{"_id":"57a233024f1c1be84f2b98cc","slug":"migrant-got-relief","type":"story","status":"publish","title_hn":"विस्थापितों को मिली राहत ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विस्थापितों को मिली राहत
ब्यूररो,अमर उजाला/सोनभद्र
Updated Wed, 03 Aug 2016 11:38 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
डिबुलगंज से अनपरा डी की तरफ जाने वाले रास्ते के आसपास मकान बनाकर रह रहे विस्थापितों को हाईकोर्ट ने राहत दी है। न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल और विपिन सिन्हा की बेंच ने कलीम शेख आदि की ओर से 29 जुलाई को दाखिल याचिका का मंगलवार को निस्तारण करते हुए कहा कि पहले प्रभावितों को पुनर्वास लाभ दें, इसके बाद परियोजना की जमीन से बेदखल करें।
अधिवक्ता अभिषेक कुमार चौबे के मुताबिक कलीम आदि का कहना था कि अनपरा परियोजना के निर्माण के समय उनकी जमीन ले ली गई लेकिन समुचित पुनर्वास नहीं दिया गया। बाद में परियोजना के ही एक अधिकारी ने प्लाट आवंटित होने तक डिबुलगंज स्थित परियोजना की जमीन पर बस जाने के लिए कहा।
कलीम का कहना था कि उनकी उम्र अस्सी वर्ष हो चुकी है। वह मस्जिद के पास वाली जमीन पर लंबे समय से परिवार के साथ आबाद हैं। अभी तक उनके प्लाट का मामला निस्तारित नहीं किया गया। अब उन्हें अतिक्रमणकारी बताकर हटाया जा रहा है। 14 जुलाई को परियोजना प्रबंधन की तरफ से नोटिस भी जारी किया गया। इसी तरह अन्य याचिकाकर्ताओं ने भी मौजूदा कब्जे को सही बताते हुए पुनर्वास लाभ मिलने के बाद ही हटाए जाने की गुहार लगाई।
विज्ञापन
सुनवाई न होने पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। मंगलवार को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने भी माना कि सभी पात्रों को पुनर्वास का लाभ नहीं मिल पाया है।
कोर्ट ने मामले को निस्तारित करते हुए कहा कि चूंकि अभी उनके विस्थापन एवं पुनर्वास लाभ का मामला लंबित है। इसलिए याचिकाकर्ताओं के कब्जे को अनाधिकृत नहीं कहा जा सकता। ऐसे में याचिकाकर्ताओं के प्रकरण को नियमानुसार निस्तारण करते हुए उन्हें समुचित लाभ दिया जाए। तब तक उन्हें हटाया ना जाए।
विज्ञापन
अधिवक्ता अभिषेक कुमार चौबे के मुताबिक कलीम आदि का कहना था कि अनपरा परियोजना के निर्माण के समय उनकी जमीन ले ली गई लेकिन समुचित पुनर्वास नहीं दिया गया। बाद में परियोजना के ही एक अधिकारी ने प्लाट आवंटित होने तक डिबुलगंज स्थित परियोजना की जमीन पर बस जाने के लिए कहा।
विज्ञापन
कलीम का कहना था कि उनकी उम्र अस्सी वर्ष हो चुकी है। वह मस्जिद के पास वाली जमीन पर लंबे समय से परिवार के साथ आबाद हैं। अभी तक उनके प्लाट का मामला निस्तारित नहीं किया गया। अब उन्हें अतिक्रमणकारी बताकर हटाया जा रहा है। 14 जुलाई को परियोजना प्रबंधन की तरफ से नोटिस भी जारी किया गया। इसी तरह अन्य याचिकाकर्ताओं ने भी मौजूदा कब्जे को सही बताते हुए पुनर्वास लाभ मिलने के बाद ही हटाए जाने की गुहार लगाई।
विज्ञापन
सुनवाई न होने पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। मंगलवार को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने भी माना कि सभी पात्रों को पुनर्वास का लाभ नहीं मिल पाया है।
कोर्ट ने मामले को निस्तारित करते हुए कहा कि चूंकि अभी उनके विस्थापन एवं पुनर्वास लाभ का मामला लंबित है। इसलिए याचिकाकर्ताओं के कब्जे को अनाधिकृत नहीं कहा जा सकता। ऐसे में याचिकाकर्ताओं के प्रकरण को नियमानुसार निस्तारण करते हुए उन्हें समुचित लाभ दिया जाए। तब तक उन्हें हटाया ना जाए।