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खाद खरीद पर किसानों को नहीं, कंपनी को मिलेगी सब्सिडी
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सोनभद्र। खाद खरीद करने पर किसानों के मोबाइल नंबर पर सब्सिडी से संबंधित आए मैसेज को लेकर किसानों में ऊहापोह की स्थिति है। किसानों का कहना है कि मोबाइल नंबर पर सब्सिडी का एसएमएस आ रहा है, लेकिन सब्सिडी की धनराधि उनके खाते में नहीं जा रही है। वहीं अधिकारियों का कहना है कि किसानों की तरफ से खाद खरीद करने पर सब्सिडी संबंधित खाद निर्माता कंपनी को मिलता है।
राबर्ट्सगंज ब्लॉक के सिरपालपुर व बेठिगांव के अनिल, मनीष सहित अन्य किसानों का कहना है कि उन्होंने खाद की दुकान से यूरिया खरीदी है। पॉस मशीन पर अंगूठा लगाने व आधार नंबर बताने पर खाद मिला है। खाद खरीद करने पर उनके मोबाइल नंबर पर सब्सिडी से संबंधित एसएमएस आया है। लेकिन उनके बैंक खाते में सब्सिडी की धनराशि नहीं आ रही है। यही सवाल गांव के अन्य किसानों का भी है। सब्सिडी का मैसेज मोबाइल नंबर पर आने से किसानों में ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी पीयूष राय का कहना है कि मैसेज में दिखने वाला सब्सिडी किसानों को नहीं मिलेगा बल्कि संबंधित खाद निर्माण कंपनी के खाते में सब्सिडी जाता है। खाद खरीद में पारदर्शिता बने, इसलिए ये मैसेज किसानों के मोबाइल नंबर पर भेजा जाता है। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि जिले में करीब 315 संस्थागत खाद विक्रेता हैं। किसानों से संस्थागत विक्रेताओं से ही खाद खरीद करने की अपील की हैं। कहा कि जब किसान जागरूक होंगे तभी खाद की कालाबाजारी रुकेेगी। इसका लाभ भी किसानों को ही मिलेगा।
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राबर्ट्सगंज ब्लॉक के सिरपालपुर व बेठिगांव के अनिल, मनीष सहित अन्य किसानों का कहना है कि उन्होंने खाद की दुकान से यूरिया खरीदी है। पॉस मशीन पर अंगूठा लगाने व आधार नंबर बताने पर खाद मिला है। खाद खरीद करने पर उनके मोबाइल नंबर पर सब्सिडी से संबंधित एसएमएस आया है। लेकिन उनके बैंक खाते में सब्सिडी की धनराशि नहीं आ रही है। यही सवाल गांव के अन्य किसानों का भी है। सब्सिडी का मैसेज मोबाइल नंबर पर आने से किसानों में ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। इस संबंध में जिला कृषि अधिकारी पीयूष राय का कहना है कि मैसेज में दिखने वाला सब्सिडी किसानों को नहीं मिलेगा बल्कि संबंधित खाद निर्माण कंपनी के खाते में सब्सिडी जाता है। खाद खरीद में पारदर्शिता बने, इसलिए ये मैसेज किसानों के मोबाइल नंबर पर भेजा जाता है। जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि जिले में करीब 315 संस्थागत खाद विक्रेता हैं। किसानों से संस्थागत विक्रेताओं से ही खाद खरीद करने की अपील की हैं। कहा कि जब किसान जागरूक होंगे तभी खाद की कालाबाजारी रुकेेगी। इसका लाभ भी किसानों को ही मिलेगा।
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