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सोनभद्र: फर्जी दिव्यांग प्रमाण पर नौकरी कर रहे चार शिक्षक बर्खास्त, दर्ज होगी एफआईआर
Mon, 14 Sep 2020 05:18 PM IST
स्वाधीन तिवारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनभद्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोनभद्र
Published by: स्वाधीन तिवारी
Updated Mon, 14 Sep 2020 05:18 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
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शासन के निर्देश पर वर्ष 2010 के बाद नियुक्त शिक्षकों के प्रमाण पत्रों की जांच में चार शिक्षकों के दिव्यांग प्रमाण पत्र फर्जी मिले हैं। जांच में दिव्यांगता का स्तर निर्धारित मानक 40 फीसदी से कम मिला है। इस पर इन चारों शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया है। बीएसए डॉ गोरखनाथ पटेल ने बताया कि चारों शिक्षकों के खिलाफ एफआईआर कराने के निर्देश संबंधित खंड शिक्षा अधिकारियों को दे दिए गए हैं।
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बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षकों की फर्जी नियुक्ति की जांच का आदेश यूपी सरकार ने वर्ष 2018 में दिया था। जांच के लिए अपर जिलाधिकारी योगेंद्र बहादुर सिंह की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित हुई थी। इसमें एएसपी ओपी सिंह और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी गोरखनाथ पटेल शामिल थे।
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जांच में टीम को जयप्रकाश निवासी ग्राम उरमौरा सहायक अध्यापक प्राथमिक विद्यालय अमौली सेकेंड का 15 हजार शिक्षक भर्ती वर्ष 2016 का दिव्यांगता प्रमाण पत्र सत्यापन में 10 प्रतिशत पाया गया। इसी तरह वर्ष 2011 में भर्ती सहायक अध्यापक सरला देवी निवासी मुर्द्धवा रेणुकूट सहायक अध्यापक रासपहरी कार्यरत गनरहवा टोला ब्लॉक म्योरपुर की दिव्यांगता 15 फीसदी मिली।
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सहायक अध्यापक माया शुक्ला निवासी उरमौरा तैनाती प्राथमिक विद्यालय बघुआरी की दिव्यांगता 20 फीसदी और सहायक अध्यापक राजेश कुमार द्विवेदी निवासी ग्राम व पोस्ट मऊ जिला चित्रकूट तैनाती प्राथमिक विद्यालय निपराज कार्यरत लोढ़ी की दिव्यांगता 10 प्रतिशत मिली।
एडीएम योगेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि इन सभी शिक्षकों का दिव्यांगता प्रमाण पत्र जांच में फर्जी पाया गया। इस पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने इन चारों शिक्षकों का दिव्यांगता प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया। ऐसे में चारों शिक्षकों की सेवा समाप्त कर दी गई है।
इसके पूर्व भी करीब एक माह पहले पांच शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्र फर्जी मिलने पर उन्हें बर्खास्त कर उनके खिलाफ शिक्षा विभाग ने एफआईआर दर्ज कराया था।
एडीएम योगेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि इन सभी शिक्षकों का दिव्यांगता प्रमाण पत्र जांच में फर्जी पाया गया। इस पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने इन चारों शिक्षकों का दिव्यांगता प्रमाण पत्र निरस्त कर दिया। ऐसे में चारों शिक्षकों की सेवा समाप्त कर दी गई है।
इसके पूर्व भी करीब एक माह पहले पांच शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्र फर्जी मिलने पर उन्हें बर्खास्त कर उनके खिलाफ शिक्षा विभाग ने एफआईआर दर्ज कराया था।