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प्रदूषण से निजात को जेपी ने की पहल
अमर उजाला ब्यूरो। सोनभद्र
Updated Wed, 10 Jun 2015 10:58 PM IST
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प्रदूषण से निजात को जेपी ने की पहल
जिले में बढ़ रहे प्रदूषण को देखते हुए जेपी एसोसिएट्स की ओर से इससे निजात के लिए एक अच्छी पहल की गई है। अब अवशिष्ट पदार्थों का प्रयोग इंधन के रूप में किया जा रहा है।
जेपी एसोसिएट्स के कोआर्डिनेटर सुधीर कुमार मिश्रा ने बताया कि हमारे देश में औद्योगीकरण के कारण उनसे निकलने वाले अनुपयोगी पदार्थ, रसायन के उचित रख-रखाव न होने और उनको उपयोग में न लाए जाने की वजह से प्रदूषण की समस्या बढ़ती जा रही है।
उन्होंने कहा कि वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में अपने आसपास के क्षेत्रों में उपलब्ध अनुपयोगी अवशिष्ट पदार्थों का इंधन के रूप में प्रयोग निश्चय ही देश में बढ़ते हुए प्रदूषण की समस्या से निजात दिलाने में सहायक सिद्ध होगा।
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कहा कि फैक्ट्री के आवासीय परिसर में घरों में उपलब्ध अनुपयोगी सामग्रियों और उपयोग होने वाले प्लास्टिक तथा ज्वलनशील पदार्थ को इकट्ठा कराने के लिए बैगों का वितरण किया गया है।
इसी प्रकार से डाला बाजार में भी कचरे को इकट्ठा किया जा रहा है। टूटे चप्पल, प्लास्टिक, कपड़ा को इकट्ठा करके परिसर में लाकर किल्र में जलाया जा रहा है। इतना ही नहीं घरों से निकलने वाले गंदे पानी का भी प्रयोग साफ करके कालोनी में बाग-बगीचों की सिंचाई में किया जा रहा है।
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जिले में बढ़ रहे प्रदूषण को देखते हुए जेपी एसोसिएट्स की ओर से इससे निजात के लिए एक अच्छी पहल की गई है। अब अवशिष्ट पदार्थों का प्रयोग इंधन के रूप में किया जा रहा है।
जेपी एसोसिएट्स के कोआर्डिनेटर सुधीर कुमार मिश्रा ने बताया कि हमारे देश में औद्योगीकरण के कारण उनसे निकलने वाले अनुपयोगी पदार्थ, रसायन के उचित रख-रखाव न होने और उनको उपयोग में न लाए जाने की वजह से प्रदूषण की समस्या बढ़ती जा रही है।
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उन्होंने कहा कि वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में अपने आसपास के क्षेत्रों में उपलब्ध अनुपयोगी अवशिष्ट पदार्थों का इंधन के रूप में प्रयोग निश्चय ही देश में बढ़ते हुए प्रदूषण की समस्या से निजात दिलाने में सहायक सिद्ध होगा।
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कहा कि फैक्ट्री के आवासीय परिसर में घरों में उपलब्ध अनुपयोगी सामग्रियों और उपयोग होने वाले प्लास्टिक तथा ज्वलनशील पदार्थ को इकट्ठा कराने के लिए बैगों का वितरण किया गया है।
इसी प्रकार से डाला बाजार में भी कचरे को इकट्ठा किया जा रहा है। टूटे चप्पल, प्लास्टिक, कपड़ा को इकट्ठा करके परिसर में लाकर किल्र में जलाया जा रहा है। इतना ही नहीं घरों से निकलने वाले गंदे पानी का भी प्रयोग साफ करके कालोनी में बाग-बगीचों की सिंचाई में किया जा रहा है।