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Sonebhadra News: मप्र की राख से यूपी में प्रदूषण, जांच करेगी टीम

Sun, 07 Sep 2025 11:19 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 07 Sep 2025 11:19 PM IST
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Madhya Pradesh's ash causes pollution in UP, team to investigate
शक्तिनगर। पड़ोसी राज्य मप्र में स्थित ताप विद्युत संयंत्र से उत्सर्जित राख को यूपी के रास्ते से होकर मप्र में निस्तारित किए जाने से सीमावर्ती क्षेत्र में फैल रहे प्रदूषण का मुद्दा गरम हो गया है। इस मामले में क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी (सोनभद्र) ने एसडीएम दुद्धी को पत्र लिखकर स्थलीय सत्यापन के लिए वक्त व तिथि निर्धारित करने का अनुरोध किया है।
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यूपी सीमा के करीब मप्र के हिस्से में देश का सबसे बड़ा पावर प्लांट विंध्याचल स्थापित है। एनटीपीसी लिमिटेड के इस पावर प्लांट से 4760 मेगावाट बिजली उत्पादन होती है। उत्पादन लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए रोजाना हजारों टन कोयला जलाया जाता है। इसी कोयले से राख पैदा होती है। राख को मप्र में स्थित एनसीएल की बंद कोयला खदान गोरबी में निस्तारित किया जाता है। शुरू में ट्रक ट्रेलरों के जरिए निस्तारण का कार्य शुरू हुआ तो विंध्याचल के राख बांध से सिंगरौली जिला मुख्यालय बैढ़न व जयंत के रास्ते गोरबी खदान का रास्ता तय किया गया। इस ओवरलोड परिवहन से जिला मुख्यालय बैढ़न में प्रदूषण फैलने लगा तो मप्र प्रशासन के अधिकारियों ने मुख्यालय के रास्ते परिवहन को प्रतिबंधित कर दिया। इसी के बाद मप्र की राख यूपी के रास्ते फिर मप्र पहुंचाई जाने लगी। नियम विरुद्ध ओवरलोड परिवहन से सड़क पर फैल रही राख ने यूपी के सीमावर्ती क्षेत्रों के लोगों का जीवन दुश्वार कर दिया। इस मामले में जिला पंचायत सदस्य पानपती बबलू प्रधान ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित अन्य जिम्मेदार संस्थाओं को पत्र लिखा। इसके बाद आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत मिश्रा ने जनहित याचिका उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग में दायर किया। इसकी सुनवाई प्रचलित है। इसी क्रम में क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी आरके सिंह की तरफ से एसडीएम दुद्धी को पत्र प्रेषित करते हुए राख प्रदूषण एवं एनटीपीसी विंध्याचल परियोजना की राख परिवहन के भौतिक सत्यापन के लिए समय एवं तिथि उपलब्ध कराए जाने का आग्रह किया गया है। पानपती बबलू प्रधान व हेमंत मिश्रा का कहना है कि वह राख परिवहन का विरोध नहीं करते मामला कायदे के विपरीत परिवहन व सिंगरौली (मप्र) में वैकल्पिक मार्ग उपलब्धता के बावजूद यूपी में प्रदूषण परोसने का है।
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