली में छठ घाट के किनारे एक साल पहले तक जमीन परती थी। लेकिन अब वहां पक्के दो मंजिला मकान बन चुके हैं। पिलर पर दीवारें खड़ी कर टिन की छत डाल दी गई है। कुछ को छत्त पक्की है। इन्हें देखकर ही निर्माण को अवधि का अनुमान लगाया जा सकता है। स्थानीय रहवासियों के मुताबिक, महज 5-6 माह पहले करीब 40 निर्माण हुए हैं। बाहर से 40-50 की संख्या में मजदूर और मशीनें लाकर दिन-रात काम कराया गया। इसी तरह बूढ़ी माई क्षेत्र में करीब 7-8 महीने में करीब 100 भवनों का निर्माण करा लिया गया है। पिछले एक साल के अंदर सैकड़ों निर्माण हुए हैं। शहर के अन्य क्षेत्रों में भी करोब 50-60 मकानों में निर्माण चल रहा है।

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