{"_id":"67c5eb7305b195bf33034b6c","slug":"foundation-day-today-there-has-been-a-lot-of-progress-in-36-years-yet-the-stain-of-backwardness-has-not-been-erased-sonbhadra-news-c-194-1-son1002-125100-2025-03-03","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्थापना दिवस आज : 36 वर्षों में खूब हुई तरक्की, फिर भी नहीं मिटा पिछड़ेपन का दाग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्थापना दिवस आज : 36 वर्षों में खूब हुई तरक्की, फिर भी नहीं मिटा पिछड़ेपन का दाग
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चार मार्च 1989 को नए जिले के रूप में अस्तित्व में आए सोनभद्र को 36 साल हो चुके हैं। इन वर्षों में जनपद ने तरक्की की नई रफ्तार देखी। कच्ची पगडंडियां अब पक्की सड़कों का रूप ले चुकी हैं। देश-प्रदेश में सोनभद्र का अलग स्थान है।
यहां की प्रचूर खनिज संपदा के दम पर यूपी प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है। बावजूद कई क्षेत्रों में दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल जैसी बुनियादी जरूरतों के अभाव में जनपद आज भी पिछड़ेपन के दाग से बाहर नहीं निकल पाया है।
चाहे देश की आजादी का आंदोलन रहा हो या फिर उसके बाद के अन्य आंदोलन। सभी में सोनभद्र के लोगों की बड़ी सहभागिता रही है। मिर्जापुर के दक्षिणांचल के रूप में चर्चित रहे इस क्षेत्र को प्रकृति ने अनुपम सौंदर्य से नवाजा है। यहां के पहाड़, जंगल, झरने, वादियां अनूठी हैं।
विज्ञापन
पूरे प्रदेश में प्रकृति की ऐसी समृद्ध थाती कहीं और नहीं है। आज भी सोनभद्र सरकार को राजस्व देने में प्रदेश के टॉप-5 जिलों में शुमार है। बावजूद विडंबना है कि 36 वर्षों में भी इसके विकास की कसक पूरी नहीं हो पाई है।
सोनभद्र के बाद सृजित कई अन्य जिले जब विकास की रेस में बहुत आगे निकल चुके हैं, तब भी सोनभद्र का पिछड़ेपन की कतार में ही खड़े रहना चिंतनीय है। वह भी तब, जबकि यह देश की ऊर्जा राजधानी है।
यहां की बनने वाली बिजली से आधा प्रदेश रोशन होता है। यहां के गिट्टी, बालू, सीमेंट पूरे पूर्वांचल के विकास का आधार हैं। जिला मुख्यालय और अन्य शहरी क्षेत्रों में तो नजारा जरूर अलग दिखता है, लेकिन गांवों की तरफ बढ़ते ही विकास की पोल खुलने लगती है।
जिले की बड़ी आबादी आज भी शुद्ध पेयजल को तरस रही है तो लोगों को अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं भी मयस्सर नहीं हो पाई। ग्रामीण अस्पतालों में डॉक्टर और दवाएं दोनों नदारद हैं। हर गांव में स्कूल होने के बाद भी शिक्षकों के भारी अभाव से शिक्षा के स्तर का बुरा हाल है। पर्यटन के क्षेत्र में जिले को आगे ले जाने के वादे तो खूब होते रहे हैं, मगर अब तक कोई ठोस काम धरातल पर नहीं हुआ है।
-- --
प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे लोग
नया जिला बनने के बाद यहां औद्योगिक विकास तो खूब हुआ, लेकिन इसके साथ ही प्रदूषण में भी बेतहाशा वृद्धि हुई है। सोन नदी के दक्षिण का पूरा हिस्सा हाई पाल्यूटेड जोन में है। क्रशर प्लांटों से निकलने वाली धूल, पॉवर प्लांटों की राख और कोयले के कण वातावरण में घुलकर लोगों को बीमार कर रहे हैं। यहां की हवा, मिट्टी, पानी गंभीर प्रदूषण की जद में है, बावजूद इसके समाधान का कोई प्रयास नहीं हो रहा। औद्योगिक परियोजनाओं की बड़ी संख्या के बाद भी यहां बेरोजगारी गंभीर समस्या है। युवा काम के लिए भटक रहे हैं।
डॉक्टर-इंजीनियर और हवाई जहाज भी
जिले का अतीत और वर्तमान भले ही बहुत अच्छा न रहा हो लेकिन सुनहरे भविष्य को लेकर उम्मीदें बनी हुई हैं। यहां इंजीनियरिंग कॉलेज और मेडिकल कॉलेज की स्थापना के बाद यहीं से डॉक्टर-इंजीनियर की पौध तैयार होगी। म्योरपुर एयरपोर्ट से देश-दुनिया में उड़ान का सपना साकार होगा। नए एक्सप्रेस वे के निर्माण से सभी बड़े शहरों से कनेक्टिविटी होगी तो पंप स्टोरेज पर आधारित नई पावर परियोजनाओं से जिले का ऊर्जा क्षेत्र भी समृद्ध होगा।
सोनभद्र का विकास सरकार की प्राथमिकता में है। इसके लिए हर स्तर पर लगातार प्रयास भी हो रहे हैं। शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए हर घर जल परियोजना का काम अंतिम चरण में है। जल्द ही म्योरपुर एयरपोर्ट का काम भी पूरा हो जाएगा और वहां से उड़ानें शुरू होंगी। पर्यटन विकास की कई योजनाओं पर काम चल रहा है। -बद्रीनाथ सिंह, डीएम।
विज्ञापन
यहां की प्रचूर खनिज संपदा के दम पर यूपी प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है। बावजूद कई क्षेत्रों में दुश्वारियां कम नहीं हुई हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल जैसी बुनियादी जरूरतों के अभाव में जनपद आज भी पिछड़ेपन के दाग से बाहर नहीं निकल पाया है।
विज्ञापन
चाहे देश की आजादी का आंदोलन रहा हो या फिर उसके बाद के अन्य आंदोलन। सभी में सोनभद्र के लोगों की बड़ी सहभागिता रही है। मिर्जापुर के दक्षिणांचल के रूप में चर्चित रहे इस क्षेत्र को प्रकृति ने अनुपम सौंदर्य से नवाजा है। यहां के पहाड़, जंगल, झरने, वादियां अनूठी हैं।
विज्ञापन
पूरे प्रदेश में प्रकृति की ऐसी समृद्ध थाती कहीं और नहीं है। आज भी सोनभद्र सरकार को राजस्व देने में प्रदेश के टॉप-5 जिलों में शुमार है। बावजूद विडंबना है कि 36 वर्षों में भी इसके विकास की कसक पूरी नहीं हो पाई है।
सोनभद्र के बाद सृजित कई अन्य जिले जब विकास की रेस में बहुत आगे निकल चुके हैं, तब भी सोनभद्र का पिछड़ेपन की कतार में ही खड़े रहना चिंतनीय है। वह भी तब, जबकि यह देश की ऊर्जा राजधानी है।
यहां की बनने वाली बिजली से आधा प्रदेश रोशन होता है। यहां के गिट्टी, बालू, सीमेंट पूरे पूर्वांचल के विकास का आधार हैं। जिला मुख्यालय और अन्य शहरी क्षेत्रों में तो नजारा जरूर अलग दिखता है, लेकिन गांवों की तरफ बढ़ते ही विकास की पोल खुलने लगती है।
जिले की बड़ी आबादी आज भी शुद्ध पेयजल को तरस रही है तो लोगों को अच्छी स्वास्थ्य सेवाएं भी मयस्सर नहीं हो पाई। ग्रामीण अस्पतालों में डॉक्टर और दवाएं दोनों नदारद हैं। हर गांव में स्कूल होने के बाद भी शिक्षकों के भारी अभाव से शिक्षा के स्तर का बुरा हाल है। पर्यटन के क्षेत्र में जिले को आगे ले जाने के वादे तो खूब होते रहे हैं, मगर अब तक कोई ठोस काम धरातल पर नहीं हुआ है।
प्रदूषण की समस्या से जूझ रहे लोग
नया जिला बनने के बाद यहां औद्योगिक विकास तो खूब हुआ, लेकिन इसके साथ ही प्रदूषण में भी बेतहाशा वृद्धि हुई है। सोन नदी के दक्षिण का पूरा हिस्सा हाई पाल्यूटेड जोन में है। क्रशर प्लांटों से निकलने वाली धूल, पॉवर प्लांटों की राख और कोयले के कण वातावरण में घुलकर लोगों को बीमार कर रहे हैं। यहां की हवा, मिट्टी, पानी गंभीर प्रदूषण की जद में है, बावजूद इसके समाधान का कोई प्रयास नहीं हो रहा। औद्योगिक परियोजनाओं की बड़ी संख्या के बाद भी यहां बेरोजगारी गंभीर समस्या है। युवा काम के लिए भटक रहे हैं।
डॉक्टर-इंजीनियर और हवाई जहाज भी
जिले का अतीत और वर्तमान भले ही बहुत अच्छा न रहा हो लेकिन सुनहरे भविष्य को लेकर उम्मीदें बनी हुई हैं। यहां इंजीनियरिंग कॉलेज और मेडिकल कॉलेज की स्थापना के बाद यहीं से डॉक्टर-इंजीनियर की पौध तैयार होगी। म्योरपुर एयरपोर्ट से देश-दुनिया में उड़ान का सपना साकार होगा। नए एक्सप्रेस वे के निर्माण से सभी बड़े शहरों से कनेक्टिविटी होगी तो पंप स्टोरेज पर आधारित नई पावर परियोजनाओं से जिले का ऊर्जा क्षेत्र भी समृद्ध होगा।
सोनभद्र का विकास सरकार की प्राथमिकता में है। इसके लिए हर स्तर पर लगातार प्रयास भी हो रहे हैं। शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए हर घर जल परियोजना का काम अंतिम चरण में है। जल्द ही म्योरपुर एयरपोर्ट का काम भी पूरा हो जाएगा और वहां से उड़ानें शुरू होंगी। पर्यटन विकास की कई योजनाओं पर काम चल रहा है। -बद्रीनाथ सिंह, डीएम।