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कम हुआ है सामूहिक रक्तदान, दो रक्त समूहों की है कमी
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सोनभद्र। कोविड 19 के नाते चल रहे लॉक डाउन का असर ब्लड बैंकों पर भी पड़ा है। सामूहिक रक्तदान में कमी आई है। हालांकि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराते हुए पिछले 12 दिनों में दो बार सामूहिक रक्तदान शिविर जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में लग चुका है। इस नाते थैलेसीमिया के 23 मरीजों को रक्त के लिए फिलहाल परेशान नहीं होना पड़ रहा है। उन्हें ब्लड बैंक से जरूरत के अनुरूप रक्त मिल जा रहा है।
जिले में थैलेसीमिया के फिलहाल 23 मरीज हैं। करीब एक माह पूर्व तक 19 मरीज थे लेकिन चार बच्चे और इस रोग से पीड़ित हो गए। इन बच्चों को माह में कम से कम दो बार रक्त की जरूरत पड़ती है। लॉक डाउन के चलते रक्तदान कम होने के नाते कुछ ब्लड ग्रुप मिलने में कमी हो रही है। हालांकि अभी तक बच्चों को किसी तरह की दिक्क्त नहीं आई है लेकिन जिला अस्पताल में एबी पॉजिटिव और बी पॉजिटिव रक्त की कमी है। इससे भविष्य में बच्चों के लिए दिक्कत हो सकती है।
जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रेम बहादुर गौतम व ब्लड बैंक के प्रभारी मानिक चंद ने बताया कि पहले शिविरों के जरिए करीब 40 यूनिट तक रक्तदान होता था लेकिन लॉक डाउन में यह घटकर 15 से 20 यूनिट हो गया है। हालांकि फिलहाल ब्लड बैंक में 82 यूनिट रक्त है। इसलिए ज्यादा दिक्कत नहीं है। लेकिन यदि सामूहिक रक्तदान में कमी आई तो भविष्य में दिक्कत हो सकती है। उन्होंने बताया कि लॉक डाउन के चलते सीआईएसएफ ओबरा, रेणुकूट और अनपरा के तीन बड़े ब्लड डोनेट शिविर रद हो गए। उन्होंने बताया कि थैलेसीमिया के मरीजों को प्रति माह करीब 30 यूनिट रक्त की जरूरत पड़ती है। काउंसलर रविंद्र प्रसाद व एलटी राकेश तिवारी ने बताया कि मिर्जापुर और चंदौली के भी लोग यहां रक्त के लिए आ रहे हैं। उन्हें भी यहां से रक्त दिया जा रहा है।
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थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के पिता का कहना है कि लॉक डाउन में फिलहाल रक्त लेने में कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन वाहनों का संचालन न होने से आने-जाने में परेशानी झेलनी पड़ रही है। राबर्ट्सगंज शहर निवासी थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे के पिता जितेंद्र का कहना है कि ब्लड लेने में फिलहाल कोई दिक्कत नहीं हो रही है। एक सप्ताह पहले रक्त लेने गए थे लेकिन कोई समस्या नहीं आई। रास्ते में आने जाने में भी कोई दिक्कत नहीं हुई। थैलेसीमिया पीड़ित एक अन्य बच्चे के पिता मारकुंडी निवासी उमेश कुमार यादव ने बताया कि तीन सप्ताह में एक बार ब्लड चढ़ता था। दस अप्रैल को गए थे। आने जाने में लॉक डाउन में दिक्कत हो रही है। बाइक से आवागमन करने में रास्ते में कई बार रोका जाता है। ब्लड मिलने में पिछली बार तक कोई दिक्कत नहीं हुई है।
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जिले में थैलेसीमिया के फिलहाल 23 मरीज हैं। करीब एक माह पूर्व तक 19 मरीज थे लेकिन चार बच्चे और इस रोग से पीड़ित हो गए। इन बच्चों को माह में कम से कम दो बार रक्त की जरूरत पड़ती है। लॉक डाउन के चलते रक्तदान कम होने के नाते कुछ ब्लड ग्रुप मिलने में कमी हो रही है। हालांकि अभी तक बच्चों को किसी तरह की दिक्क्त नहीं आई है लेकिन जिला अस्पताल में एबी पॉजिटिव और बी पॉजिटिव रक्त की कमी है। इससे भविष्य में बच्चों के लिए दिक्कत हो सकती है।
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जिला अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रेम बहादुर गौतम व ब्लड बैंक के प्रभारी मानिक चंद ने बताया कि पहले शिविरों के जरिए करीब 40 यूनिट तक रक्तदान होता था लेकिन लॉक डाउन में यह घटकर 15 से 20 यूनिट हो गया है। हालांकि फिलहाल ब्लड बैंक में 82 यूनिट रक्त है। इसलिए ज्यादा दिक्कत नहीं है। लेकिन यदि सामूहिक रक्तदान में कमी आई तो भविष्य में दिक्कत हो सकती है। उन्होंने बताया कि लॉक डाउन के चलते सीआईएसएफ ओबरा, रेणुकूट और अनपरा के तीन बड़े ब्लड डोनेट शिविर रद हो गए। उन्होंने बताया कि थैलेसीमिया के मरीजों को प्रति माह करीब 30 यूनिट रक्त की जरूरत पड़ती है। काउंसलर रविंद्र प्रसाद व एलटी राकेश तिवारी ने बताया कि मिर्जापुर और चंदौली के भी लोग यहां रक्त के लिए आ रहे हैं। उन्हें भी यहां से रक्त दिया जा रहा है।
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थैलेसीमिया से पीड़ित बच्चों के पिता का कहना है कि लॉक डाउन में फिलहाल रक्त लेने में कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन वाहनों का संचालन न होने से आने-जाने में परेशानी झेलनी पड़ रही है। राबर्ट्सगंज शहर निवासी थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे के पिता जितेंद्र का कहना है कि ब्लड लेने में फिलहाल कोई दिक्कत नहीं हो रही है। एक सप्ताह पहले रक्त लेने गए थे लेकिन कोई समस्या नहीं आई। रास्ते में आने जाने में भी कोई दिक्कत नहीं हुई। थैलेसीमिया पीड़ित एक अन्य बच्चे के पिता मारकुंडी निवासी उमेश कुमार यादव ने बताया कि तीन सप्ताह में एक बार ब्लड चढ़ता था। दस अप्रैल को गए थे। आने जाने में लॉक डाउन में दिक्कत हो रही है। बाइक से आवागमन करने में रास्ते में कई बार रोका जाता है। ब्लड मिलने में पिछली बार तक कोई दिक्कत नहीं हुई है।