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Sonebhadra News: उद्योगों में क्रांतिकारी बदलाव ला रही जेनरेटिव एआई
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राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज सोनभद्र में जारी ईपेंस (ईपीएआईएनएस) 2025 के चौथे दिन भी तकनीकी सत्रों ने शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों की गहरी जानकारी प्रदान की। इस दिन मुख्य रूप से जेनरेटिव एआई, प्राकृतिक भाषा संसाधन (एनएलपी) और फेडरेटेड लर्निंग जैसे उभरते हुए विषयों पर विशेषज्ञों ने व्याख्यान दिए। इसमें छात्रों की विशेष भागीदारी देखी गई।
कार्यक्रम की शुरुआत आईआईआईटी इलाहाबाद के डॉ. नवीन सैनी के व्याख्यान से हुई, जिन्होंने “जेनरेटिव एआई और इसके वास्तविक जीवन पर प्रभाव” विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे चैटबॉट्स, इमेज जनरेशन मॉडल और अन्य जेनरेटिव एआई तकनीकें विभिन्न उद्योगों में क्रांतिकारी बदलाव ला रही हैं।
दूसरे सत्र में बीएचयू वाराणसी के डॉ. अवधेश कुमार ने प्राकृतिक भाषा संसाधन विषय पर जानकारी साझा की। उन्होंने भाषा मॉडल, टेक्स्ट प्रोसेसिंग और मशीन अनुवाद जैसे एनएलपी अनुप्रयोगों पर प्रकाश डाला। छात्रों ने इसमें गहरी रुचि दिखाते हुए भाषा मॉडल की कार्यप्रणाली और इसके विभिन्न उपयोगों पर प्रश्न पूछे।
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अंतिम सत्र में आईआईटी-बीएचयू वाराणसी के डॉ. ओम जी पांडेय ने फेडरेटेड लर्निंग पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि यह तकनीक डेटा गोपनीयता बनाए रखते हुए वितरित मशीन लर्निंग को संभव बनाती है।
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कार्यक्रम की शुरुआत आईआईआईटी इलाहाबाद के डॉ. नवीन सैनी के व्याख्यान से हुई, जिन्होंने “जेनरेटिव एआई और इसके वास्तविक जीवन पर प्रभाव” विषय पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि कैसे चैटबॉट्स, इमेज जनरेशन मॉडल और अन्य जेनरेटिव एआई तकनीकें विभिन्न उद्योगों में क्रांतिकारी बदलाव ला रही हैं।
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दूसरे सत्र में बीएचयू वाराणसी के डॉ. अवधेश कुमार ने प्राकृतिक भाषा संसाधन विषय पर जानकारी साझा की। उन्होंने भाषा मॉडल, टेक्स्ट प्रोसेसिंग और मशीन अनुवाद जैसे एनएलपी अनुप्रयोगों पर प्रकाश डाला। छात्रों ने इसमें गहरी रुचि दिखाते हुए भाषा मॉडल की कार्यप्रणाली और इसके विभिन्न उपयोगों पर प्रश्न पूछे।
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अंतिम सत्र में आईआईटी-बीएचयू वाराणसी के डॉ. ओम जी पांडेय ने फेडरेटेड लर्निंग पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि यह तकनीक डेटा गोपनीयता बनाए रखते हुए वितरित मशीन लर्निंग को संभव बनाती है।