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मिड डे मील नहीं चखते शिक्षक
ब्यूरो/ अमर उजाला /सोनभद्र
Updated Mon, 21 Mar 2016 10:47 PM IST
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रामगढ़ स्थित एक प्राथमिक विद्यालय पर गंदगी के बीच भोजन बनाने की तैयारी करती रसोइया।
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बलिया में मिड डे मील खाकर बच्चों के बीमार पड़ने के बाद प्रदेश सरकार ने सजग रहने का निर्देश दिया है, लेकिन जनपद में इसको लेकर बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर उदासीन हैं। विद्यालयों में एमडीएम परोसने में लापरवाही बरती जा रही है। सोमवार को जब अमर उजाला ने इसकी पड़ताल कराई तो सच्चाई सामने आ गई। शिक्षक बच्चों को खाना परोसने से पहले खुद उसे नहीं चखते। हैंडवाश डे सिर्फ कोरम तक सीमित है। ज्यादातर विद्यालयों में न साबुन है और न तौलिया। ऐसे में सरकार की मंशा दम तोड़ रही है।
केंद्र और प्रदेश सरकार स्वच्छता को लेकर सजगता दिखा रही है। मिड डे मील देने में भी सजगता बरतने का निर्देश है, लेकिन बलिया में मध्याह्न भोजन खाकर बच्चों के बीमार पड़ने की घटना के बाद भी जिले का शिक्षा महकमा गंभीर नहीं है। रामगढ़ प्रतिनिधि के अनुसार गुल्लीडाड़ प्राथमिक विद्यालय में मीनू के अनुसार बच्चों को भोजन दिया गया, लेकिन मानकों का ख्याल नहीं रखा गया। दाल में पानी ही ज्यादा नजर आया।
एमडीएम परोसने से पहले अध्यापक ने उसे चखना तक मुनासिब नहीं समझा। यहां गंदगी भी फैली थी। खाना खाने से पहले और बाद में साबुन से हाथ धोने और तौलिया से पोंछने का निर्देश है लेकिन यहां न साबुन था और न ही तौलिया। सांगोबांध प्रतिनिधि के अनुसार म्योरपुर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय कुड़पान में भी शिक्षक ने खाना बगैर चखे ही बच्चों को परोसवा दिया।
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खास बात यह है कि उच्च प्राथमिक विद्यालय कुड़पान तीन साल से चल रहा है, लेकिन कभी यहां मिड डे मील नहीं बना। यहां के बच्चे करीब तीन सौ मीटर दूरी तय कर प्राथमिक विद्यालय पर मध्याह्न भोजन के लिए जाते हैं। प्राथमिक विद्यालय देवकुड़ में रोटी-सब्जी के मीनू की जगह चावल-दाल बना। यहां के रामगहन, चंदेल, शिवशंकर, रामबुझावन, हरदेव, रामविलास ने बताया कि यहां तैनात अध्यापिका अक्सर विद्यालय नहीं आती।
प्राथमिक विद्यालय फरीपान में मीनू के अनुसार खाना बना और अध्यापक ने भोजन चखने के बाद ही बच्चों को परोसवाया। जबकि प्राथमिक विद्यालय जीवनटोला में मध्याह्न भोजन बनाने और परोसने में लापरवाही बरती गई। दुद्धी प्रतिनिधि के अनुसार प्राथमिक विद्यालय खजुरी में सब्जी-रोटी की जगह चावल-सब्जी बना। यहां दोनों शिक्षकों का पता नहीं था। 102 बच्चों में 22 ही उपस्थित थे। शिक्षा प्रेरक ने दाई के भरोसे बच्चों को भोजन परोसवा दिया। प्राथमिक विद्यालय और उच्च प्राथमिक विद्यालय दुद्धी, प्राथमिक विद्यालय कन्या आदि पर मीनू के हिसाब से भोजन बना लेकिन शिक्षकों ने उसे चखा नहीं। खाना बनाने, चखने से लेकर परोसने का भार यहां दाइयों पर ही नजर आया।
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केंद्र और प्रदेश सरकार स्वच्छता को लेकर सजगता दिखा रही है। मिड डे मील देने में भी सजगता बरतने का निर्देश है, लेकिन बलिया में मध्याह्न भोजन खाकर बच्चों के बीमार पड़ने की घटना के बाद भी जिले का शिक्षा महकमा गंभीर नहीं है। रामगढ़ प्रतिनिधि के अनुसार गुल्लीडाड़ प्राथमिक विद्यालय में मीनू के अनुसार बच्चों को भोजन दिया गया, लेकिन मानकों का ख्याल नहीं रखा गया। दाल में पानी ही ज्यादा नजर आया।
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एमडीएम परोसने से पहले अध्यापक ने उसे चखना तक मुनासिब नहीं समझा। यहां गंदगी भी फैली थी। खाना खाने से पहले और बाद में साबुन से हाथ धोने और तौलिया से पोंछने का निर्देश है लेकिन यहां न साबुन था और न ही तौलिया। सांगोबांध प्रतिनिधि के अनुसार म्योरपुर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय कुड़पान में भी शिक्षक ने खाना बगैर चखे ही बच्चों को परोसवा दिया।
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खास बात यह है कि उच्च प्राथमिक विद्यालय कुड़पान तीन साल से चल रहा है, लेकिन कभी यहां मिड डे मील नहीं बना। यहां के बच्चे करीब तीन सौ मीटर दूरी तय कर प्राथमिक विद्यालय पर मध्याह्न भोजन के लिए जाते हैं। प्राथमिक विद्यालय देवकुड़ में रोटी-सब्जी के मीनू की जगह चावल-दाल बना। यहां के रामगहन, चंदेल, शिवशंकर, रामबुझावन, हरदेव, रामविलास ने बताया कि यहां तैनात अध्यापिका अक्सर विद्यालय नहीं आती।
प्राथमिक विद्यालय फरीपान में मीनू के अनुसार खाना बना और अध्यापक ने भोजन चखने के बाद ही बच्चों को परोसवाया। जबकि प्राथमिक विद्यालय जीवनटोला में मध्याह्न भोजन बनाने और परोसने में लापरवाही बरती गई। दुद्धी प्रतिनिधि के अनुसार प्राथमिक विद्यालय खजुरी में सब्जी-रोटी की जगह चावल-सब्जी बना। यहां दोनों शिक्षकों का पता नहीं था। 102 बच्चों में 22 ही उपस्थित थे। शिक्षा प्रेरक ने दाई के भरोसे बच्चों को भोजन परोसवा दिया। प्राथमिक विद्यालय और उच्च प्राथमिक विद्यालय दुद्धी, प्राथमिक विद्यालय कन्या आदि पर मीनू के हिसाब से भोजन बना लेकिन शिक्षकों ने उसे चखा नहीं। खाना बनाने, चखने से लेकर परोसने का भार यहां दाइयों पर ही नजर आया।