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जिलेभर की आग बुझाने के लिए मात्र तीन वाहन
ब्यूरो/अमर उजाला/सोनभद्र
Updated Mon, 28 Mar 2016 11:37 PM IST
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भगवान से शुक्र मनाइए कि इस बार की तपिश सकुशल बीत जाए और कहीं आग की लपटें ना उठने पाएं। अगर आग लग गई तो समय पर दमकल वाहन पहुंच पाएगा, कहना मुश्किल है? करीब डेढ़ सौ वर्ग किमी एरिया वाले जनपद में व्यवस्था के नाम पर मौजूदा समय में महज तीन दमकल वाहन मौजूद हैं। स्टाफ की संख्या बढ़ी है, लेकिन बेहतर स्थिति अभी बाकी है। अगर एक साथ दो जगहों पर आग लग जाए तो फिर बेबस वाले हालात ही बनने वाले हैं।
अग्निशमन व्यवस्था के नाम पर राबर्ट्र्सगंज को हेड क्वार्टर बनाया गया है। यहां अग्निशमन अधिकारी के साथ ही एक दमकल वाहन और अन्य कर्मी मौजूद हैं। चोपन स्थित केंद्र पर भी एक दमकल वाहन और अग्निशमन कर्मी तैनात हैं। एक वाहन को कनहर परियोजना निर्माण स्थल (अमवार) में खड़ा है। इसी पर पूरे दुद्धी सर्किल की जिम्मेदारी है।
घोरावल के लिए अस्थाई कैंप स्वीकृत है, लेकिन यह कैंप, मरम्मत के लिए दमकल वाहन को आने के बाद ही वजूद में आ पाएगा। स्टाफ के नाम पर 23 अग्निशमन कर्मी (14 नए), तीन हवलदार, पांच चालक हैं। मानक के अनुसार जिले में कम से कम 37 अग्निशमन कर्मी होने चाहिए।
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जिले की अधिकांश एरिया भौगोलिक दुरुहता से भरी पड़ी है। राबर्ट्र्सगंज में खड़े वाहन को अगर घोरावल और नगवां क्षेत्र के छोर वाले इलाके में जाना हो तो कम से कम 60 से 80 किमी दूरी तय करनी पड़ेगी। स्पष्ट है कि घोरावल, राबट्र्सगंज से लेकर चतरा, नगवां में एक साथ कहीं भी दूसरी जगह आग लगी तो फिर दमकल वाहन नहीं पहुंचने वाला। इसी तरह चोपन और दुद्धी इलाके के भी हालात विषम हैं।
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अग्निशमन व्यवस्था के नाम पर राबर्ट्र्सगंज को हेड क्वार्टर बनाया गया है। यहां अग्निशमन अधिकारी के साथ ही एक दमकल वाहन और अन्य कर्मी मौजूद हैं। चोपन स्थित केंद्र पर भी एक दमकल वाहन और अग्निशमन कर्मी तैनात हैं। एक वाहन को कनहर परियोजना निर्माण स्थल (अमवार) में खड़ा है। इसी पर पूरे दुद्धी सर्किल की जिम्मेदारी है।
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घोरावल के लिए अस्थाई कैंप स्वीकृत है, लेकिन यह कैंप, मरम्मत के लिए दमकल वाहन को आने के बाद ही वजूद में आ पाएगा। स्टाफ के नाम पर 23 अग्निशमन कर्मी (14 नए), तीन हवलदार, पांच चालक हैं। मानक के अनुसार जिले में कम से कम 37 अग्निशमन कर्मी होने चाहिए।
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जिले की अधिकांश एरिया भौगोलिक दुरुहता से भरी पड़ी है। राबर्ट्र्सगंज में खड़े वाहन को अगर घोरावल और नगवां क्षेत्र के छोर वाले इलाके में जाना हो तो कम से कम 60 से 80 किमी दूरी तय करनी पड़ेगी। स्पष्ट है कि घोरावल, राबट्र्सगंज से लेकर चतरा, नगवां में एक साथ कहीं भी दूसरी जगह आग लगी तो फिर दमकल वाहन नहीं पहुंचने वाला। इसी तरह चोपन और दुद्धी इलाके के भी हालात विषम हैं।