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Sonebhadra News: अपहरण कर नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को उम्रकैद
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साढ़े तीन वर्ष पूर्व अनुसूचित जाति की नाबालिग लड़की का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट अमित वीर सिंह की अदालत ने दोषी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। उस पर 2.25 लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड न देने पर छह माह की अतिरिक्त कैद होगी। वहीं अर्थदंड की धनराशि में से 1.80 लाख रुपये पीड़िता को मिलेंगे।
अभियोजन पक्ष के मुताबिक अनपरा थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने अनपरा थाने में बेटी के अपहरण और दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। तहरीर में बताया था कि उसकी नाबालिग बेटी 20 अगस्त 2020 से लापता है। सभी संभावित जगहों पर पता लगाया, लेकिन जानकारी नहीं मिली। उसकी बेटी को कुलडोमरी निवासी मोहम्मद गनी अक्सर फोन करता था और पति व ससुराल को लेकर लेकर भड़काता था।
बेटी को अपहरण कर मोहम्मद गनी ने ही कहीं रखा है। तहरीर पर पुलिस ने 9 सितंबर 2020 को केस दर्ज कर विवेचना की। पुलिस ने मोहम्मद गनी के साथ उसकी बेटी को बरामद किया। विवेचक ने अपहरण, दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट और एससी-एसटी एक्ट में चार्जशीट दाखिल की।
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मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर मोहम्मद गनी को दोषी करार देते हुए उम्र कैद और 2.25 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर छह माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। अभियोजन पक्ष की तरफ से सरकारी वकील दिनेश कुमार अग्रहरी, सत्य प्रकाश त्रिपाठी एवं नीरज कुमार सिंह ने बहस की।
विद्यालय के रिकॉर्ड से हुई उम्र की पुष्टि, आठ गवाहों के बयान ने तय की सजा
कोर्ट में ट्रायल के दौरान आरोपी पक्ष ने पीड़िता की उम्र पर सवाल उठाते हुए उसे बालिग करार देने की कोशिश की। कोर्ट ने विद्यालय के रिकॉर्ड को तलब किया। प्रधानाचार्य को भी गवाही के लिए बुलाया गया। साक्ष्यों से पीड़िता की उम्र 17 साल ही साबित हुई। इसके अलावा सात अन्य गवाहों के भी बयान हुए। इसमें पीड़िता के अलावा उसकी मां, मेडिकल परीक्षण करने वाली डॉक्टर भी शामिल रहे। अधिवक्ताओं की तरफ से दिए गए तर्कों को दृष्टिगत रखते हुए कोर्ट ने आरोपी पर दोषी पाया। इसके बाद सजा के मामले पर विचार करते हुए इसे काफी गंभीर प्रकरण मानते हुए कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने अनुसूचित जनजाति की नाबालिग का अपहरण कर दुष्कर्म किया है। उसे किसी तरह की राहत नहीं दी जा सकती।
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अभियोजन पक्ष के मुताबिक अनपरा थाना क्षेत्र के एक गांव निवासी महिला ने अनपरा थाने में बेटी के अपहरण और दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराया था। तहरीर में बताया था कि उसकी नाबालिग बेटी 20 अगस्त 2020 से लापता है। सभी संभावित जगहों पर पता लगाया, लेकिन जानकारी नहीं मिली। उसकी बेटी को कुलडोमरी निवासी मोहम्मद गनी अक्सर फोन करता था और पति व ससुराल को लेकर लेकर भड़काता था।
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बेटी को अपहरण कर मोहम्मद गनी ने ही कहीं रखा है। तहरीर पर पुलिस ने 9 सितंबर 2020 को केस दर्ज कर विवेचना की। पुलिस ने मोहम्मद गनी के साथ उसकी बेटी को बरामद किया। विवेचक ने अपहरण, दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट और एससी-एसटी एक्ट में चार्जशीट दाखिल की।
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मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के तर्कों को सुनने, गवाहों के बयान एवं पत्रावली का अवलोकन करने पर मोहम्मद गनी को दोषी करार देते हुए उम्र कैद और 2.25 लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड न देने पर छह माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। अभियोजन पक्ष की तरफ से सरकारी वकील दिनेश कुमार अग्रहरी, सत्य प्रकाश त्रिपाठी एवं नीरज कुमार सिंह ने बहस की।
विद्यालय के रिकॉर्ड से हुई उम्र की पुष्टि, आठ गवाहों के बयान ने तय की सजा
कोर्ट में ट्रायल के दौरान आरोपी पक्ष ने पीड़िता की उम्र पर सवाल उठाते हुए उसे बालिग करार देने की कोशिश की। कोर्ट ने विद्यालय के रिकॉर्ड को तलब किया। प्रधानाचार्य को भी गवाही के लिए बुलाया गया। साक्ष्यों से पीड़िता की उम्र 17 साल ही साबित हुई। इसके अलावा सात अन्य गवाहों के भी बयान हुए। इसमें पीड़िता के अलावा उसकी मां, मेडिकल परीक्षण करने वाली डॉक्टर भी शामिल रहे। अधिवक्ताओं की तरफ से दिए गए तर्कों को दृष्टिगत रखते हुए कोर्ट ने आरोपी पर दोषी पाया। इसके बाद सजा के मामले पर विचार करते हुए इसे काफी गंभीर प्रकरण मानते हुए कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने अनुसूचित जनजाति की नाबालिग का अपहरण कर दुष्कर्म किया है। उसे किसी तरह की राहत नहीं दी जा सकती।