{"_id":"63ab2106a1999d2d872fdc9c","slug":"girl-students-will-eat-on-the-dining-table-will-study-in-smart-class-sonbhadra-news-vns69075358","type":"story","status":"publish","title_hn":"Sonebhadra News: डायनिंग टेबल पर भोजन करेंगी छात्राएं, स्मार्ट क्लास में होगी पढ़ाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Sonebhadra News: डायनिंग टेबल पर भोजन करेंगी छात्राएं, स्मार्ट क्लास में होगी पढ़ाई
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिले में संचालित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों को मॉडर्न स्कूल के रूप में विकसित करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग कई बदलाव कर रहा है। इन स्कूलों में छात्राएं अब स्मार्ट क्लास में पढ़ाई करने के साथ ही डायनिंग टेबल पर बैठकर भोजन करती नजर आएंगी। इसके लिए जिला खनिज निधि से बजट निर्धारित कर दिया गया है।
आदिवासी बाहुल्य जिले में गरीब तबके की छात्राओं को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नवगठित करमा ब्लॉक को छोड़कर अन्य नौ ब्लॉकों में एक-एक कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय संचालित हैं। बेसिक शिक्षा विभाग इन स्कूलों को निजी स्कूलों की तर्ज पर विकसित कर रहा है। अब यहां व्यवस्थाएं भी मॉडर्न होंगी। शिक्षा विभाग के आग्रह पर डीएम चंद्र विजय सिंह ने इन स्कूलों में संसाधन बढ़ाने की पहल किया है। कस्तूरबा विद्यालयों में बालिकाएं अब चटाई पर नहीं बल्कि, डायनिंग टेबल पर बैठ कर भोजन करती नजर आएंगी। जिला खनिज निधि से नौ स्कूलों के लिए 24.62 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। वहीं 15.30 लाख रुपये स्मार्ट क्लास पर खर्च होगा। कुल मिलाकर करीब 40 लाख रुपये से नौ कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इसे पूरा कराने के लिए बीएसए को जिम्मेदारी दी गई है। इस धनराशि से प्रत्येक कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में स्टील की कुर्सियां खरीदी जाएंगी। इससे लिए विभाग जेम पोर्टल पर टेंडर करेगा। इसके साथ ही खेल-कूद सामग्री की खरीद भी की जाएगी।
स्मार्ट क्लास पर ख्रर्च होंगे 15 लाख
जिले के सभी नौ कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं को तकनीकी आधारित शिक्षा के लिए प्रत्येक स्कूल में 1.70 लाख रुपये खर्च होंगे। इस प्रकार बभनी, चतरा, राबर्ट्सगंज, घोरावल सहित अन्य स्थानों पर संचालित सभी नौ विद्यालयों में स्मार्ट क्लास के लिए 15.30 लाख रुपये खर्च होंगे। स्मार्ट क्लास में प्रोजेक्टर के उपयोग से छात्राएं बेहतर शिक्षा प्राप्त करेंगी। अभी तक इन स्कूलों में स्मार्ट टीवी स्थापित थी।
विज्ञापन
डायनिंग टेबल मिलने के बाद छात्राओं को भोजन करने में सहूलियत होगी। भोजन परोसने की व्यवस्था भी व्यवस्थित ढंग से हो पाएगी। स्मार्ट क्लास के जरिए बच्चे सीधे तकनीक से जुड़ेंगे। - हरिबंश कुमार, बीएसए।
विज्ञापन
आदिवासी बाहुल्य जिले में गरीब तबके की छात्राओं को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से नवगठित करमा ब्लॉक को छोड़कर अन्य नौ ब्लॉकों में एक-एक कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय संचालित हैं। बेसिक शिक्षा विभाग इन स्कूलों को निजी स्कूलों की तर्ज पर विकसित कर रहा है। अब यहां व्यवस्थाएं भी मॉडर्न होंगी। शिक्षा विभाग के आग्रह पर डीएम चंद्र विजय सिंह ने इन स्कूलों में संसाधन बढ़ाने की पहल किया है। कस्तूरबा विद्यालयों में बालिकाएं अब चटाई पर नहीं बल्कि, डायनिंग टेबल पर बैठ कर भोजन करती नजर आएंगी। जिला खनिज निधि से नौ स्कूलों के लिए 24.62 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। वहीं 15.30 लाख रुपये स्मार्ट क्लास पर खर्च होगा। कुल मिलाकर करीब 40 लाख रुपये से नौ कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। इसे पूरा कराने के लिए बीएसए को जिम्मेदारी दी गई है। इस धनराशि से प्रत्येक कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में स्टील की कुर्सियां खरीदी जाएंगी। इससे लिए विभाग जेम पोर्टल पर टेंडर करेगा। इसके साथ ही खेल-कूद सामग्री की खरीद भी की जाएगी।
विज्ञापन
स्मार्ट क्लास पर ख्रर्च होंगे 15 लाख
जिले के सभी नौ कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में पढ़ने वाली छात्राओं को तकनीकी आधारित शिक्षा के लिए प्रत्येक स्कूल में 1.70 लाख रुपये खर्च होंगे। इस प्रकार बभनी, चतरा, राबर्ट्सगंज, घोरावल सहित अन्य स्थानों पर संचालित सभी नौ विद्यालयों में स्मार्ट क्लास के लिए 15.30 लाख रुपये खर्च होंगे। स्मार्ट क्लास में प्रोजेक्टर के उपयोग से छात्राएं बेहतर शिक्षा प्राप्त करेंगी। अभी तक इन स्कूलों में स्मार्ट टीवी स्थापित थी।
विज्ञापन
डायनिंग टेबल मिलने के बाद छात्राओं को भोजन करने में सहूलियत होगी। भोजन परोसने की व्यवस्था भी व्यवस्थित ढंग से हो पाएगी। स्मार्ट क्लास के जरिए बच्चे सीधे तकनीक से जुड़ेंगे। - हरिबंश कुमार, बीएसए।