Sonbhadra: 12 घंटे में ही भर गया कनहर बांध, डूब क्षेत्र के अधिकांश गांव डूबे, प्रशासन अलर्ट
कनहर बांध प्रदेश के अंतिम छोर पर निर्मित है। इसका डूब क्षेत्र छत्तीसगढ़ व झारखंड की सीमा में स्थित है। पिछले कुछ दिनों से छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही तेज बारिश के कारण कनहर और उसकी सहयोगी पहाड़ी नदियों में पानी तेजी से बढ़ा है।
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छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती क्षेत्रों में हुई मूसलाधार बारिश से कनहर नदी उफान पर है। पहाड़ी नदियों से अचानक भारी मात्रा में पानी आने से सोनभद्र में कनहर पर निर्मित बांध 12 घंटे में ही भर गया है। एहतियात के तौर पर बांध के 16 में से 11 गेट को पांच मीटर उठाकर निरंतर पानी निकाला जा रहा है। डूब क्षेत्र के सभी गांवों में अधिकारी लोगों को तत्काल गांव खाली करने की हिदायत दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ से पानी आने का यही क्रम बना रहा तो स्थिति गंभीर हो सकती है। स्थिति को देखते हुए प्रशासन व सिंचाई विभाग अलर्ट है।
कनहर बांध प्रदेश के अंतिम छोर पर निर्मित है। इसका डूब क्षेत्र छत्तीसगढ़ व झारखंड की सीमा में स्थित है। पिछले कुछ दिनों से छत्तीसगढ़ में लगातार हो रही तेज बारिश के कारण कनहर और उसकी सहयोगी पहाड़ी नदियों में पानी तेजी से बढ़ा है। इसका असर बांध के डूब क्षेत्र में दिख रहा है। करीब सवा तीन किमी लंबा बांध 12 घंटे में ही भर गया।
छत्तीसगढ़ से लगातार आ रहा पानी
बुधवार सुबह तक बांध का जलस्तर 240 मीटर था, जो गुरुवार में तीन बजे बढ़कर 251.30 मीटर तक पहुंच गया। इसके बाद से ही बांध के 11 गेट को पांच मीटर तक उठाकर पानी निरंतर निकाला जा रहा है। बावजूद बांध का जलस्तर बृहस्पतिवार की शाम तक 252.5 मीटर पर बना रहा। छत्तीसगढ़ से लगातार पानी कनहर में आ रहा है। इसे देखते हुए प्रशासन और सिंचाई विभाग अलर्ट है।
डूब क्षेत्र के गांवों में जाकर अधिकारी लोगों को तत्काल गांव छोड़ने के लिए कह रहे हैं। विभाग का दावा है कि 255 मीटर के दायरे में आने वाले सभी गांवों को खाली कराया जा चुका है। स्थिति पर निरंतर निगाह रखी जा रही है। सिंचाई विभाग के अवर अभियंता नंदलाल ने बताया कि 255 लेबल तक का जलस्तर बढ़ने के बाद डूब क्षेत्र में भ्रमण किया गया है।
अभी कुल सात परिवार ऐसे हैं, जिनका मकान डूब क्षेत्र से बाहर है। इन लोगों का मकान बांध के सभी गेट बंद होने के बाद ही डूबेगा। इन सभी लोगों को डूब क्षेत्र से बाहर जाने के लिए लगातार कहा जा रहा है। इन लोगों का नाम विस्थापन सूची में नहीं है। कनहर बांध में तेज रफ्तार से कनहर एवं पांगन नदी की बाढ़ आई है, जिससे सुंदरी, भिसुर, सुगवामान, कोरची गांव डूब गए हैं।
मुआवजे के बाद ही छोड़ेंगे गांव
भिसुर गांव के कुल सात विस्थापित परिवार ऐसे हैं, जो आज भी निवास कर रहे हैं। इन परिवारों का घर मकान बांध के सभी गेट बंद करने के बाद डूब जाएगा। डूब क्षेत्र के भिसुर गांव निवासी फुलमतिया, बिगन, फागु, लल्लू, लालजी पुत्रगण जोखू, बुधन पुत्र हरि प्रसाद, सुरेंद्र पुत्र बुधन सभी अपने सामान समेट रहे हैं। इन सभी का कहना है कि जब तक हम लोगों को मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक अंतिम लड़ाई लड़ेंगे।
24 घंटे में 12 फीट बढ़ा नगवां बांध का जलस्तर
छत्तीसगढ़ सीमा पर कनहर बांध के साथ ही बिहार सीमा पर निर्मित नगवां बांध में भी पानी तेजी से बढ़ रहा है। पिछले 24 घंटे में बांध के जलस्तर में 10 फीट की वृद्धि हुई है। बांध में पानी भरने से किसानों को जल्द ही सिंचाई के लिए नहर का पानी मिलने की उम्मीद जग गई है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों के अनुसार बुधवार की सुबह नगवां बांध का जलस्तर 28 फीट था, जो बृहस्पतिवार की सुबह बांध का जलस्तर बढ़कर 40 फीट तक पहुंच गया। इससे क्षेत्र के किसान खुश हैं। किसानों को धान की रोपाई होने जाने की उम्मीद जगी है। वहीं धंधरौल बांध का जलस्तर भी धीमी गति से बढ़ना शुरू हुआ है। मिर्जापुर कैनाल डिवीजन मिर्जापुर के सहायक अभियंता राजीव प्रसाद ने बताया कि नगवां बांध का फाटक सिंचाई के लिए शुक्रवार की सुबह से खोल दिया जाएगा। बरसात होने पर नहर चलती रहेगी। धंधरौल बांध में अभी पर्याप्त पानी नहीं है।