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लिंकेज का कोयला मंडी में, पावर प्रोजेक्टों में संकट

Fri, 06 May 2022 11:18 PM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 06 May 2022 11:18 PM IST
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Linkage in coal market, crisis in power projects
देश की बिजली परियोजनाएं कोयला संकट से जूझ रही हैं तो दूसरी ओर पावर प्रोजेक्टों को आवंटित रियायती कोयले की बड़ी खेप चंदासी मंडी पहुंच रही है। लिंकेज कोयले को मंडी पहुंचाने का यह खेल कुछ दिनों तक रोक के बाद फिर से बदस्तूर जारी हो गया है। रोजाना सैकड़ों ट्रक कोयला मिलीभगत से पावर परियोजनाओं के बजाय मंडी में पहुंचाया जा रहा है। बृहस्पतिवार को मिर्जापुर के अदलहाट में एसटीएफ की कार्रवाई के दौरान कई ट्रक कोयला पकड़े जाने से भी इसकी पुष्टि हुई है। विडंबना है कि एसटीएफ की निगाह पड़ने के बाद भी कोयला तस्करों का नेटवर्क टूटने के बजाय मजबूत होता जा रहा है।
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देश में कोयला कारोबार दशकों से अकूत कमाई का जरिया बना है। कहा जाता है कि इस धंधे से जो जुड़ा मालामाल हो गया। धंधे में वर्चस्व को लेकर तमाम हत्याएं हुईं। इसके उलट ऊर्जांचल से लेकर देश की सबसे बड़ी कोयला मंडी चंदासी तक यह कारोबार निर्विवाद संचालित है। इसको कारोबारियों व जिम्मेदारों के गठजोड़ के रूप में देखा जा रहा है। जनवरी में सीमावर्ती मध्यप्रदेश में अवैध कोयला भंडार का बड़ा मामला पकड़ में आया था। इसके बाद यूपी पुलिस जागी। तब पता चला कि कारोबार के तार कई प्रदेशों से जुड़े हैं। रेलवे साइडिंग पहुंचने वाला कोयला मंडी पहुंचने के मामले में कार्रवाई के बाद मंदा हुआ धंधा फिर से तेज हो गया है। बृहस्पतिवार को मिर्जापुर के अदलहाट थाना क्षेत्र में संचालित अवैध कोयला मंडी पर एसटीएफ की छापेमारी व दस ट्रक कोयला बरामद होने के बाद ऊर्जांचल फिर सुर्खियों में है। यूपी-एमपी के सीमांचल इलाके (ऊर्जांचल) में नार्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के दस कोयला प्रोजेक्ट हैं। इन्हीं कोयला खदानों से पावर प्रोजेक्टों को रेल रैक से कोयला भेजा जाता है। इसी रियायती कोयले को मंडी पहुंचा ऊंची कीमत हासिल करने में कारोबारी जुटे हैं।
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लिंकेज कोयले को जानिए
शक्तिनगर। पावर प्रोजेक्ट कोयला प्रोजेक्टों से जरूरत के मुताबिक कोयला प्राप्त करने के लिए अनुबंध करते हैं। पावर व कोल प्रोजेक्ट को ईंधन आपूर्ति अनुबंध (एफएसए) के जरिए लिंक किया जाता है। बताया जाता है कि अनुबंध मुताबिक पावर प्रोजेक्ट को उत्पादन लागत पर कोल कंपनी रियायती कोयला उपलब्ध कराती है। इसके पीछे मकसद सस्ती बिजली उपलब्ध कराना है ताकि सामंजस्य कायम रहे। इसी कोयले को खुले बाजार में बेच कारोबारी व धंधे से ताल्लुक रखने वाले मालामाल हो रहे हैं।
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खंडवा को आवंटित कोयला मिला था मंडी की राह पर
जनवरी में उच्चाधिकारियों के निर्देश पर पुलिस ने अभियान चलाकर कोयला लदी ट्रकों की जांच शुरू की तो बड़े खेल का पर्दाफाश हुआ। इस दौरान 22 ट्रक कोयला पकड़ा गया था। इसमें से कई ट्रक ऐसे थे, जिन पर कोयला मप्र के खंडवा जिले में स्थित पावर परियोजनाओं के लिए आवंटित हुए थे, मगर उसे उल्टी दिशा में चंदासी मंडी की ओर ले जाया जा रहा था। कार्रवाई के बाद कुछ दिनों तक मामला शांत रहा। अब फिर से यह खेल जोरों पर है।
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