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मन की मिट्टी को थोड़ा सा गीला-कच्चा रहने दो...
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शक्तिनगर। शक्तिनगर की साहित्यिक, सामाजिक संस्था सोन संगम के तत्वावधान में बुद्ध पूर्णिमा एवं गुरु गोरखनाथ की जयंती के उपलक्ष्य में बृहस्पतिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ऑनलाइन विचार गोष्ठी एवं कवि समागम का आयोजन हुआ। इसमें सोनभद्र एवं सिंगरौली के अतिरिक्त गाजीपुर, आजमगढ़, जबलपुर, मण्डला, रीवा, सागर, मुम्बई एवं संयुक्त राज्य अमेरिका तक के हिन्दी सेवियों ने सहभागिता की।
डॉ. मानिक चन्द पांडेय ने भगवान बुद्ध एवं गुरु गोरखनाथ के जीवन एवं शिक्षाओं का सार प्रस्तुत करते हुए दोनों विभूतियों को भारतीय अध्यात्म के क्षेत्र का उज्ज्वल नक्षत्र बताया। एलआईसी शक्तिनगर के प्रबन्धक पंकज श्रीवास्तव ने गुरु गोरखनाथ को शैव साधना एवं हठयोग परम्परा का अनूठा शिखर निरूपित किया। योगेन्द्र मिश्र ने गुरु गोरखनाथ की प्रतिनिधि रचनाओं का पाठ किया। मुम्बई के कवि अभिषेक अमन ने ‘नियम कायदों की भट्ठी में पकी तो जल्दी चटखेगी, मन की मिट्टी को थोड़ा-सा गीला-कच्चा रहने दो’ गीत सुनाकर अन्तर्मन के भेद खोले तो सागर, मप्र से वरिष्ठ रंगकर्मी एवं कवि ओम द्विवेदी ने ‘रोटी मेहनत की भली, चाहे देर-सबेर, सोता मिला मजूर तो, रोता मिला कुबेर’ जैसे दोहे सुनाकर कविता को ठोस यथार्थ की जमीन प्रदान की। रीवा से विख्यात गजलगो विद्या वारिधि तिवारी ने ‘एक नन्हीं-सी जान रखते हो, दिल में कितने गुमान रखते हो’ गजल से गुरूर पर तंज किया तो मेरीलैण्ड, संयुक्त राज्य अमेरिका से गोष्ठी से जुड़े कवि दिनेश शुक्ल ने ‘नजर की इक कलम है और आंसुओं की दावात’ शीर्षक कविता से प्रेम की पीर को स्वर दिया।
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डॉ. मानिक चन्द पांडेय ने भगवान बुद्ध एवं गुरु गोरखनाथ के जीवन एवं शिक्षाओं का सार प्रस्तुत करते हुए दोनों विभूतियों को भारतीय अध्यात्म के क्षेत्र का उज्ज्वल नक्षत्र बताया। एलआईसी शक्तिनगर के प्रबन्धक पंकज श्रीवास्तव ने गुरु गोरखनाथ को शैव साधना एवं हठयोग परम्परा का अनूठा शिखर निरूपित किया। योगेन्द्र मिश्र ने गुरु गोरखनाथ की प्रतिनिधि रचनाओं का पाठ किया। मुम्बई के कवि अभिषेक अमन ने ‘नियम कायदों की भट्ठी में पकी तो जल्दी चटखेगी, मन की मिट्टी को थोड़ा-सा गीला-कच्चा रहने दो’ गीत सुनाकर अन्तर्मन के भेद खोले तो सागर, मप्र से वरिष्ठ रंगकर्मी एवं कवि ओम द्विवेदी ने ‘रोटी मेहनत की भली, चाहे देर-सबेर, सोता मिला मजूर तो, रोता मिला कुबेर’ जैसे दोहे सुनाकर कविता को ठोस यथार्थ की जमीन प्रदान की। रीवा से विख्यात गजलगो विद्या वारिधि तिवारी ने ‘एक नन्हीं-सी जान रखते हो, दिल में कितने गुमान रखते हो’ गजल से गुरूर पर तंज किया तो मेरीलैण्ड, संयुक्त राज्य अमेरिका से गोष्ठी से जुड़े कवि दिनेश शुक्ल ने ‘नजर की इक कलम है और आंसुओं की दावात’ शीर्षक कविता से प्रेम की पीर को स्वर दिया।
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