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तीखी धूप पर आस्था पड़ी भारी
ब्यूरो अमर उजाला, सोनभद्र
Updated Sun, 22 Mar 2015 11:47 PM IST
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नवरात्र के दूसरे दिन रविवार को भी मां की आराधना का क्रम जारी रहा। घरों में दुर्गा सप्तशती के पाठ के साथ ही मां का पूजन-अर्चन होता रहा। वहीं चिलचिलाती धूप के बावजूद देवी मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की कतार लगी रही।
शक्तिनगर स्थित मां ज्वालामुखी, कुड़ारी स्थित मां कुंडवासिनी सहित प्रमुख देवी धामों में पूर्वांचल के साथ ही कई राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने मत्था टेका और मंगल की कामना की।
मप्र की सीमा से सटे स्थित मां ज्वालामुखी धाम में पूर्वांचल के साथ ही मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड के बीस हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने शीश नवाया।
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पुजारी श्लोक मिश्रा के मुताबिक भोर में साढ़े तीन बजे मंगला आरती के बाद दर्शन-पूजन के लिए पट खोल दिए गए। रात दस बजे तक पूजन-अर्चन का क्रम जारी रहा।
इसी तरह सोन पार मां कुंडवासिनी के दर्शन के लिए पूर्वांचल सहित कई राज्यों से श्रद्धालु पहुंचते रहे। यहां भोर में चार बजे विशेष पूजा के बाद मंदिर के पट दर्शन-पूजन के लिए खोल दिए गए।
यहां भी मत्था टेकने वाले श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में रही। डाला वैष्णो धाम में भी बीस हजार के करीब श्रद्धालुओं ने हाजिरी लगाई। चिलचिलाती धूप के बावजूद सड़क तक कतार लगी रही।
घुमावदार गुफा वाले रास्ते से होकर गर्भगृह स्थित मां के वैष्णवी स्वरूप (त्रिपिंडी) का दर्शन अभीभूत करता रहा। कठिन चढ़ाई और घुमावदार रास्ते से होकर शेर पर सवार मां के स्वरूप का दर्शन भक्तों का निहाल करता रहा।
यहां भी सोनभद्र-चंदौली के साथ ही बिहार और झारखंड से आए हजारों भक्तों ने शीश नवाया और सुख-समृद्धि की कामना की।
इसी तरह राबर्ट्सगंज स्थित शीतला मंदिर, रामगढ़ स्थित काली मंदिर, चोपन स्थित काली मंदिर, अनपरा बाजार स्थित दुर्गा मंदिर, इसी क्षेत्र के डिबुलगंज स्थित दुर्गा मंदिर,
ओबरा स्थित मां शारदा शक्तिपीठ, शीतला मंदिर, गोठानी स्थित वंशरा देवी, अगोरी दुर्ग स्थित मां महिषासुरमर्दिनी, सोन संगम तट स्थित अष्टभुजी मां दुर्गा, दुद्धी स्थित मां काली, शिवद्वार स्थित मां दुर्गा, मुक्खा स्थित मां के स्वरूप के दर्शन-पूजन को भीड़ उमड़ी।
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शक्तिनगर स्थित मां ज्वालामुखी, कुड़ारी स्थित मां कुंडवासिनी सहित प्रमुख देवी धामों में पूर्वांचल के साथ ही कई राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने मत्था टेका और मंगल की कामना की।
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मप्र की सीमा से सटे स्थित मां ज्वालामुखी धाम में पूर्वांचल के साथ ही मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, बिहार, झारखंड के बीस हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने शीश नवाया।
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पुजारी श्लोक मिश्रा के मुताबिक भोर में साढ़े तीन बजे मंगला आरती के बाद दर्शन-पूजन के लिए पट खोल दिए गए। रात दस बजे तक पूजन-अर्चन का क्रम जारी रहा।
इसी तरह सोन पार मां कुंडवासिनी के दर्शन के लिए पूर्वांचल सहित कई राज्यों से श्रद्धालु पहुंचते रहे। यहां भोर में चार बजे विशेष पूजा के बाद मंदिर के पट दर्शन-पूजन के लिए खोल दिए गए।
यहां भी मत्था टेकने वाले श्रद्धालुओं की संख्या हजारों में रही। डाला वैष्णो धाम में भी बीस हजार के करीब श्रद्धालुओं ने हाजिरी लगाई। चिलचिलाती धूप के बावजूद सड़क तक कतार लगी रही।
घुमावदार गुफा वाले रास्ते से होकर गर्भगृह स्थित मां के वैष्णवी स्वरूप (त्रिपिंडी) का दर्शन अभीभूत करता रहा। कठिन चढ़ाई और घुमावदार रास्ते से होकर शेर पर सवार मां के स्वरूप का दर्शन भक्तों का निहाल करता रहा।
यहां भी सोनभद्र-चंदौली के साथ ही बिहार और झारखंड से आए हजारों भक्तों ने शीश नवाया और सुख-समृद्धि की कामना की।
इसी तरह राबर्ट्सगंज स्थित शीतला मंदिर, रामगढ़ स्थित काली मंदिर, चोपन स्थित काली मंदिर, अनपरा बाजार स्थित दुर्गा मंदिर, इसी क्षेत्र के डिबुलगंज स्थित दुर्गा मंदिर,
ओबरा स्थित मां शारदा शक्तिपीठ, शीतला मंदिर, गोठानी स्थित वंशरा देवी, अगोरी दुर्ग स्थित मां महिषासुरमर्दिनी, सोन संगम तट स्थित अष्टभुजी मां दुर्गा, दुद्धी स्थित मां काली, शिवद्वार स्थित मां दुर्गा, मुक्खा स्थित मां के स्वरूप के दर्शन-पूजन को भीड़ उमड़ी।