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कुलडोमरी में हैंडपंपों के पानी में अधिक नाइट्रेट
ब्यूरो/अमर उजाला/सोनभद्र
Updated Sat, 08 Apr 2017 11:23 PM IST
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प्रदेश की बड़ी ग्राम पंचायतों में से एक कुलडोमरी (भाठ क्षेत्र) के अधिकांश जलस्रोत विषाक्त हो गए हैं। इस ग्राम पंचायत के 18 गांवों/मजरों के 517 हैंडपंपों के पानी की लैब रिपोर्ट के जरिए सामने आए इस खुलासे ने हड़कंप मचा है। अधिकांश हैंडपंपों में नाइट्रेट की अत्यधिक मात्रा मिली है। ऐसे पानी के सेवन का सीधा मतलब है ब्लू बेबी सिंड्रोम, कैंसर जैसी बीमारियों को निमंत्रण। बावजूद अभी तक इस इलाके के लोग यही पानी पी रहे हैं।
जल निगम की यूनिसेफ शाखा ने कुलडोमरी ग्राम पंयायत के डिबुलगंज, मेडऱदह, लोझरा, बेनादह, दुगोड़वा, मनरहवा, बैरपान, सिदहवा, लोड, डैनिया, बीरनबहरा, खोडिय़ा, अमहवा, करहिया, गुलालीडीह गांव/मजरे के 517 हैंडपंपों की सैंपलिंग की थी। इनमें आधे से अधिक में नाइट्रेट की मात्रा (150 से 750 मिलीग्राम प्रति लीटर) है।
अधिकांश में यह मात्रा चार से पांच सौ मिलीग्राम है। जबकि भारतीय मानक ब्यूरो और राष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक यह दस से 45 मिलीग्राम ही होनी चाहिए। सामान्यतया नाइट्रेट की अत्यधिक मात्रा के लिए रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग एवं मल-मूत्र के अत्यधिक स्राव को कारण माना जाता है, लेकिन यहां परिस्थिति अलग है।
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खतरा केंद्र नई दिल्ली के निदेशक दुन्नू राय पुराने जलस्रोतों के सूखने और औद्योगिक स्राव की भूजल में बढ़ती मात्रा को कारण मानते हैं है। कहा कि जलसोत की रिचार्जिंग जरूरी है। वहीं जल निगम यूनिसेफ के एक्सईएन दिनेश कुमार का कहना था कि उच्चाधिकारियों को अवगत कराने के साथ ही प्रभावित एरिया में पाइपलाइन से पेयजल सप्लाई के लिए कार्ययोजना बनाकर भेजी गई है। नीति आयोग से मंजूरी मिलते ही काम शुरू हो जाएगा।
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जल निगम की यूनिसेफ शाखा ने कुलडोमरी ग्राम पंयायत के डिबुलगंज, मेडऱदह, लोझरा, बेनादह, दुगोड़वा, मनरहवा, बैरपान, सिदहवा, लोड, डैनिया, बीरनबहरा, खोडिय़ा, अमहवा, करहिया, गुलालीडीह गांव/मजरे के 517 हैंडपंपों की सैंपलिंग की थी। इनमें आधे से अधिक में नाइट्रेट की मात्रा (150 से 750 मिलीग्राम प्रति लीटर) है।
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अधिकांश में यह मात्रा चार से पांच सौ मिलीग्राम है। जबकि भारतीय मानक ब्यूरो और राष्ट्रीय स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक यह दस से 45 मिलीग्राम ही होनी चाहिए। सामान्यतया नाइट्रेट की अत्यधिक मात्रा के लिए रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग एवं मल-मूत्र के अत्यधिक स्राव को कारण माना जाता है, लेकिन यहां परिस्थिति अलग है।
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खतरा केंद्र नई दिल्ली के निदेशक दुन्नू राय पुराने जलस्रोतों के सूखने और औद्योगिक स्राव की भूजल में बढ़ती मात्रा को कारण मानते हैं है। कहा कि जलसोत की रिचार्जिंग जरूरी है। वहीं जल निगम यूनिसेफ के एक्सईएन दिनेश कुमार का कहना था कि उच्चाधिकारियों को अवगत कराने के साथ ही प्रभावित एरिया में पाइपलाइन से पेयजल सप्लाई के लिए कार्ययोजना बनाकर भेजी गई है। नीति आयोग से मंजूरी मिलते ही काम शुरू हो जाएगा।