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पर्यटकों को रिझाएगा हाथीनाला का बायो डायवर्सिटी पार्क
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सोनभद्र। जैव विविधताओं से भरे हाथीनाला पार्क का दृश्य अब और भी मनमोहक होगा। प्रकृति की अप्रतिम सुंदरता के साथ ही यहां रोमांचकारी खेल और मनोरंजन की नई गतिविधियां शुरू होंगी। पार्क को संवारने और इसके प्रति लोगों का आकर्षण बढ़ाने के लिए इको टूरिज्म को विस्तार देने की कवायद शुरू हो गई है। पहले चरण में यहां नेचर एडवेंचर गेम की शुरुआत होगी। वन विभाग कार्ययोजना तैयार कर चुका है। शीघ्र ही काम शुरू होने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि इन सुविधाओं के बाद इस पार्क की ओर पर्यटकों की भीड़ बढ़ेगी। आसपास के लोगों को भी नए रोजगार के अवसर मिलेंगे।
रांची-रीवा मार्ग पर हाथीनाला स्थित पार्क पूर्वांचल का पहला बायो डायवर्सिटी (जैव विविधता) पार्क है। करीब 4003.16 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले इस क्षेत्र में देश-दुनिया की बहुमूल्य और दुर्लभ प्रजातियों के औषधीय पेड़-पौधे हैं। पार्क को आकर्षक रूप देने के लिए वन विभाग की ओर से यहां चेकडैम के माध्यम से प्राकृतिक झरने, नेचर ट्रेल, नेचर वॉल आदि का निर्माण किया गया है। बच्चों के खेलकूद और मनोरंजन के लिए भी कई सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। पर्यटकों का आकर्षण बढ़ाने के लिए अब इसे और संवारा जाएगा। वन विभाग ने यहां नेचर एडवेंचर पर आधारित खेलों की शुरुआत की योजना तैयार की है। इसके तहत यहां आने वालों को रॉक क्लाइंबिंग (ऊंचे पहाड़ पर चढ़ने), रस्सी के सहारे एक-पेड़ से दूसरे पेड़ पर जाने, झरने के ऊपर से रस्सियों के सहारे चलने, राफ्टिंग आदि की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। अन्य अनुपयोगी सामानों की मदद से इसे संवारा जाएगा। खास बात यह कि इन गतिविधियों के माध्यम से आसपास के लोगों को भी जोड़ा जाएगा, जिससे उनका भी रुझान इस पार्क के संरक्षण और विकास में हो सके। वन विभाग ने इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। इसमें करीब सवा करोड़ रुपये खर्च होंगे। जल्द ही काम शुरू कराया जाएगा। इन सुविधाओं के बाद यहां पर्यटकों की भीड़ उमड़ने की संभावना जताई जा रही है। इससे आसपास के लोगों को रोजगार के अवसर भी शुरू होंगे।
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मनोरंजन के साथ विज्ञान की भी जानकारी
हाथीनाला बायो डायवर्सिटी पार्क जहां प्रकृति प्रेमियों की मौज-मस्ती का केंद्र है, वहीं विद्यार्थियों के लिए यह काफी उपयोगी है। उन्हें दुर्लभ प्रजाति के पौधों को देखने और उनके बारे में जानकारी हासिल करने का भरपूर मौका मिलता है। यहां साखू, असना, महुआ, हल्दू, सलई, परसिद्ध, कारी, सादन, झींगन, विजयसाल, चिरौंजी, तेंदू, खैर आदि प्रजाति के पेड़ों की बड़ी श्रृंखला है। वृक्षों को उनके वानस्पतिक पहचान के साथ संरक्षित किया गया है। इसी तरह यहां चिंकारा, लकड़बग्घा, जंगली सूअर, सांभर, चीतल, उल्लू आदि वन्य जीवों की भी अच्छी संख्या है।
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पर्यावरण संरक्षण के लिए उपयोगी है पार्क
यह मुख्यतया मिश्रित प्रजातियों का वन है। इस वन क्षेत्र के तहत एक नाला (हाथीनाला) बहता है, जिसमें जुलाई से फरवरी-मार्च तक जल उपलब्ध रहता है। हाथीनाला बायो डायवर्सिटी हॉटस्पॉट निकटवर्ती औद्योगिक इकाइयों से हो रहे पर्यावरण प्रदूषण को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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हाथीनाला बायो डायवर्सिटी पार्क को आकर्षक और रोमांचकारी बनाने के लिए यहां नेचर एडवेंचर गेम की शुरुआत कराई जाएगी। सीमित सुविधाओं में ही पार्क को इस तरह विकसित किया जाएगा, जिससे पर्यटकों का आकर्षण बढ़ेगा। इसकी कार्ययोजना तैयार है। जल्द ही काम शुरू हो जाएगा। - मनमोहन मिश्र, प्रभागीय वनाधिकारी, रेणुकूट वन प्रभाग।
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रांची-रीवा मार्ग पर हाथीनाला स्थित पार्क पूर्वांचल का पहला बायो डायवर्सिटी (जैव विविधता) पार्क है। करीब 4003.16 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैले इस क्षेत्र में देश-दुनिया की बहुमूल्य और दुर्लभ प्रजातियों के औषधीय पेड़-पौधे हैं। पार्क को आकर्षक रूप देने के लिए वन विभाग की ओर से यहां चेकडैम के माध्यम से प्राकृतिक झरने, नेचर ट्रेल, नेचर वॉल आदि का निर्माण किया गया है। बच्चों के खेलकूद और मनोरंजन के लिए भी कई सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। पर्यटकों का आकर्षण बढ़ाने के लिए अब इसे और संवारा जाएगा। वन विभाग ने यहां नेचर एडवेंचर पर आधारित खेलों की शुरुआत की योजना तैयार की है। इसके तहत यहां आने वालों को रॉक क्लाइंबिंग (ऊंचे पहाड़ पर चढ़ने), रस्सी के सहारे एक-पेड़ से दूसरे पेड़ पर जाने, झरने के ऊपर से रस्सियों के सहारे चलने, राफ्टिंग आदि की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। अन्य अनुपयोगी सामानों की मदद से इसे संवारा जाएगा। खास बात यह कि इन गतिविधियों के माध्यम से आसपास के लोगों को भी जोड़ा जाएगा, जिससे उनका भी रुझान इस पार्क के संरक्षण और विकास में हो सके। वन विभाग ने इसकी विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। इसमें करीब सवा करोड़ रुपये खर्च होंगे। जल्द ही काम शुरू कराया जाएगा। इन सुविधाओं के बाद यहां पर्यटकों की भीड़ उमड़ने की संभावना जताई जा रही है। इससे आसपास के लोगों को रोजगार के अवसर भी शुरू होंगे।
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मनोरंजन के साथ विज्ञान की भी जानकारी
हाथीनाला बायो डायवर्सिटी पार्क जहां प्रकृति प्रेमियों की मौज-मस्ती का केंद्र है, वहीं विद्यार्थियों के लिए यह काफी उपयोगी है। उन्हें दुर्लभ प्रजाति के पौधों को देखने और उनके बारे में जानकारी हासिल करने का भरपूर मौका मिलता है। यहां साखू, असना, महुआ, हल्दू, सलई, परसिद्ध, कारी, सादन, झींगन, विजयसाल, चिरौंजी, तेंदू, खैर आदि प्रजाति के पेड़ों की बड़ी श्रृंखला है। वृक्षों को उनके वानस्पतिक पहचान के साथ संरक्षित किया गया है। इसी तरह यहां चिंकारा, लकड़बग्घा, जंगली सूअर, सांभर, चीतल, उल्लू आदि वन्य जीवों की भी अच्छी संख्या है।
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पर्यावरण संरक्षण के लिए उपयोगी है पार्क
यह मुख्यतया मिश्रित प्रजातियों का वन है। इस वन क्षेत्र के तहत एक नाला (हाथीनाला) बहता है, जिसमें जुलाई से फरवरी-मार्च तक जल उपलब्ध रहता है। हाथीनाला बायो डायवर्सिटी हॉटस्पॉट निकटवर्ती औद्योगिक इकाइयों से हो रहे पर्यावरण प्रदूषण को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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हाथीनाला बायो डायवर्सिटी पार्क को आकर्षक और रोमांचकारी बनाने के लिए यहां नेचर एडवेंचर गेम की शुरुआत कराई जाएगी। सीमित सुविधाओं में ही पार्क को इस तरह विकसित किया जाएगा, जिससे पर्यटकों का आकर्षण बढ़ेगा। इसकी कार्ययोजना तैयार है। जल्द ही काम शुरू हो जाएगा। - मनमोहन मिश्र, प्रभागीय वनाधिकारी, रेणुकूट वन प्रभाग।