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अनपरा परियोजना का उत्पादन सुधरा
अमर उजाला ब्यूरो/ सोनभद्र
Updated Tue, 04 Oct 2016 10:51 PM IST
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electricity price increases
- फोटो : Demo Pic
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राज्य सेक्टर की सबसे बड़ी 2630 मेगावाट वाली अनपरा परियोजना में कोयले की उपलब्धता बढ़ने के साथ ही बिजली उत्पादन में भी सुधार होने लगा है। मंगलवार की शाम तक परियोजना की सात इकाइयों में से पांच इकाइयां उत्पादन पर थीं और इनसे 15 सौ मेगावाट के पार उत्पादन बना हुआ था। उधर, कोयले के गीलेपन के चलते 1288 मेगावाट वाली ओबरा परियोजना का उत्पादन लुढ़ककर 145 मेगावाट पर आ गया। पनकी , पारीक्षा, हरदुआगंज में उत्पादन सामान्य रहने से, राज्य सेक्टर के कुल उत्पादन 32 सौ मेगावाट के इर्द-गिर्द बना हुआ था।
अनपरा में 210 मेगावाट की तीन, पांच सौ मेगावाट की पांच इकाइयां स्थित हैं। कोयला संकट के चलते बंद की गई 210 मेगावाट की पहली, दूसरी इकाई उत्पादन पर ले ली गई है। वहीं इसी क्षमता की तीसरी इकाई 45 दिन के वार्षिक अनुरक्षण में चल रही है। पांच सौ मेगावाट की चौथी, पांचवीं, छठीं इकाई उत्पादन पर है। जबकि पांच सौ मेगावाट वाली सातवीं इकाई के फ्लू गैस डक्ट में अत्यधिक राख भराव के चलते इस इकाई को मंगलवार को भी उत्पादन के लिए लाइटअप कर पाना संभव नहीं हो सका है।
अब इसे बुधवार की रात तक लाइटअप की उम्मीद जताई जा रही है। उधर, रांची और विलासपुर से चली कोयले की रैक मंगलवार को अनपरा पहुंच गई। कोल हैंडलिंग प्लांट में उसे अनलोडिंग का काम जारी था। एनसीएल की तरफ से 25 हजार एमटी से अधिक की कोयला आपूर्ति बनी हुई थी। अनपरा सीजीएम इं. त्रिभुवन तिवारी ने बताया कि कोयले की उपलब्धता बढ़ने के साथ उत्पादन सुधरने लगा है। जल्द ही बंद पड़ी तीसरी, सातवीं इकाई को भी उत्पादन पर ले लिया जाएगा। वहीं अन्य इकाइयों के भी उत्पादन में सुधार का क्रम जारी रहेगा। उधर, कोयले के गीलेपन के चलते ओबरा परियोजना का लुढ़का उत्पादन ऊर्जा जगत में चिंता का माहौल बनाए रहा। इसी तरह 210 मेगावाट की पनकी में 145, 1140 मेगावाट की पारीक्षा में 827, 665 मेगावाट की हरदुआगंज में 589 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही थी।
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अनपरा में 210 मेगावाट की तीन, पांच सौ मेगावाट की पांच इकाइयां स्थित हैं। कोयला संकट के चलते बंद की गई 210 मेगावाट की पहली, दूसरी इकाई उत्पादन पर ले ली गई है। वहीं इसी क्षमता की तीसरी इकाई 45 दिन के वार्षिक अनुरक्षण में चल रही है। पांच सौ मेगावाट की चौथी, पांचवीं, छठीं इकाई उत्पादन पर है। जबकि पांच सौ मेगावाट वाली सातवीं इकाई के फ्लू गैस डक्ट में अत्यधिक राख भराव के चलते इस इकाई को मंगलवार को भी उत्पादन के लिए लाइटअप कर पाना संभव नहीं हो सका है।
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अब इसे बुधवार की रात तक लाइटअप की उम्मीद जताई जा रही है। उधर, रांची और विलासपुर से चली कोयले की रैक मंगलवार को अनपरा पहुंच गई। कोल हैंडलिंग प्लांट में उसे अनलोडिंग का काम जारी था। एनसीएल की तरफ से 25 हजार एमटी से अधिक की कोयला आपूर्ति बनी हुई थी। अनपरा सीजीएम इं. त्रिभुवन तिवारी ने बताया कि कोयले की उपलब्धता बढ़ने के साथ उत्पादन सुधरने लगा है। जल्द ही बंद पड़ी तीसरी, सातवीं इकाई को भी उत्पादन पर ले लिया जाएगा। वहीं अन्य इकाइयों के भी उत्पादन में सुधार का क्रम जारी रहेगा। उधर, कोयले के गीलेपन के चलते ओबरा परियोजना का लुढ़का उत्पादन ऊर्जा जगत में चिंता का माहौल बनाए रहा। इसी तरह 210 मेगावाट की पनकी में 145, 1140 मेगावाट की पारीक्षा में 827, 665 मेगावाट की हरदुआगंज में 589 मेगावाट बिजली पैदा की जा रही थी।
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